राजस्थान: कारोबारियों की मांग पर झुकी गहलोत सरकार, बढ़ाया गया शुल्क होगा कम
Jaipur News in Hindi

राजस्थान: कारोबारियों की मांग पर झुकी गहलोत सरकार, बढ़ाया गया शुल्क होगा कम
कृषक कल्याण शुल्क का विरोध प्रदेश में राजनीतिक मुद्दा भी बन रहा था.

राज्य सरकार द्वारा हाल ही में कृषि जिंसों पर लगाए गए 2 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क (Farmer welfare fee) का कारोबारी लगातार विरोध कर रहे थे.

  • Share this:
जयपुर. राज्य सरकार द्वारा हाल ही में कृषि जिंसों पर लगाए गए 2 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क (Farmer welfare fee) को कम किया जाएगा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) कारोबारियों की मांग को देखते हुए शुल्क कम करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं. विभिन्न कृषि जिंसों पर अब 2 प्रतिशत की जगह एक और आधा प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा. बता दें कि कारोबारी शुरुआत से ही इसका विरोध कर रहे थे.

गुरुवार देर रात मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा है कि जिन कृषि जिंसों पर आधा प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जा रहा है उन पर अब 2 प्रतिशत की जगह आधा प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क लेने के निर्देश दे गए हैं. वहीं जिन जिंसों पर 1 और 1.60 प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जा रहा है उन पर भी अब 2 की बजाय एक प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाएगा. नए निर्देशों के मुताबिक अब दलहन, तिलहन और अनाज पर 1 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क होगा जबकि ईसबगोल, जीरा, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि पर आधा प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क लगेगा. वहीं ऊन को इस शुल्क से मुक्त रखा गया है. पहले सभी जिंसों पर 2 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क का प्रावधान राज्य सरकार द्वारा किया गया था.





कारोबारी कर रहे थे विरोध
राज्य सरकार द्वारा लगाए गए 2 प्रतिशत कृषक कल्याण शुल्क का बड़े स्तर पर विरोध देखने को मिल रहा था. राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के आह्वान पर पिछले दिनों प्रदेश की सभी मंडियों में हड़ताल रही थी जबकि कुछ मंडियां अब भी इस शुल्क के विरोध में बंद है. राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता के मुताबिक सीएम ने पिछले दिनों ही इस मसले पर सकारात्मक रुख दिखाया था. उसके बाद मण्डियों में हड़ताल वापस ले ली गई थी. अब संघ के साथ दोबारा बातचीत के बाद सीएम ने इस सम्बन्ध में अधिकारियों को शुल्क कम करने के निर्देश दे दिए हैं.

बन रहा था राजनीतिक मुद्दा
कृषक कल्याण शुल्क का विरोध प्रदेश में राजनीतिक मुद्दा भी बन रहा था. बीजेपी-रालोपा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों ने इसे लेकर विरोध जताया था और शुल्क हटाने की मांग की थी. वहीं पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी ट्वीट कर राज्य सरकार से शुल्क वापस लेने की मांग की थी. विभिन्न राजनीतिक और कारोबारी संगठन भी इसे लेकर विरोध जता रहे थे.

कारोबार को बढ़ावा सरकार का ध्येय
उधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक साथ कई ट्वीट कर इस मुद्दे पर कहा है कि हमारा प्रयास हमेशा कारोबार को बढ़ावा देने का रहा है. कोरोना काल में व्यापारी वर्ग ने कोई भूखा ना सोए का संकल्प साकार करने में सरकार का पूरा साथ दिया है. सीएम ने कहा कि विभिन्न व्यापारिक संगठनों से चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया है. साथ ही पिछले दिनों वीडियो कांफ्रेंस के जरिए मंत्रियों, सांसदों और विधायकों से भी इस मुद्दे पर राय जानी थी. सीएम ने कहा कि कृषक कल्याण शुल्क के कारण व्यापारियों औऱ उद्योगों को हो रही तकलीफ का अहसास राज्य सरकार को है. शुल्क कम करने से कारोबारियों और प्रसंस्करण उद्योगों को राहत मिलेगी. वहीं सीमावर्ती जिलों में पड़ौसी राज्यों के मुकाबले अंतर कम होगा और प्रतिस्पर्धात्मक व्यापार में आसानी होगी.

Ajmer:नाबालिग से रेप का आरोपी निकला कोरोना पॉजिटिव, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

Rajasthan: मनरेगा में 10 बरसों का टूटा रिकॉर्ड, 35.59 लाख श्रमिकों को मिला काम
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading