Rajasthan Crisis : गहलोत कैंप को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से मिली अप्रत्यक्ष 'राहत', जानें वजह
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Rajasthan Crisis : गहलोत कैंप को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से मिली अप्रत्यक्ष 'राहत', जानें वजह
फैसला नहीं आने से राजस्थान विधानसभा सत्र के दौरान अगर फ्लोर टेस्ट होता है, तो बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए सभी छह विधायक कांग्रेस के पक्ष में बिना किसी रुकावट के वोट कर सकेंगे.

राजस्‍थान हाईकोर्ट (rajasthan High Court) में बहस पूरी नहीं होने से स्टे एप्लीकेशन पर कोई फैसला नहीं आ सका. हाईकोर्ट में शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रहेगी. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के चलते इसमें दखल देने से फिलहाल इनकार कर दिया है.

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  • Last Updated: August 13, 2020, 11:07 PM IST
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जयपुर. बसपा विधायकों (BSP MLAs) के कांग्रेस (Congress) में विलय के मामले में आज देश और प्रदेश की सबसे बड़ी अदालतों से गहलोत सरकार (Gehlot Government) को अप्रत्यक्ष रूप से राहत मिली है. राजस्‍थान हाईकोर्ट (rajasthan High Court) में बहस पूरी नहीं होने से स्टे एप्लीकेशन पर कोई फैसला नहीं आ सका. हाईकोर्ट में शुक्रवार को भी मामले की सुनवाई जारी रहेगी. वहीं सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के चलते इसमें दखल देने से फिलहाल इनकार कर दिया है. अब सुप्रीम कोर्ट पूरे मामले में सोमवार को सुनवाई करेगा. ऐसे में कल से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान अगर फ्लोर टेस्ट होता है, तो बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए सभी छह विधायक कांग्रेस के पक्ष में बिना किसी रुकावट के वोट कर सकेंगे. वहीं विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की संख्या 107 ही रहेगी.

बसपा से शामिल विधायकों को नहीं दी कांग्रेस की सदस्यता

हाईकोर्ट में जारी मामले की सुनवाई में आज स्पीकर की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए सभी 6 विधायक विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल का हिस्सा हैं. लेकिन इन्हें अभी तक राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की सदस्यता नहीं दी गई है. ये केवल विधानसभा में बैठने की व्यवस्था है. विलय प्रशासनिक स्तर पर हुआ है. इसमें स्पीकर ने ज्यूडिशियल प्राधिकरण के तहत काम नहीं किया है. उन्होंने कहा कि शेड्यूल 10 के तहत स्पीकर तभी कोई निर्णय ले सकते हैं, जब उनके सामने अयोग्यता की कोई अर्जी आए. लेकिन इस मामले में बसपा ने स्पीकर के सामने कोई अर्जी नहीं लगाई. वहीं मदन दिलावर की याचिका को भी स्पीकर ने तकनीकी आधार पर खारिज किया है. ऐसे में बिना किसी अंतरिम आदेश के अदालत आर्टिकल 226 के तहत मामले का ज्यूडिशियल रिव्यू नहीं कर सकती है.



कल विश्वासमत नहीं तो अर्जेंसी भी नहीं
वहीं आज सुप्रीम कोर्ट में हुई मदन दिवालर की एसएलपी पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा की तीन सदस्यीय बेंच ने स्पीकर के वकील कपिल सिब्बल से पूछा कि क्या कल राजस्थान विधानसभा में कोई विश्वासमत पेश हो रहा है. स्पीकर से पूछकर कोर्ट को अवगत करवाएं. अगर कल के एजेंडे में विश्वासमत नहीं है तो आज आदेश जारी करने की जरूरत नहीं है. इस कपिल सिब्बल ने कोर्ट को अवगत करवाया कि स्पीकर कार्यालय से पता चला है कि अभी सदन का एजेंडा तय नहीं हुआ है. कल सुबह 10 बजे बिजनस एडवाइजरी कमेटी में एजेंडा तय होगा. सभी विपक्षी दलों के प्रतिनिधि इसमें हिस्सा लेंगे. इससे पहले सुनवाई शुरू होने के साथ ही मदन दिलावर के अधिवक्ता सतपाल जैन ने कहा कि पिछले साल दिया गया स्पीकर का विलय का आदेश हास्यास्पद है. सुप्रीम कोर्ट इसमें अंतरिम आदेश देते हुए रोक लगाए. वहीं बसपा की ओर से कहा गया कि हाई कोर्ट जानबूझकर मामले को लंबा खींच रहा है. लेकिन कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार करते हुए सोमवार तक सुनवाई टाल दी.

जानबूझकर हो रहे हो क्या आउट ऑफ फ्रेम

आज हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान विधायक लाखन सिंह की ओर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन बार-बार कैमरे से आउट ऑफ फ्रेम हो रहे थे. इस पर जस्टिस महेन्द्र गोयल ने चुटकी लेते हुए कहा कि धवन साहब आप जानबूझकर आउट ऑफ फ्रेम हो रहे हो क्या. दरअसल मंगलवार को इसी मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता धवन का हुक्का पीने का वीडियो वायरल हो गया था. जिसमें धवन सुनवाई के दौरान अपने चेहरे के आगे पेपर लगाकर हुक्के के कश लगाते हुए दिखाई दे रहे थे. इस पर आज सुनवाई के दौरान जब वे कई बार कानूनी किताब लेने के लिए कैमरे से ऑउट ऑफ फ्रेम हुए तो कोर्ट ने चुटकी ले ली.
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