TECH NEWS: खतरे में एक अरब लोगों का डाटा!

गूगल की सर्विसेज के जरिए तकरीबन 100 करोड़ लोगों का डाटा अभी भी खतरे में है. हालांकि गूगल ने अपनी सर्विस गूगल प्लस पहले ही बंद कर दी है.

News18 Rajasthan
Updated: March 13, 2019, 8:08 PM IST
TECH NEWS: खतरे में एक अरब लोगों का डाटा!
गूगल की सर्विसेज के जरिए तकरीबन 100 करोड़ लोगों का डाटा अभी भी खतरे में है.
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Updated: March 13, 2019, 8:08 PM IST
गूगल की सर्विसेज के जरिए तकरीबन 100 करोड़ लोगों का डाटा अभी भी खतरे में है. हालांकि गूगल ने अपनी सर्विस 'गूगल प्लस' पहले ही बंद कर दी है. और अब जल्द ही एक और सर्विस को आनन-फानन में बंद करने जा रहा है. खास बात यह है कि इसे बंद करने की घोषणा गूगल ने गूगल प्लस के साथ ही की थी लेकिन यह यूजर्स को यह नहीं बताया था कि गूगल प्लस के अलावा भी अन्य एप्लीकेशन्स के जरिए भी डाटा लीक हुआ है. हालांकि गूगल ने अक्टूबर 2018 में बताया था कि गूगल प्लस में एक कथित बग के चलते तकरीबन 5 लाख लोगों का डाटा लीक हुआ था. गूगल के मुताबिक हालांकि उस वक्त इसे ठीक कर लिया गया था और यूजर्स के डाटा को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था. जबकि सच यह है कि अन्य एप्लीकेशन्स के जरिए भी करोड़ों लोगों का डाटा लीक की जद में है.

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दरअसल, ये कथित बग (Bug) यदि ठीक करने लायक होता तो इन सर्विसेज को बंद नहीं किया जाता लेकिन गूगल के सभी यूजर्स, यहां तक कि बिजनेस यूजर्स का डाटा भी खतरे में था. यह डाटा इन दो सर्विसेज के बंद नहीं होने तक लगातार खतरे में है जबकि गूगल लगातार इस बात से इनकार करता रहा है.

100 करोड़ से ज्यादा लोगों की जानकारी खतरे में

फिलहाल गूगल के पास दुनियाभर के 100 करोड़ लोगों से ज्यादा का डाटा मौजूद है. वहीं, गूगल की ही कुछ सर्विसेज के जरिए सभी यूजर्स की निजी संवेदनशील जानकारियां गूगल की वेबसाइट्स पर उपलब्ध है. इन जानकारियों में यूजर का नाम, ईमेल, गूगल आईडी नंबर, यूजर की रीसेंट एक्टिविटी, टाइम, जेंडर, स्किल्स, यूजर का जॉब या बिजनेस, रहने की जगह (रेजिडेंशियल एड्रेस) तक शामिल हैं. इंडिविजुअल सिक्योरिटी रिसर्चर राजशेखर राजहरिया के मुताबिक 100 करोड़ लोगों का डाटा खतरे में है.

गुरुग्राम में रिसर्च वर्क से जुड़े जयपुर के इंडिविजुअल सिक्योरिटी रिसर्चर राजशेखर राजहरिया के मुताबिक गूगल ने लीक को सिर्फ 5 लाख लोगों के डाटा तक ही सीमित बताया था और किसी नुकसान की बात से भी इनकार किया था. लेकिन अन्य एप्लीकेशन्स को बंद करना संदेह उत्पन्न करता है.


डाटा चोरी के क्या हैं खतरे
दुनियाभर में लोगों का डाटा सबसे ज्यादा मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन यह डाटा तब खतरनाक हो जाता है जब इसे लोगों की प्राइवेसी को तोड़ने में काम में लिया जाता है. बिना यूजर की परमिशन के चोरी किए गए डाटा से ही स्किमर्स व ऑनलाइन फ्रॉडस्टर्स लोगों के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी करने में कामयाब हो जाते हैं. यह खतरा तब और बढ़ जाता है जब यूजर की पर्सनल इन्फॉर्मेशन के साथ उसकी रीसेंट एक्टिविटी और डेट व टाइम भी लीक होता है.

आसान है डाटा की चोरी

गूगल से डाटा चोरी करना कोई बहुत बड़ी इंजिनियरिंग का खेल नहीं है. सोशल मीडिया की कुछ ट्रिक्स का इस्तेमाल कर आसानी से डाटा चुराया जा सकता है. दरअसल गूगल की वेबसाइट्स पर ये डाटा पब्लिकली अवेलेबल है.

फेसबुक के बाद सबसे बड़ी ‘चोरी’

सितंबर 2018 में फेसबुक के डाटा में सेंध की खबरें आईं थीं. वहीं अक्टूबर में ही गूगल प्लस से लीक हो रहे यूजर डाटा की बात गूगल ने भी मानी थी.

(रिपोर्ट- हितेंद्र शर्मा)

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