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पुलिस के जरिए प्रदर्शनकारियों को धमकाने का सामंती तरीका उचित नहीं : गहलोत

पुलिस के जरिए प्रदर्शनकारियों को धमकाने का सामंती तरीका उचित नहीं : गहलोत

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने धरना और प्रदर्शन को सर्वमान्य लोकतान्त्रिक तरीका बताते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा बैनरों पर 'लौट जाओ नहीं तो बल से बिखेर देगें’ लिखकर धमकाया जाना सरकार का दमनकारी और सामन्ती रवैया उचित नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने धरना और प्रदर्शन को सर्वमान्य लोकतान्त्रिक तरीका बताते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा बैनरों पर 'लौट जाओ नहीं तो बल से बिखेर देगें’ लिखकर धमकाया जाना सरकार का दमनकारी और सामन्ती रवैया उचित नहीं है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने धरना और प्रदर्शन को सर्वमान्य लोकतान्त्रिक तरीका बताते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा बैनरों पर 'लौट जाओ नहीं तो बल से बिखेर देगें’ लिखकर धमकाया जाना सरकार का दमनकारी और सामन्ती रवैया उचित नहीं है।

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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने धरना और प्रदर्शन को सर्वमान्य लोकतान्त्रिक तरीका बताते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा बैनरों पर 'लौट जाओ नहीं तो बल से बिखेर देगें’ लिखकर धमकाया जाना सरकार का दमनकारी और सामन्ती रवैया उचित नहीं है।
गौरतलब है कि आप पार्टी के कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करने विधानसभा पहुंचे थे, उस दौरान पुलिस ने 'लौट जाओ नहीं तो बल से बिखेर देगें' लिखे बैनर लहराकर वापस जाने की चेतावनी दी थी।

गहलोत ने इस मामले में शुक्रवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि विरोध प्रदर्शन करके पीड़ित वर्ग अपनी मांगो को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करते है, लेकिन पुलिस द्वारा धमकी दिलवाकर सरकार आखिर क्या संदेश देना चाहती है, क्योंकि अब से पूर्व आमजन की आवाज को दबाने की आड़ में लाठीचार्ज और फायरिंग तक हो चुकी है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार लोगों को डराने धमकाने या उनमें भय पैदा करने की बजाय उनकी समस्याओं को समझकर हल करने का प्रयास करें। यही लोकतंत्र का कायदा भी है। प्रदेशवासी इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
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