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CoronaFighter के मन की बात: हम इसे हराने के लिए दृढ़ हैं, भगवान दुनिया को आशीर्वाद दें!
Jaipur News in Hindi

News18 Rajasthan
Updated: March 29, 2020, 2:55 PM IST
CoronaFighter के मन की बात: हम इसे हराने के लिए दृढ़ हैं, भगवान दुनिया को आशीर्वाद दें!
एसीएस रोहित कुमार सिंह.

रोहित सिंह राजस्‍थान स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में ACS हैं और Coronavirus के संक्रमण से निपटने के लिए दिन-रात काम पर डटे हैं. उन्‍होंने Facebook पोस्‍ट के जरिये अपने मन की बात कही है.

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जयपुर. विश्वभर में फैली कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) की महामारी के बीच इससे मुकाबला करने के लिए पूरी शिद्दत के साथ दिन रात एक किए हुए राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के एसीएस रोहित कुमार सिंह भी कुछ ऐसी मनोस्थिति से गुजर रहे हैं. इन्हीं हालात के बीच रोहित ने शनिवार को अपनी फेसबुक वॉल पर दिल को छू लेने वाले विचार व्यक्त किए हैं. आप भी पढ़ें इस मसले पर उनके मन में उमड़ने वाले विचार उन्हीं की कलम से.

'गुलाबी शहर को जैसे किसी ने उदासी के रंग से रंग दिया हो'
रात के 1 बजे हैं. खौफनाक और मानसिक रूप से थकावट के बीच आप उस दिन को वापस देखते हैं, जो अभी समाप्त हुआ है. सुबह से बहुत से फोन किए और बहुत से फोन आए. फोन पर आए बहुत सारे संदेश पढ़े और बहुत से जवाब भी दिए. आपदा प्रबंधन से जुड़ी बहुत सारी बैठकों में हिस्सा लिया. इसमें वॉर रूम, वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग और सुनसान सड़कों से भी गुजरा. जहां खाली सड़कें थी और सबकुछ बंद था. गुलाबी शहर को जैसे किसी ने उदासी के रंग से रंग दिया हो.

हाईकमान से आदेश लिए और आगे यही निर्देश कई लोगों को दिए. मेरे साथी जो ऐसे हालात में कड़ी मेहनत कर रहे हैं डॉक्टर, पैरामेडिक्स जो दिन-रात अपने जीवन को खतरे में डाल रहे हैं. दवाओं, परीक्षण और सुरक्षात्मक उपकरणों की उपलब्धता का जायजा लिया. दोस्तों और परिवार के मिथकों को दूर किया. व्हाट्सएप पर साझा किए गए कुछ चुटकुलों पर मुस्कुराया. जबकि कुछ विक्रेताओं और कॉरपोरेट्स को इन कठिन समय में पैसा बनाने की कोशिश पर चिढ़ भी हुई.



जब अधिक लोग सकारात्मक परीक्षण करते हैं या जब कभी-कभार मृत्यु की सूचना मिलती है तो आप दुखी हो जाते हैं. जब आप सुनते हैं कि कुछ अन्य लोग हॉस्पिटल में तेजी से ठीक हो रहे हैं तो थोड़ी उम्मीद बंध जाती है. दिन के दौरान चर्चाएं, तर्क जारी रहते हैं. कुछ मित्रों से लाभदायक जानकारी साझा होती है, जबकि कुछ से बात नहीं बनती.



आप कुछ भोजन छोड़ देते हैं, विषम (गलत) समय पर खाते हैं. शक्कर की चाय और दूधिया कॉफी दिन का क्रम लगता है. गले में खुजली होने पर आप घबरा जाते हैं. व्यग्र हो जाते हैं जब जूनियर (बेटा) खुद सात समुंदर पार घर से काम कर रहा होता है. माता-पिता को ध्यान रखने की सलाह देता है, क्योंकि उसे लगता है कि हम ज्‍यादा बड़े और कमजोर हैं.

एक गंभीर कॉल लेते समय आप अपनी आंख के कोने से मुस्कुराते हुए देखने में मदद नहीं कर सकते. नीना (पत्नी) और मनु (बेटा) के बीच फेसटाइम पर एक प्यारा वार्तालाप, सूजी का हलवा पकाने के तरीके पर. यह उदास दिन में एक दुर्लभ आनन्द लाता है.

आपको पता ही नहीं चला कि आप तब तक सो चुके थे जब तक कि फ़ोन फिर से बज न जाए. शुक्र है कि कोई बुरी खबर नहीं है. बस एक दोस्ताना पत्रकार कुछ नए के बारे में पूछ रहा है. यह नहीं जानते कि यह कितने समय तक चलने वाला है. हम थक जाते हैं. चिड़चिड़े हो जाते हैं, लेकिन कोरोना वायरस को हराने और क्षति को सीमित करने के लिए दृढ़ होते हैं.

भगवान राजस्थान को आशीर्वाद दें !
भगवान भारत को आशीर्वाद दें !!
भगवान दुनिया को आशीर्वाद दें !!!

(चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के एसीएस रोहित कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से साभार)

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First published: March 29, 2020, 12:42 AM IST
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