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राजस्थान में लगातार बढ़ते बिजली संकट के बीच किसानों के लिए एक और बुरी खबर

गहलोत सरकार ने किसानों को वैकल्पिक खाद के उपयोग की नसीहत दी है.

गहलोत सरकार ने किसानों को वैकल्पिक खाद के उपयोग की नसीहत दी है.

राजस्थान में बिजली संकट के बीच किसानों के सामने डीएपी खाद की किल्लत पैदा हो गई है. कई जिलों में किसान खाद वितरण केंद्रो व कृषि दफ्तरों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. राजस्थान सरकार ने इस संकट को भी केंद्र के मत्थे डालने की कोशिश की. राजस्थान कृषि मंत्री लालचंद कटारिया का कहना है कि केंद्र ने हमारे हिस्से का खाद ही नहीं दिया है.

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जयपुर. मानसून की बेरुखी और राजस्थान में लगातार बढ़ते बिजली संकट के बीच किसानों के लिए एक और बुरी खबर आई है. राजस्थान के किसान रबी की फसल की तैयारियों में हैं लेकिन इस वक़्त खाद का संकट बन आया है. खाद के लिए किसान घंटो कतारो में खड़े हो रहे हैं. बावजूद खाद नहीं मिल रही है. राजस्थान सरकार ने डीएपी खाद के संकट के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. गहलोत सरकार ने किसानों को वैकल्पिक खाद के उपयोग की नसीहत दी है.

प्रदेश में ग्राम सेवा सहकारियों के गोदाम और खाद की दुकानें तो खुली हुई हैं लेकिन उन्हें डीएपी खाद नहीं मिल पा रहा है. खाद की दुकानों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से किसानों के आक्रोश की खबरें भी लगातार आ रही हैं. किसानों का आरोप है कि खाद महंगे दामों में ब्लैक से बेची जा रही है और उसका अवैध भंडारण किया जा रहा है. समय पर खाद नहीं मिलने से रबी की बुवाई में देरी हो रही है. चिन्ता इस बात को लेकर है कि अगले 8-10 दिन इसी तरह की स्थिति रही तो खेतों में सरसों की बुवाई के लिए जरुरी नमी खत्म हो जाएगी. जानकारी के अनुसार सरसों की बुवाई में प्रति हेक्टेयर में करीब 40 से 50 किलो डीएपी खाद की जरूरत होती है.

कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया के मुताबिक प्रदेश में अप्रेल से सितम्बर तक 4.50 लाख मीट्रिक टन डीएपी की डिमाण्ड भेजी गई थी लेकिन केन्द्र सरकार ने 3.07 लाख मीट्रिक टन की ही आपूर्ति हो पाई. वहीं अक्टूबर महीने में भी 1.50 लाख मीट्रिक टन डीएपी की मांग के विरुद्ध 68 हजार मीट्रिक टन डीएपी ही स्वीकृत की गई. कृषि मंत्री का कहना है कि डीएपी दूसरे देशों से इम्पोर्ट होता है और पर्याप्त मात्रा में नहीं आ पा रहा है. इसीलिए इसकी किल्लत की स्थिति बनी है. सीएम गहलोत के साथ ही कृषि मंत्री ने इसे लेकर केन्द्र सरकार को पत्र लिखे हैं. अब भारत सरकार ने 10 से 15 दिन में आपूर्ति करने का आश्वासन दिया है. लेकिन यह समय काफी फसल के लिहाज से काफी ज्यादा होगा.

सिंगल सुपर फॉस्फेट का करें इस्तेमाल
सरकार किसानों को डीएपी की जगह सिंगल सुपर फॉस्फेट यानि एसएसपी खाद के इस्तेमाल की सलाह दे रही है. एसएसपी खाद आसानी से उपलब्ध भी है और यह सस्ता भी है. कटारिया के मुताबिक प्रति बैग डीएपी में 23 किलोग्राम फॉस्फोरस और 9 किलोग्राम नाइट्रोजन पाई जाती है. यदि विभाग द्वारा दी गई सलाह के मुताबिक डीएपी के विकल्प के तौर पर 3 बैग एसएसपी और 1 बैग यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है तो यह डीएपी से बेहतर साबित हो सकता है.

डीएपी के एक बैक की कीमत 1200 रुपये है जबकि एसएसपी और यूरिया इस्तेमाल करने पर 1166 रुपये की ही लागत आएगी. प्रदेश में खाद का संकट कमोबेश हर बार खड़ा होता है और इसकी एक वजह समय पर स्थितियों का सही आकलन नहीं कर पाना भी होता है. कई बार केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के बीच समुचित संवाद के चलते भी ऐसी स्थितियां बनती है. इस बार पर्याप्त इम्पोर्ट नहीं होने से खाद का संकट खड़ा हुआ है और किसान खाद के लिए सरकार का मुंह ताक रहा है.

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