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Nagaur gangrape Case: मानवाधिकार संगठन पहुंचे पीड़िता के गांव, न्याय के लिये की ये मांगें

संयुक्त फैक्ट फाइंडिंग टीम ने कहा कि पीड़िता को इलाज की जरुरत है.  (प्रतिकात्मक फोटो)
संयुक्त फैक्ट फाइंडिंग टीम ने कहा कि पीड़िता को इलाज की जरुरत है. (प्रतिकात्मक फोटो)

Nagaur gangrape Case: परबतसर इलाके में हुई यह घटना अब धीरे-धीरे तूल पकड़ने लगी है. इस मामले को लेकर मानवाधिकार संगठनों (Human rights organizations) के प्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि पीड़िता को न्याय दिलाया जाये.

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जयपुर. नागौर जिले के परबतसर इलाके में अनुसूचित जाति की महिला के साथ गैंगरेप और प्राईवेट पार्ट में बोतल डालने (Nagaur gangrape Case) का मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ने लग गया है. मामले को लेकर मानवाधिकार संगठनों (Human rights organizations) के प्रतिनिधि मंडल ने पीड़िता और उसके परिवार से मिलने के बाद जांच अधिकारी की न्याय की मांग की है.

अधिकार सन्दर्भ केन्द्र एवं दलित वूमैन फाइट की संयुक्त फैक्ट फाइंडिंग टीम बुधवार को पीड़िता गांव के पहुंची. पीड़िता ने टीम को बताया कि वारदात 19 जनवरी को हुई थी. वहां तीन आरोपियों ने उसके साथ गैंगरेप किया. बाद में उसके प्राईवेट पार्ट में कांच की बोतल डाल दी. इससे उसके बहुत ज्यादा रक्तस्राव हुआ और वह बेहोश हो गई. उसके बाद परिजनों ने उसे परबतसर में ही एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया. वहां उसका सामान्य इलाज करके दूसरे दिन ही घर भेज दिया गया.

टीम ने कहा पीड़िता को इलाज की जरुरत है
टीम ने बताया कि पीड़िता ने डर और लोकलाज के कारण घटना के बारे में परिजनों को नहीं बताया. लेकिन बाद में अत्यधिक पीड़ा के चलते उसने 23 जनवरी को घटना के बारे में परिजनों को बताया. उसके बाद 24 जनवरी परबतसर पुलिस में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया. अधिकार सन्दर्भ केन्द्र के राज्य समन्वयक एडवोकेट ताराचंद वर्मा, दलित वूमैन फाइट की राज्य समन्वयक सुमन देवठिया और सामाजिक कार्यकर्ता मांगीलाल शेखर ने बताया कि पीड़िता की शारीरिक स्थिति ठीक नहीं है. उसे इलाज की जरुरत है. टीम के लोग पीड़िता को स्थानीय कार्यकर्ताओं और प्रशासन की मदद से समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र परबतसर लेकर गए. वहां से उसे बेहतर इलाज के लिये अजमेर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया.
फैक्ट फाइंडिंग टीम ने पीड़िता और उसके परिवार से मिलने के बाद निम्न मांगे की हैं.


1- आरोपियों को अविलंब गिरफ्तार किया जाये.
2- पीड़िता को अनुसूचित जाति जनजाति कानून के तहत आर्थिक सहायता दी जाये.
3- पीड़िता की तबियत को देखते हुए उसे उचित इलाज के लिये जयपुर रेफर किया जाये.
4- पीड़ित परिवार को धमकी देने वाले अन्य आरोपी राजूराम व सोनाराम को अनुसूचित जाति- जनजाति कानून के तहत गिरफ्तार किया जाये.
5-पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा दी जाये.
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