मुहर्रम पर जयपुर में निकाले जाते हैं डेढ़ मण वजनी सोने-चांदी के ताजिये, यहां पढ़ें पूरी कहानी

Arbaz ahmed | News18 Rajasthan
Updated: September 9, 2019, 6:16 PM IST
मुहर्रम पर जयपुर में निकाले जाते हैं डेढ़ मण वजनी सोने-चांदी के ताजिये, यहां पढ़ें पूरी कहानी
गुलाबी नगरी जयपुर अकेली ऐसे जगह है जहां सोने चांदी के ताजिये निकाले जाते हैं. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

जयपुर (Jaipur) में ताजियेदार सालभर मेहनत करके ताजिये तैयार करते हैं ताकि मुहर्रम (Muharram) की 10 तारीख को इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजिये निकाल कर खिराजे अकीदत पेश की जा सके. गुलाबी नगरी जयपुर (Pink city jaipur) अकेली ऐसे जगह है जहां सोने चांदी के ताजिये (Gold and silver tazia) निकाले जाते हैं.

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जयपुर. हजरत इमाम हुसैन (Hazrat Imam Hussain) की शहादत की याद में अकीदत के फूल पेश करते हुए राजधानी जयपुर (Jaipur) में पिछले 250 साल से ताजिये (Tazia) निकले जा रहे हैं. जयपुर में ताजियेदार सालभर मेहनत करके ताजिये तैयार करते हैं ताकि मुहर्रम (Muharram) की 10 तारीख को इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजिये निकाल कर खिराजे अकीदत पेश की जा सके. गुलाबी नगरी जयपुर (Pink city jaipur) अकेली ऐसे जगह है जहां सोने चांदी के ताजिये (Gold and silver tazia) निकाले जाते हैं.

जयपुर को देशभर में सोने चांदी के ताजियों लिए भी जाना जाता है
जयपुर में मुहर्रम के मौके पर ताजियों को प्रदर्शन किया जाएगा. 250 साल से जयपुर में अलग ही अंदाज में मुहर्रम मनाया जाता रहा है. जयपुर को देशभर में सोने-चांदी के ताजियों लिए भी जाना जाता है. वो भी कोई हल्के-फुल्के नहीं बल्कि कई मण वज़न वाले सोने- चांदी के ताजिये यहां मौजूद हैं. इसकी शुरुआत जयपुर के महाराजा सवाई रामसिंह के वक्त हुई.

मुहर्रम पर 5 दिन बाहर निकाला जाता है

इतिहासकारों और जानकारों के अनुसार एक बार सवाई रामसिंह बेहद बीमार हुए तो उनके सलाहकार ने उन्हें ताजिये की मन्नत के बारे में बताया. तब उन्होंने मन्नत मांगी और मन्नत पूरी होने पर डेढ़ मण सोने-चांदी का ताजिया बनवाया. 175 साल से इस ताजिये को हर साल मुहर्रम पर 5 दिन बाहर निकाला जाता है. इसी ताजिये की तर्ज पर मोहल्ला महावतान, और माहल्ला जुलाहान ने भी सोने चांदी के ताजिये बनवाये हैं. उनका वजन जयपुर दरबार के ताजिये से कम है. इन सभी ताजियों का प्रदर्शन भी ताजियों के जुलूस के साथ किया जाता है. इनकी खास सुरक्षा की जाती है, लेकिन इन्हें सुपुर्द-ए-खाक़ नहीं किया जाता है.

करबला के मैदान तक ले जाया जाता है
गुलाबी नगरी जयपुर जहां अपने तहजीब और संस्कृति के लिए देशभर में जाना जाता है, वहीं यहां की गंगा-जमनी तहजीब भी लोगों के लिए एक मिसाल है. जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से यहां बनवाए गए सोने और चांदी के ताजिये आज भी मुहर्रम के मौके पर निकाले जाते हैं. इन्हें करबला के मैदान तक ले जा कर वापस इमामबाड़ों में रख दिया जाता है.
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First published: September 9, 2019, 6:10 PM IST
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