राजस्थान में फ्री कोरोना वैक्सीनेशन: 3 हजार करोड़ के प्रबंधन के लिये गहलोत सरकार उठा सकती है यह बड़ा कदम

राज्य सरकार ऋण के जरिए धनराशि का बंदोबस्त कर योजनाओं और विकास कार्यों को सुचारु रख सकती है.

राज्य सरकार ऋण के जरिए धनराशि का बंदोबस्त कर योजनाओं और विकास कार्यों को सुचारु रख सकती है.

Free Corona Vaccination in Rajasthan : प्रदेशवासियों को कोरोना महामारी से निजात दिलाने के लिये राज्य सरकार उनका फ्री में टीकाकरण करवायेगी. लेकिन इसके लिये आवश्यक करीब 3 हजार करोड़ रुपये की धनराशि जुटाना गहलोत सरकार के लिये बेहद चुनौतीपूर्ण है.

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जयपुर. गहलोत सरकार सभी को फ्री कोरोना वैक्सीनेशन (Free corona vaccination) के लिए करीब 3 हजार करोड़ का भार वहन करेगी. केन्द्र की ओर से पहल नहीं होने के बाद सीएम गहलोत इसका ऐलान भी कर चुके हैं. लेकिन प्रदेश की मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में इसके लिए वित्तीय प्रबंधन (Financial management) करना राज्य सरकार के समक्ष बड़ी चुनौती होगी. सीएम गहलोत खुद कह चुके हैं कि राज्य यदि अपने स्तर पर फ्री वैक्सीनेशन का फैसला लेते हैं तो उनका बजट डिस्टर्ब होगा.

अब वही स्थिति प्रदेश के समक्ष आकर खड़ी भी हो गई है. लोगों की जान बचाने को सर्वोपरि मानते हुए सीएम ने फ्री वैक्सीनेशन की घोषणा तो कर दी है लेकिन इसके लिए धनराशि जुटाना भी किसी जादूगरी से कम नहीं होगा. एक साल से ज्यादा समय से कोरोना की मार झेल रहे प्रदेश की आर्थिक स्थिति अभी ज्यादा अच्छी नहीं है. वहीं केन्द्र सरकार से जीएसटी समेत दूसरे मदों का राज्य का पैसा भी रुका हुआ है. ऐसे में 3 हजार करोड़ की लागत से फ्री वैक्सीनेशन की घोषणा करने का फैसला साहस भरा तो है ही चुनौती भरा भी है.

योजनाएं होंगी प्रभावित ?

आशंका जताई जा रही है कि कोरोना का कहर राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं को भी प्रभावित कर सकता है. तीन हजार करोड़ के इंतजाम के लिए राज्य सरकार फ्लैगशिप योजनाओं के बजट में कटौती कर सकती है. इससे आम लोगों को मिल रहा राज्य सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रभावित होगा. मुख्यमंत्री अन्न सुरक्षा योजना, शुभ लक्ष्मी योजना, निशुल्क दवा योजना, निशुल्क जांच योजना, दुग्ध उत्पादक संबल योजना, ग्रामीण बीपीएल आवास योजना और शहरी बीपीएल आवास योजना जैसी राज्य सरकार की करीब डेढ़ दर्जन फ्लैगशिप योजनाएं हैं जिन पर सरकार के इस फैसले का आगामी दिनों में असर पड़ सकता है. वहीं राज्य पर पड़ा यह अतिरिक्त आर्थिक भार प्रदेश में कुछ विकास कार्यों को भी प्रभावित कर सकता है.
या फिर निकलेगा कोई और रास्ता

प्रदेश को मुश्किलों से कैसे उबारना है यह जादूगर कहलाने वाले सीएम अशोक गहलोत अच्छी तरह जानते हैं. पैसों के इंतजाम के लिए राज्य सरकार द्वारा कोई दूसरा रास्ता भी निकाला जा सकता है. राज्य सरकार ऋण के जरिए धनराशि का बंदोबस्त कर योजनाओं और विकास कार्यों को सुचारु रख सकती है. किसान कर्जमाफी में राज्य सरकार इस तरह धन की व्यवस्था कर चुकी है और फ्री वैक्सीनेशन के लिए भी यह रास्ता निकाला जा सकता है. फिलहाल वक्त की जरुरत आम लोगों को कोरोना संकट से निकालकर उनका जीवन बचाना है. विकास कार्य जरुरी है लेकिन वर्तमान में जान है तो जहान है की नीति ही ज्यादा उपयुक्त है.
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