Rajasthan: निजी स्कूलों में फीस वसूली का मामला, हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच में आज अहम सुनवाई

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद निजी स्कूल मनमानी पर उतरे हुये हैं.
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद निजी स्कूल मनमानी पर उतरे हुये हैं.

निजी स्कूलों की फीस (Fee collection) के मामले को लेकर सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट (High Court) में अहम सुनवाई होगी. इस सुनवाई पर लाखों अभिभावकों की नजरें टिकी है.

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जयपुर. निजी स्कूलों में फीस वसूली (Fee Collection) के मामले में सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट (High Court) में अहम सुनवाई होगी. अधिवक्ता सुनील समदरिया ने सिंगल बेंच के फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी है. मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत माहंती की डिवीजन बैंच (Division Bench) 28 सितंबर इस पूरे मामले की सुनवाई करेगी. मामला निजी स्कूलों की फीस से जुड़ा होने के कारण सुनवाई पर प्रदेश के लाखों अभिभावकों की नजर टिकी है. वहीं, निजी स्कूल संचालक भी इस पर नज़रे गड़ाये हुए हैं. 7 सितम्बर को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अंतरिम आदेश देते हुए निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस का 70 प्रतिशत चार्ज करने की छूट दी थी. उसे डिवीजन बैंच में चुनौती दी गई है.

इस आधार पर दी चुनौती
अधिवक्ता सुनील समदरिया ने अपील दायर करते हुए कहा था कि एकलपीठ ने अंतरिम आदेश से स्कूलों को 70 प्रतिशत फीस वसूलने का आदेश दे दिया जो कि पूरी तरह से गलत है. अंतरिम आदेश से कोर्ट ने पूरी रिट को ही लगभग डिसाइड कर दिया है. यह सही नहीं है. वहीं, वर्तमान में राजस्थान स्कूल फीस रेगुलेशन एक्ट 2016 की पालना भी कोई स्कूल नहीं कर रही है. इस एक्ट के तहत पेरेंट-टीचर्स एसोसिएशन स्कूलों में फीस का निर्धारण करती है. लेकिन, अधिकतर स्कूलों में अभिभावकों को इसका सदस्य ही नहीं बनाया गया है. वहीं स्कूलों ने एकलपीठ में किसी भी अभिभावक को पार्टी नहीं बनाया. ऐसे में इस आदेश पर रोक लगाई जाए. पिछली सुनवाई में डिवीजन बैंच ने अपील पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, निदेशक माध्यमिक शिक्षा और कैथोलिक एजुकेशन सोसायटी को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा था.

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यह था एकलपीठ का आदेश


जस्टिस एसपी शर्मा की एकलपीठ में कैथोलिक एजुकेशन सोसायटी, प्रोग्रेसिव एजुकेशन सोसायटी व अन्य की याचिकाओं के जरिए करीब 200 स्कूलों ने राज्य सरकार के फीस स्थगन के 9 अप्रैल और 7 जुलाई के आदेश को चुनौती दी थी. राज्य सरकार के इन आदेशों से निजी स्कूल फीस चार्ज नहीं कर पा रहे थे. निजी स्कूलों की ओर से कहा गया था कि निजी स्कूल्स CBSC के निर्देश से अप्रेल माह से ही स्टूडेंट्स को ऑनलाइन क्लासेज दे रहे हैं. वहीं लॉकडाउन में भी स्कूल टीचर्स को पूरा भुगतान कर रही है. फीस चार्ज नहीं कर पाने से निजी स्कूलों को बड़ा नुकसान हो रहा है. ऐसे में राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगाई जाये. कोर्ट ने आदेश पर रोक लगाने से तो इनकार कर दिया, लेकिन स्कूलों को यह छूट दे दी कि वह अपनी ट्यूशन फीस का 70 प्रतिशत अभिभावकों से चार्ज कर सकती है. अभिभावक तीन किस्तों में स्कूल को फीस की अदायगी करेंगे.

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आदेश के बावजूद मनमानी पर उतरे हुये हैं निजी स्कूल
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद जयपुर की कई निजी स्कूलों ने कुल फीस का 70 प्रतिशत चार्ज करना शुरू कर दिया है. स्कूल फीस जल्दी चुकाने को लेकर अभिभावकों को मैसेज और फोन कॉल्स कर रहे हैं. इसे लेकर अभिभावकों को स्कूल मैनेजमेंट की ओर से भी यह तर्क दिया जा रहा है कि हाईकोर्ट ने 70 प्रतिशत की वसूली के लिए कहा है तो वे ऐसा कर सकते हैं. लेकिन, अभिभावक हाईकोर्ट के आदेशानुसार ट्यूशन फीस का 70 प्रतिशत चार्ज देने की बात कर रहे हैं. ऐसे में आज होने वाली सुनवाई में संभवत इस कंफ्यूजन को भी हाई कोर्ट दूर सकता है. क्योंकि एकलपीठ के आदेश की दोनों पक्ष अपनी-अपनी तरह से व्याख्या कर रहे हैं.
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