Jaipur: खाद्य सुरक्षा योजना के राशन की होगी सोशल ऑडिट, 54 लाख से ज्यादा लोग हैं वंचित, यह है बड़ी वजह
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Jaipur: खाद्य सुरक्षा योजना के राशन की होगी सोशल ऑडिट, 54 लाख से ज्यादा लोग हैं वंचित, यह है बड़ी वजह
2011 के बाद खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल हुए लोगों को केंद्र से गेहूं नहीं मिलता है.

प्रदेश में चल रही खाद्य सुरक्षा योजना (Food security scheme) की कांग्रेस का राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन सोशल ऑडिट (Social audit) करवाएगा. संगठन के जिला स्तर के पदाधिकारी और कार्यकर्ता ग्रासरूट स्तर तक जाकर सोशल ऑडिट करेंगे.

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जयपुर. प्रदेश में चल रही खाद्य सुरक्षा योजना (Food security scheme) की कांग्रेस का राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन सोशल ऑडिट (Social audit) करवाएगा. संगठन के जिला स्तर के पदाधिकारी और कार्यकर्ता ग्रासरूट स्तर तक जाकर सोशल ऑडिट करेंगे. सोशल ऑडिट में खाद्य सुरक्षा योजना में लोगों को आ रही दिक्कत और योजना की खामियों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी. इस रिपोर्ट को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी और सरकार (Government) को सौंपा जाएगा. राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन कांग्रेस से ही जुड़ा संगठन है.

खाद्य सुरक्षा योजना में गड़बड़ियों की शिकायतें आम
राशन वितरण में कई बार शिकायतें आती है. कभी बड़े पैमाने पर राशन की कालाबाजारी की तो कभी पात्र लोगों को राशन नहीं मिलने की. वहीं पात्र होते हुए भी खाद्य सुरक्षा योजना के लिए नाम नहीं जोड़ने की शिकायतें आम तौर पर रहती है. खाद्य सुरक्षा में संसाधनवान और प्रभावशाली लोगों के नाम गलत तरीके से शामिल होना भी एक मुद्दा रहा है. सोशल ऑडिट के दौरान खाद्य सुरक्षा योजना की जमीनी धरातल पर क्रियान्वयन और जनता की शिकायतें सामने आएंगी.

सरकार और संगठन को दी जाएगी रिपोर्ट
राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अमित पुनिया ने कहा कि खाद्य सुरक्षा योजना में हो रही कमियों को दूर करने के प्रयास करेंगे. लोगों की समस्याओं को सरकार के संज्ञान में लाएंगे. योजना के क्रियान्वयन को लेकर ग्रासरूट स्तर के वास्तविक हालात सोशल ऑडिट के जरिए पता चल सकेंगे. उसके आधार पर सरकार कमियों को दूर करने के प्रयास करेगी. सभी जिला स्तर पर कांग्रेस राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन के पदाधिकारी सोशल ऑडिट करेंगे.



पात्र होते हुए भी 54 लाख से ज्यादा लोग अब भी खाद्य सुरक्षा से वंचित
खाद्य सुरक्षा योजना में पात्र लोगों का चयन मापदंडों के आधार पर होता है, लेकिन इसमें स्थानीय स्तर पर भारी गड़बड़ियां सामने आती रही है. स्थानीय राजनीति के कारण कई पात्र परिवारों के नाम शामिल नहीं हो पाते. केंद्र सरकार खाद्य सुरक्षा के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर पात्र लागों को ही गेहूं देती है. 2011 के बाद खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल हुए लोगों को केंद्र से गेहूं नहीं मिलता.

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