Political Crisis : सीएम गहलोत ने कहा, राज्यपाल ने हमें दिया है 6 पन्ने का लव-लेटर
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Political Crisis : सीएम गहलोत ने कहा, राज्यपाल ने हमें दिया है 6 पन्ने का लव-लेटर
राज्यपाल कलराज मिश्रा (बाएं) ने सीएम अशोक गहलोत (दाएं) के दोबारा भेजे गए प्रस्ताव को भी लौटा दिया.

अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भी पत्र लिखा है. उन्होंने पत्र में कहा है कि राजस्थान के राजनीतिक संकट में वो दखल दें और तय करें कि विधानसभा सत्र हमारी मांग के अनुसार आयोजित हो.

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने राजनीतिक संकट (Political Crisis) से उबरने की अपनी कोशिशें जारी रखते हुए शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से बात की. उन्होंने विधानसभा सत्र (Assembly session) को लेकर राज्यपाल कलराज मिश्र (Kalraj Mishra) के व्यवहार को लेकर भी बात की. उन्होंने इस बाबत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) को भी पत्र लिखा है. उन्होंने पत्र में कहा है कि राजस्थान के राजनीतिक संकट में वो दखल दें और तय करें कि विधानसभा सत्र हमारी मांग के अनुसार आयोजित हो. गौरतलब है कि राज्यपाल कलराज मिश्र ने राज्य सरकार के उस पहले प्रस्ताव को खारिज कर दिया था जिसमें विधानसभा सत्र बुलाने की बात कही गई थी. राज्य सरकार के दोबारा भेजे गए प्रस्ताव को भी राज्यपाल ने आज सुबह यह कहकर लौटा दिया कि कोरोना की वजह से विधानसभा सत्र को तीन हफ्ते बाद आयोजित किया जाए.

दूसरा प्रस्ताव भी राज्यपाल ने वापस किया
दूसरे प्रस्ताव के भी खारिज होने के बाद सीएम गहलोत ने मीडिया में प्रकाशित पीडी आचार्य के एक आर्टिकल को कोट करते हुए कहा कि सत्तर साल में पहली बार ऐसी स्थिति आई है कि राज्यपाल ने विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को खारिज किया हो. गहलोत ने संवाददाताओं से आज कहा कि राज्यपाल ने एक बार फिर हमें 6 पन्ने का प्रेम-पत्र भेजा है. गहलोत ने यह भी कहा कि चुनी हुई सरकार के विधानसभा सत्र आयोजित करने के फैसले के साथ राज्यपाल को होना चाहिए.

पहले प्रस्ताव के खारिज होने के छह कारण
ध्यान रहे कि राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्रा ने सीएम अशोक गहलोत के विधानसभा सत्र बुलाने की मांग को छह कारण बताते हुए अस्वीकृत कर दिया था, जिसमें एक वजह यह भी बताई गई थी कि प्रस्ताव में सत्र बुलाने की न तो वजह बताई गई है और न ही दिन. सीएम गहलोत ने विधानसभा सत्र बुलाने के लिए शनिवार को दूसरा प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा था, जिसमें उन्होंने सत्र बुलाने की वजह बताई थी कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण और राज्य की आर्थिक हालत पर चर्चा की जानी है. उन्होंने अपने इस दूसरे प्रस्ताव में सत्र बुलाने की तारीख 31 जुलाई डाली थी. इस दूसरे प्रस्ताव को राज्यपाल ने यह कहकर वापस किया कि कोरोना महामारी के मद्देनजर विधायकों को तीन हफ्ते पूर्व नोटिस देना चाहिए न कि इतने शार्ट नोटिस में. दूसरे प्रस्ताव को वापस करते हुए राज्यपाल ने सीएम से पूछा कि क्या आप विधायकों को 21 दिन पहले नोटिस दे सकते हैं? राज्यपाल ने मुख्यमंत्री से यह भी पूछा है कि क्या आप विश्वास मत लाना चाहते हैं? राज्यपाल ने इस सवाल को पूछे जाने की वजह बताते हुए कहा कि विश्वास मत लाने की बात प्रस्ताव में नहीं है लेकिन जनता के बीच सीएम लगातार विश्वास मत लाने की बात कर रहे हैं.



बसपा सुप्रीमो की व्हिप से गहलोत का संकट बढ़ा
सचिन पायलट और उनके सहयोगी विधायकों के बागी होने के बाद भी सीएम गहलोत पूर्ण बहुमत में होने का दावा करते रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि गहलोत अपने उन सहयोगियों को वापस लाना चाहते हैं, जिनको हरियाणा के गुरुग्राम में दूसरे गुट ने बाड़बंदी कर रखा है. सीएम का दावा है कि उनके पास पूर्ण बहुमत के जादुई आंकड़े से एक विधायक ज्यादा है, पर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने व्हिप जारी कर अपने छहो विधायकों को कांग्रेस के खिलाफ वोट करने का आदेश दिया है. इसके बाद सीएम का यह दावा कमजोर पड़ता नजर आ रहा है.
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