अपना शहर चुनें

States

Jaipur: स्वतन्त्रता सेनानी डॉ. ब्रजनाथ सिंह ने कुछ यूं मनाया 101 वां जन्मदिन

पहले विश्वयुद्ध के ठीक बाद जन्मे डॉ. ब्रजनाथ सिंह ने अपना 101वां जन्मदिन जयपुर के आमेर में मनाया.
पहले विश्वयुद्ध के ठीक बाद जन्मे डॉ. ब्रजनाथ सिंह ने अपना 101वां जन्मदिन जयपुर के आमेर में मनाया.

महामना पंडित मदन मोहन मालवीय (Pandit Madan Mohan Malaviya) के अनुयायी रहे स्वतंत्रता सेनानी डॉक्टर बृजनाथ सिंह (Dr. Brajnath Singh) ने अपना 101वां जन्मदिन कोरोना काल में इस बार कुछ अलग ही अंदाज में मनाया.

  • Share this:
जयपुर. कोरोना महामारी (COVID-19) के इस दौर में सब कुछ बदल गया है. जिंदगी जीने का अंदाज भी तो उत्सव मनाने का तरीका भी. महामना पंडित मदन मोहन मालवीय (Pandit Madan Mohan Malaviya) के अनुयायी रहे स्वतंत्रता सेनानी डॉक्टर बृजनाथ सिंह (Dr. Brajnath Singh) ने रविवार को अपना 101वां जन्मदिन कोरोना काल में इस बार कुछ अलग ही अंदाज में मनाया. दुनिया के अलग -अलग हिस्सों में बसे परिवार के सदस्य उनके इस 101 में जन्मदिन के जलसे में ऑनलाइन उपस्थित हुए. सभी ने मिलकर ऑनलाइन ही कहा " जियो हजारों साल.. साल के दिन हो लाख हजार...".

जयपुर के आमेर में मनाया जन्मदिन
7 जून 1919 को उत्तर प्रदेश में जन्मे डॉक्टर बृजनाथ सिंह के लिए यह जन्मदिन इसलिए भी खास था क्योंकि परिवार के सभी सदस्य दूर होते हुए भी इंटरनेट के जरिए स्क्रीन पर उनके साथ थे. पहले विश्वयुद्ध के ठीक बाद जन्मे डॉ. ब्रजनाथ सिंह ने अपना 101वां जन्मदिन जयपुर के आमेर में मनाया. पूरा परिवार देश दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से जूम मीटिंग के जरिए एक स्क्रीन पर बर्थ-डे सेलिब्रेशन में शरीक होता नजर आया. परिवार के सभी सदस्य यूं तो भारत, ब्रिटेन और अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों में रहते हैं लेकिन इस बार उन्होंने तकनीक के सहारे परिवार के इस सबसे खास और बुजुर्ग को एक सुर में कहा " हैप्पी बर्थडे टू यू".

सिंह यूनेस्को में विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं
इस खास मौके पर डॉक्टर बृजनाथ सिंह की बेटी सिविल सेवा की वरिष्ठ अधिकारी रही रश्मि डिकिंसन और दामाद लंदन में रॉयल कॉलेज ऑफ़ फिजिशियन के निदेशक एवं हैमरस्मिथ अस्पताल में सेवाओं के प्रमुख रहे एडवर्ड डिकिन्सन ने तो खास तैयारियां की ही पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र, नाती और दोहित्र भी इस खास मौके पर एक साथ शामिल हुए. इस बर्थ-डे पार्टी को हर किसी ने एक अलग अंदाज में एंजॉय किया. स्वतंत्रता सेनानी, इटावा पायलट प्रोजेक्ट के सदस्य और पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के संस्थापक सदस्य रहे डॉ. ब्रजनाथ सिंह यूनेस्को में विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.



1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए
एक रेल यात्रा के दौरान पंडित मदन मोहन मालवीय के संपर्क में आए डॉक्टर बृजनाथ सिंह की जिंदगी उस यात्रा ने ही बदली. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्कॉलरशिप हासिल कर चुके डॉक्टर बैजनाथ सिंह 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए और ब्रिटिश सत्ता द्वारा 2 साल के लिए जेल भी भेजे गए. 1945 में महात्मा गांधी के साथ में ग्राम स्वराज का सपना पूरा करने निकले तो डॉ. ब्रजनाथ सिंह का लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में रहने वाली भारत की 90 फ़ीसदी जनसंख्या को आत्मनिर्भर बनाना था.

कार्नेल यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप के लिए चुना गया
इसी सपने को पूरा करने के लिए स्वतंत्र भारत में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें इटावा पायलट प्रोजेक्ट की अहम जिम्मेदारी भी सौंपी. इसमें चंडीगढ़ के आर्किटेक्ट रहे अल्बर्ट मेयर को साथ रखा गया. इसके ठीक बाद डॉक्टर ब्रजनाथ सिंह को कार्नेल यूनिवर्सिटी में स्कॉलरशिप के लिए चुना गया. कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के बाद डॉक्टर सिंह भारत लौटे तो उन्हें योजना आयोग में काम करने का मौका भी मिला. इसी बीच नेहरू ने डॉक्टर सिंह को पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में बतौर प्रोफेसर काम करने और ग्राम स्वराज के सपने को पूरा करने की सलाह दी.

33 पुस्तकें लिख चुके हैं सिंह
अपने पूरे जीवन में हर वक्त अपने लक्ष्य और आगे की तरफ देखने के पक्षधर डॉक्टर सिंह अपने जीवनकाल में कुल जमा 33 पुस्तकें लिखी. इनमें से एक है उनकी जेल यात्रा के दौरान लिखी अपनी कविताओं का कविता संग्रह 'बंदी युद्ध'. अपने 100 साल के जीवन में कई दौर देख चुके डॉक्टर सिंह के लिए 'वर्चुअल बर्थ-डे सेलिब्रेशन' एक अलग और अहम अहसास है, जिसे उन्होंने पूरे परिवार के साथ जी भर जिया.

छा गया निर्मल का निशाना ! मोबाइल के फ्रंट कैमरे से देखकर साधती है उल्टे निशाने

Jodhpur: नहीं रहे मुख्यमंत्री और मंत्रियों के गुरु प्रोफेसर लक्ष्मण सिंह राठौड़
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज