BJP विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने कर्ज माफी और रोजगार पर सरकार को घेरा

बीजेपी विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने सरकार को बेरोजगारी, किसान कर्जमाफी, चिकित्सा व्यवस्था, शिक्षा और परिवहन व्यवस्थाओं पर विधानसभा में जमकर घेरा.

Dinesh Sharma | ETV Rajasthan
Updated: February 15, 2018, 6:43 PM IST
BJP विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने कर्ज माफी और रोजगार पर सरकार को घेरा
बीजेपी विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने सरकार को बेरोजगारी, किसान कर्जमाफी, चिकित्सा व्यवस्था, शिक्षा और परिवहन व्यवस्थाओं पर विधानसभा में जमकर घेरा.
Dinesh Sharma | ETV Rajasthan
Updated: February 15, 2018, 6:43 PM IST
राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विरोधी माने जाने वाले बीजेपी विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने गुरुवार को विधानसभा में सरकार को कई मुद्दों पर घेरा. बजट पर बहस के दौरान तिवाड़ी ने सरकार को रोजगार, किसानों की कर्ज माफी पर आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा देश में रजिस्टर्ड बेरोजगार 4.5 करोड़ हो गए हैं, राजस्थान में 20 लाख रजिस्टर्ड बेरोजगार हैं. राजस्थान में केवल 43,936 को रोजगार मिला है. केवल ट्रेनिंग का मतलब रोजगार नहीं है, सरकारी अस्पतालों में केवल 1 लाख 3 हजार डॉक्टर, चिकित्सा व्यवस्था अधिकांश प्राइवेट हाथों में चली गई. 85 प्रतिशत उच्च शिक्षा प्राइवेट हाथों में चली गई है. परिवहन जैसे काम भी प्राइवेट हाथों में जा रहे हैं फिर लोक कल्याणकारी सरकार का क्या औचित्य है?

सीएम वसुंधरा पर निशाना

डेमोक्रेसी के दो सबसे बड़े दुश्मन हैं- प्लूटोक्रेसी और पार्वोक्रेसी. जब पैसे, धर्म, जाति के दम पर लोग राजनीति में आते हैं, तो लोकतंत्र खतरे में होता है. पार्वोक्रेसी का मतलब पार्टी का मुखिया ही सब टिकट बांटे.


किसान कर्ज माफ करने वाले नेताओं का इंतजार

कर्जामाफी पर किसानों को धोखा नहीं दिया जाना चाहिए. राजस्थान में किसानों पर करीब 80 हजार का करोड़ है जबकि केवल 8 हजार करोड़ की घोषणा की, और केवल 2 हजार करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है. उसमें भी सहकारी बैंक और लघु-सीमान्त जैसी शर्ते लगा दी. यदि किसान को राहत देनी है तो सभी का कर्जा माफ करो. बहस में बोलते हुए तिवाड़ी ने कहा, किसान ऐसे नेताओं का इंतजार कर रहे हैं, जो आएं और उन्हें कर्जमुक्त करें.

बड़ी बातें न करें, आर्थिक स्थित का चिंतन भी करें

कांग्रेस जब प्रदेश में सत्ता से बाहर हुई थी, तो रिजर्व बैंक में 13 हजार करोड़ खाते में छोड़कर गई थी, अभी केवल साढे 24 करोड़ का बैलेन्स है. हम केवल बड़ी बातें ना करें, आर्थिक स्थिति का चिन्तन भी करें. हम लगातार 5 साल कैपिटल डेफिसिट में रहे हैं. रेवेन्यू डेफिसिट को यदि कैपिटल बचत से पूरा करें तो यह अच्छी व्यवस्था नहीं मानी जाती.

योजनाओं के लिए पैसा कहां से आएगा?

मुख्यमंत्री से आग्रह कि वे बताएं हमारी नॉन टैक्स रेवेन्यू कम क्यों रही. हमारे ऊपर 3 लाख करोड़ से ज्यादा का कर्जा हो गया, उस हिसाब से हमारी सम्पत्तियां नहीं बढ़ी. और अब हमारी कर्ज की लिमिट हो गई है, अगले वित्त वर्ष में हम 25 हजार करोड़ से ज्यादा कर्ज नहीं ले सकते. ब्राह्मणी-बनास योजना सुन्दर भविष्य का खाका है, लेकिन इसकी वित्त व्यवस्था कैसे होगी? बजट में इसका जिक्र नहीं है.
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