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संकट में अन्नदाता: पहले टिड्डी फिर ओलावृष्टि और अब कोरोना ने किया बर्बाद
Jaipur News in Hindi

Dinesh Sharma | News18 Rajasthan
Updated: March 26, 2020, 1:03 PM IST
संकट में अन्नदाता: पहले टिड्डी फिर ओलावृष्टि और अब कोरोना ने किया बर्बाद
प्रदेश में इस बार रबी की फसल की बंपर बुवाई हुई थी. लेकिन परिस्थितियों ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

पहले टिड्डी दल का हमला (Locust terror) फिर ओलावृष्टि की मार (Hailstorm) और अब कोरोना का प्रकोप (COVID-19). इन 3 कारणों से किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं.

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जयपुर. पहले टिड्डी दल का हमला (Locust terror) फिर ओलावृष्टि की मार (Hailstorm) और अब कोरोना का प्रकोप (COVID-19). इन 3 कारणों से किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. बार-बार मौसम खराब होने से जहां फसलें बर्बाद होती जा रही हैं वहीं दूसरी ओर किसान () अपनी फसल को बाजार में बेच भी नहीं पा रहे हैं. प्रदेश में पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि ने फसल को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया. जो फसल इस बर्बादी से बची किसान उसे बेचने की तैयारी कर ही रहा था कि इसी बीच देश-प्रदेश में कोरोना का प्रकोप हो गया. इस महामारी के बेकाबू होने की आशंका के चलते समर्थन मूल्य पर खरीद की प्रक्रिया को बीच में ही स्थगित कर दिया गया.

बार-बार बदल रहा मौसम किसानों की चिंता बढ़ा रहा
राजफैड ने सरसों और चना खरीद की तैयारी शुरू कर दी थी और इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी शुरू हो गए थे. एफसीआई ने भी गेहूं खरीद की तैयारी कर ली थी. लेकिन अब दोनों ही संस्थाओं ने खरीद की प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है. लेकिन इस बीच बार-बार बदल रहा मौसम किसानों की चिंता बढ़ा रहा है. फसल अभी खेतों में कटी पड़ी है. मौसम की मार बची हुई उम्मीदों पर भी पानी फेर सकती है. कुछ उम्मीदों पर तो बुधवार को हुई बारिश ने पानी फेर दिया है. लॉकडाउन की स्थिति होने से किसान मंडियों में भी अपनी फसल नहीं बेच पा रहे हैं. किसानों को अपनी रही सही फसल के भी खराब होने का डर सता रहा है.

बंपर बुवाई के बावजूद मायूस किसान



प्रदेश में इस बार रबी की फसल की बंपर बुवाई हुई थी. लेकिन परिस्थितियों ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार रबी सीजन में 93 लाख 30 हजार हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य रखा था, लेकिन बुवाई इसके मुकाबले 99 लाख 6 हजार हेक्टेयर में हुई. रबी सीजन में लक्ष्य के मुकाबले 106.18 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई हुई. गेहूं समेत खाद्यान्न की बुवाई 114.17 प्रतिशत क्षेत्र में यानि लक्ष्य से ज्यादा हुई.



कोरोना बना कोढ़ में खाज
इसी तरह चना समेत दलहन की बुवाई भी लक्ष्य को पार कर 133.28 प्रतिशत क्षेत्र में हुई. तिलहन की बुवाई का आंकड़ा 92.55 प्रतिशत क्षेत्र में ही हुई. अच्छी बुवाई के बाद प्रदेश में अच्छी पैदावर की उम्मीद थी. लेकिन पहले टिड्डी दल के हमले ने और फिर ओलावृष्टि ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया. अब रही सही कसर कोरोना के प्रकोप ने पूरी कर दी है. इसने कोढ़ में खाज का काम करते हुए किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

समर्थन मूल्य पर खरीद हुई स्थगित
प्रदेश में समर्थन मूल्य पर दलहन और तिलहन की खरीद के लिये कोटा संभाग में 6 मार्च से रजिस्ट्रेशन शुरू किया गया था जबकि शेष राजस्थान में 18 मार्च से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ था. कोटा संभाग में 16 मार्च से सरसों और चने की खरीद शुरू भी हो चुकी थी जबकि प्रदेश के अन्य हिस्सों में 1 अप्रेल से खरीद शुरू होनी थी. कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते राजफैड द्वारा आगामी आदेशों तक खरीद स्थगित कर दी गई है. उधर भारतीय खाद्य निगम द्वारा गेहूं की खरीद भी स्थगित की जा चुकी है.

प्रदेश की सभी 247 कृषि मंडियां बंद
कोटा संभाग के जिलों में गेहूं के समर्थन मूल्य पर खरीद 15 मार्च से ही शुरू हो चुकी थी जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में 1 अप्रेल से खरीद शुरू करने की तैयारी थी. अब देश को चूंकि 14 अप्रैल तक लॉक डाउन किया जा चुका है. ऐसे में अप्रेल माह में भी यह खरीद शुरू हो पाएगी यह कहा नहीं जा सकता. समर्थन मूल्य पर दलहन और तिलहन की खरीद राजफैड के जरिए की जाती है जबकि गेहूं की खरीद एफसीआई के जरिए होती है. लॉक डाउन के चलते प्रदेश की सभी 247 कृषि मंडियां भी बंद हैं.

 

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First published: March 26, 2020, 11:55 AM IST
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