राजस्थान: वसुंधरा खेमे के पूर्व विधायकों का आरोप, ग्रामीण इलाकों में कोरोना की रोकथाम भगवान भरोसे

राजे खेमे के बीजेपी के पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत और प्रहलाद गुंजल का कहना है कि गहलोत सरकार ने गांव और गरीब को उनके हाल पर छोड़ दिया है.

कोटा संभाग के बीजेपी के दो पूर्व विधायकों भवानी सिंह राजावत और प्रहलाद गुंजल (Bhavani Singh Rajawat and Prahlad Gunjal) ने गहलोत सरकार पर कोरोना के इलाज को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा का आरोप लगाया है. ये दोनों पूर्व विधायक वसुंधरा राजे खेमे (Vasundhara camp) के हैं.

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कोटा. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खेमे (Former CM Vasundhara camp) के माने जाने वाले बीजेपी के पूर्व विधायक भवानी सिंह राजावत और प्रहलाद गुंजल (Bhavani Singh Rajawat and Prahlad Gunjal) ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह कोरोना को लेकर केवल शहरी क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है. ग्रामीण इलाकों पर उसका बिल्कुल भी ध्यान नहीं है. दोनों पूर्व विधायकों ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा कि प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कोरोना महामारी के हालात गंभीर हैं.

उन्होंने कहा कि गांवों में जागरूकता के अभाव में लोग खांसी, जुकाम और बुखार जैसे लक्षणों को साधारण समझकर न तो गंभीरता से ले रहे हैं और न ही संक्रमित मरीजों को आईसोलेट कर रहे हैं. इसके कारण ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमण तीव्र गति से फैलता जा रहा है. राज्य सरकार का ध्यान पूरी तरह शहरी क्षेत्र पर ही केन्द्रित है. अगर यही हालात रहे तो स्थिति भयावह हो जायेगी.

हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं
पूर्व विधायकों ने आरोप लगाया कि चिकित्सा विभाग गांवों में कोरोना के प्रति जागरुकता पैदा करने में पूर्णतया असफल रहा है. इसका परिणाम यह हुआ है कि अधिकांश देहाती आबादी आज कोरोना से पीड़ित है. ग्रामीण इलाकों में कोरोना संक्रमण दिन दूनी रात चौगुनी गति से फैलता जा रहा है और हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं.

पूर्व विधायकों ने बताये ये हालात
दोनों पूर्व विधायकों ने कहा कि गत कुछ दिनों में ही कोटा शहर के निकट स्थित मानस गांव में 6 , अमरकुआं में 10, धर्मपुरा में 2, डोल्या में 2, बंधा में 1, किशनपुरा तकिया में 1 और चडीन्दा में 1 व्यक्ति समेत सैंकड़ों ग्रामीण कोरोना से पीड़ित होकर काल के गाल में समा चुके हैं. यह स्थिति तो मात्र उन कुछ गांवों की हैं जो संभाग मुख्यालय कोटा से महज 30 किलामीटर के दायरे में स्थित हैं और मृतकों से वे व्यक्तिगत रूप से परिचित थे.

गहलोत सरकार ने गांव व गरीब को उनके हाल पर छोड़ दिया है
राजावत और गुंजल ने कहा कि दूरदराज के गांवों में स्थिति क्या होगी इसको कोई देखने वाला नहीं है. चिकित्सा विभाग सोया हुआ है और गहलोत सरकार ने गांव व गरीब को उनके हाल पर छोड़ दिया है. ग्रामीणों की जान बचाना तो दूर इस स्थिति के लिए जिम्मेदार और भ्रष्टाचार के लिए एसीबी की जांच के दायरे में आये मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पद से हटाना भी सरकार ने उचित नहीं समझा.