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गहलोत सरकार ने लगाई पाबंदी, पुलिसकर्मी अब परिवेदना लेकर सीधे कोर्ट नहीं जा सकेंगे
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Prem Meena | News18 Rajasthan
Updated: February 20, 2020, 7:42 PM IST
गहलोत सरकार ने लगाई पाबंदी, पुलिसकर्मी अब परिवेदना लेकर सीधे कोर्ट नहीं जा सकेंगे
गृह विभाग के परिपत्र में कहा गया है कि राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियम-1971 के नियम-29 में सेवा संबंधी मामलों में किसी भी सक्षम न्यायालय की शरण में जाने के संबंध में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. सांकेतिक तस्वीर

राज्य के गृह विभाग (Home department) ने एक परिपत्र जारी कर पुलिसकर्मियों (Policemen) पर अपनी समस्या के समाधान के लिए सीधे कोर्ट (Court) का दरवाजा खटखटाने पर पाबंदी (Restriction) लगा दी है. पुलिसकर्मियों को अब कोर्ट जाने से पहले अपनी समस्या के समाधान के लिए उचित शासकीय मार्ग (नियमों) का अनुसरण करना होगा.

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जयपुर. राज्य के गृह विभाग (Home department) ने एक परिपत्र जारी कर पुलिसकर्मियों (Policemen) पर अपनी समस्या के समाधान के लिए सीधे कोर्ट (Court) का दरवाजा खटखटाने पर पाबंदी (Restriction) लगा दी है. पुलिसकर्मियों को अब कोर्ट जाने से पहले अपनी समस्या के समाधान के लिए उचित शासकीय मार्ग (नियमों) का अनुसरण करना होगा. यदि किसी पुलिसकर्मी को कोई समस्या है तो वह पहले अधिकारी को उसे बताए ताकि समस्या का तथ्यात्मक परीक्षण कर उसका समाधान (Solution) किया जा सके. यदि पुलिसकर्मी कोर्ट जाने से पहले समुचित शासकीय मार्ग का अनुसरण नहीं किया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई (Action) की जाएगी.

इसलिए उठाया गया है यह कदम
दरअसल राज्य सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि राजस्थान पुलिस सेवा, राजस्थान पुलिस अधीनस्थ सेवा, राजस्थान विधि विज्ञान सेवा, राजस्थान विधि विज्ञान अधीनस्थ सेवा, राजस्थान कारागार सेवा, राजस्थान कारागार अधीनस्थ सेवा और राजस्थान गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा सेवा के कई कार्मिक अपने सेवा संबंधी मामलों में बिना किसी प्रकार शासकीय उपाय अपनाएं अपनी परिवेदना के लिए सीधे कोर्ट में प्रकरण प्रस्तुत कर रहे हैं.

सेवा संबंधी मामलों में प्रावधान स्पष्ट हैं



गृह विभाग के परिपत्र में कहा गया है कि राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियम-1971 के नियम-29 में सेवा संबंधी मामलों में किसी भी सक्षम न्यायालय की शरण में जाने के संबंध में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. नियम-29 के अनुसार सरकारी कर्मचारी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने नियोजन से या सेवा की शर्तों से उत्पन्न किसी व्यथा के समाधान के लिए पहले साधन शासकीय मार्ग का सहारा लें. इसके बाद वह किसी न्यायालय से निर्णय प्राप्त करने की कोशिश करें.

सेवा संबंधी नियमों की पालना बाध्यकारी है
उल्लेखनीय है कि सभी राज्य कर्मचारियों के लिए राजस्थान सिविल सेवा आचरण नियम-1971 के प्रावधानों की पालना किया जाना अपेक्षित ही नहीं अपितु बाध्यकारी है. इसमें स्पष्ट है कि किसी व्यथित कार्मिक द्वारा सेवा संबंधी प्रकरणों के बारे में अपनी समस्या या वेदना पहले अपने नियोक्ता अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जानी चाहिए. अधिकारी द्वारा समस्या का संतोषजनक निराकरण नहीं किया जा रहा तो संबंधित कार्मिक नियम अनुसार सक्षम अपीलीय अधिकारी को अपील करे. उसके बाद भी अगर उसकी समस्या का समाधान नहीं होता है तो वह समस्या के निस्तारण के लिए सक्षम न्यायालय में जाने के लिए स्वतंत्र होगा.

 

 

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First published: February 20, 2020, 7:37 PM IST
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