अपना शहर चुनें

States

उत्तरप्रदेश में जन्मे सचिन पायलट की राजस्थान में सियासी उड़ान, छोटी उम्र में किए बड़े काम

सचिन पायलट.
सचिन पायलट.

बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के बाद सचिन पायलट के सिर पर जीत का सेहरा मुख्यमंत्री के रूप में बांधा जा सकता है. हालांकि इसका फैलसा अब गुरुवार तक के लिए टाल दिया गया है.

  • Share this:
सचिन पायलट की गिनती देश के कामयाब युवा नेताओं में होती है. सबसे कम उम्र के सासंद बनने से लेकर 36 साल की उम्र में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष का पद संभालने वाले सचिन पायलट विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के स्टार चेहरा हैं. प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर सचिन पायलट के लिए यह चुनाव चुनौती और अवसर दोनों के रूप में है.

सचिन पायलट को को उस दौर में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जब कांग्रेस महज 21 सीटों पर राजस्थान में सिमट गई थी, इसके बाद विपक्ष में रहते हुए सचिन पायलट ने पार्टी प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर अपनी टीम बनाने के साथ सरकर को लगातार घेरा. बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के बाद जीत का सेहरा मुख्यमंत्री के रूप में बांधा जा सकता है. हालांकि इसका फैलसा अब गुरुवार तक के लिए टाल दिया गया है.

ये भी पढ़ें- ऐसे हुई थी सचिन पायलट की सारा से मुलाकात, शादी के लिए छोड़ना पड़ा था घर



7 सितम्बर 1977 को उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में जन्मे सचिन पायलट ने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली के एयरफोर्स बाल भारती स्कूल से की, दिल्ली के ही सेंट स्टीफेंस कॉलेज से उन्होंने अंग्रेजी ऑनर्स में बीए किया. पायलट ने ग्रेजुएशन के बाद बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो में कुछ समय के लिए काम किया. इसके बाद पायलट एमबीए करने के लिए अमेरिका चले गए. उन्होंने अमेरिका के पेनिसिलवेनिया यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की.
सचिन के पिता राजेश पायलट कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में एक थे. दौसा के पास सड़क हादसे में पिता राजेश पायलट के निधन के बाद सचिन ने उनकी राजनीतिक विरासत संभाली. बीते 16 साल से पायलट राजनीतिक जीवन में हैं. दरअसल, अपने पिता राजेश पायलट की मौत के बाद सचिन पायलट साल 2002 में 10 फरवरी को कांग्रेस में शामिल हुए. 2004 में पायलट ने राजस्थान की दौसा लोकसभा सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा और करीब 1 लाख 20 हजार मतों से अपने प्रतिद्वन्दी को हराया.

ये भी पढ़ें- मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे क्यों हैं अशोक गहलोत? पढ़ें, वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं

26 साल की उम्र में सचिन पायलट सांसद निर्वाचित हो गए थे. साल 2009 में पायलट ने राजस्थान की अजमेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़कर भाग्य आजमाया और जीत भी दर्ज की, इस बार पायलट यूपीए-2 सरकार में मंत्री भी बने.

यही नहीं अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए मंत्री रहने के दौरान प्रादेशिक सेना में पायलट लेफ्टिनेंट भी बन गए, सिख रेजीमेंट की 124 टेरिटोरियल आर्मी बटालियन में अधिकारी के तौर पर उन्हें कमीशन दिया गया. पायलट का सेना में शामिल होना इसलिए भी खास रहा क्योकिं उन्हें लेफ्टिनेंट की मानद रैंक नहीं दी गई बल्कि, उन्होंने बाकायदा परीक्षा पास कर इस रैंक को हासिल किया था.

सचिन के पिता राजेश पायलट वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर थे और उनके दादा भारतीय सेना में गैर कमीशन अधिकारी रह चुके थे. राजस्थान में वर्ष 2013 के दिसम्बर में जब विधानसभा चुनाव हुए और सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस महज 21 सीटें ही जीत पाई तो मझदार में हिचकोले खाती कांग्रेस की नैया पार लगाने की जिम्मेदारी सचिन पायलट को दी गई.

पायलट ने 21 जनवरी 2014 को राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर पद संभाला. हालांकि, उनके पद संभालने के तुरंत बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, राजस्थान की सबी 25 सीटें हार गई लेकिन, महज 4 माह बाद 4 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस ने चुनाव लड़ा और 4 में से 3 सीटों पर जीत दर्ज की.

2018 में एक बार फिर दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ और सभी सीटें भाजपा के हाथ से निकलकर कांग्रेस की झोली में चली गई. सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस ने निकाय और पंचायत उपचुनावों में भी बड़ी जीत हासिल की.

दाैसा से पहली बार सांसद बने थे सचिन पायलट


► 7 सितंबर 1977 को यूपी के सहारनपुर में जन्म
► सचिन के पिता राजेश पायलट कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में रहे
 सचिन पायलट 2004 में दौसा सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीतकर पहली बार सासंद बने
 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने सचिन पायलट
 31 साल की उम्र में दूसरी बार अजमेर से सांसद बने, केंद्र में मंत्री बने
 केंद्र में कॉर्पोरेट अफेयर्स, संचार मंत्री रहे हैं सचिन
 36 साल की उम्र में राजस्थान कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष की कमान संभाली
 राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट युवा नेताओं में अग्रणी
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज