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Good News: डिजिटल प्लेटफार्म पर आया राजस्थानी भाषा का शब्दकोष, ऑनलाइन मिल सकेगी जानकारी

राजस्थानी भाषा के शब्दकोष, व्याकरण और साहित्य के इस डिजिटली सृजन से उम्मीद की सुनहरी किरण को महसूस किया जा सकता है.
राजस्थानी भाषा के शब्दकोष, व्याकरण और साहित्य के इस डिजिटली सृजन से उम्मीद की सुनहरी किरण को महसूस किया जा सकता है.

अपनी मान्यता के लिये संघर्षों के दौर से गुजर रही राजस्थानी भाषा (Rajasthani language) के लिये बड़ी खुशखबरी आई है. अब राजस्थानी भाषा का शब्दकोष डिजीटल प्लेटफॉर्म (Digital platform) पर आ गया है.

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जयपुर. राजस्थानी भाषा (Rajasthani language) के लिए एक सुकून भरी खबर आई है. राजस्थानी भाषा के शब्दकोष (Dictionary) को अब डिजीटल प्लेटफॉर्म (Digital platform) पर भी पढ़ा और समझा जा सकेगा. इतना ही नहीं विश्व की अन्य भाषाओं के साथ भी ये भाषा अपने ट्रान्सलेशन के साथ अंर्तसंबंध स्थापित करेगी. राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में बोली जाने वाली मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूढाड़ी और मालवी अपने अपने विशेष महत्व के लिए हजारों बरसों से जानी जाती रही है. पिछले एक हजार साल से इसके जीवंत होने के प्रमाण पृथ्वीराज रासो और वैळी कृष्ण रुकमणी जैसे साहित्य में हैं.

संस्कृति और भाषा किसी समाज का दर्पण होती है. लेकिन जब वह उदासीनता में चली जाती है तो जनमानस में अपनी पहचान खोने लगती है. कुछ समय पहले तक ऐसे ही हालत थे राजस्थानी भाषा के. राजस्थानी भाषा का मतलब मायड़ भाषा. लेकिन कुछ संस्थाओं के प्रयास और अथक मेहनत ने अब उसमें चेतना ला दी है. यूं तो राजस्थानी भाषा की मान्यता का विषय वर्षों से लंबित चल रहा है. प्रदेश की विधानसभा पूर्व में ही राजस्थानी भाषा की मान्यता को लेकर केन्द्र को अपना विधेयक सौंप चुकी है. इसकी मान्यता के लिए पहले भी समय समय पर अथक प्रयास होते रहे हैं. इतना ही नहीं अपने विभिन्न प्रारूपों में यह भाषा राजे-रजवाड़ों के समय से उनकी बोलचाल के साथ- साथ लेखा-जोखा का माध्यम भी रही है. लेकिन कई ऐसे कारण भी रहे जिनके चलते इस भाषा को मान्यता से दूर रहना पड़ा.

पहला चरण पूरा कर लिया गया है
मायड़ भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष कर रहे लोगों और इस भाषा को बोलने वाले के लिए अच्छी खबर ये है कि अब भाषा के शब्दकोष के दस से अधिक संस्करण डिजीटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं. अन्य को भी डिजिटल प्लेटफार्म पर लाने का प्रयास किया जा रहा है. 29 दिसबंर को पद्मश्री सीताराम लालस के जन्मदिन पर इसका पहला चरण पूरा कर लिया गया है. उनकी जयंती पर इसका लोकार्पण पूर्व सांसद गज सिंह जोधपुर और विभिन्न संस्थाओं के सानिध्य में पूरा किया गया. अब राजस्थानी भाषा के शब्दकोष, व्याकरण और अन्य साहित्यिक पहलुओं की ऑनलाइन जानकारी मिल सकेगी. इतना ही नहीं अब भाषा की मान्यता में भी इससे मदद मिल सकेगी.
भाषाओं के संरक्षण में काम करने वाली यूनेस्को की संस्था से भी संपर्क किया गया है


शब्दकोष डिजिटिलीकरण परियोजना समिति के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण सिंह राठौड़ और राजस्थानी भाषा मान्यता समिति के अध्यक्ष केसी मालू के अनुसार अब ऑनलाइन का युग है. लिहाजा देश विदेश में रहने वाले लोगों को और साहित्य प्रेमियों के लिए राजस्थानी भाषा डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध रहेगी. वहां से विभिन्न देशों की भाषाओं के साथ ट्रांन्सलेशन को लेकर भी काम किया जा रहा है. इसके लिए भाषाओं के संरक्षण में काम करने वाली यूनेस्को की एक संस्था से भी संपर्क किया गया है.

उम्मीद की सुनहरी किरण
बहरहाल उपेक्षा का दंश झेल रही राजस्थानी भाषा के लिए यह एक शुभ संकेत कहा जा सकता है. क्योंकि बदलते परिवेश में किसी भी भाषा को जिंदा रखने के लिए उसका डिजीटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद होना बेहद जरुरी है. राजस्थानी भाषा के शब्दकोष, व्याकरण और साहित्य के इस डिजिटली सृजन से उम्मीद की सुनहरी किरण को महसूस किया जा सकता है.
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