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Rajasthan: सरकारी महकमों को पसंद नहीं है पारदर्शिता ! 9 साल में महज 42 विभाग आए RTI पोर्टल पर

अभी तक महज 42 सरकारी विभाग और कार्यालय ही आरटीआई पोर्टल पर आये हैं.
अभी तक महज 42 सरकारी विभाग और कार्यालय ही आरटीआई पोर्टल पर आये हैं.

प्रदेश के सरकारी महकमे (Government departments) पारदर्शिता से बचने की कोशिश कर रहे हैं. यही कारण की 9 साल बीत जाने के बाद भी वे आरटीआई पोर्टल (RTI Portal) पर आने से कतरा रहे हैं.

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जयपुर. प्रदेश में सरकारी महकमे (Government departments) ऑनलाइन सूचना उपलब्ध करवाने में कतरा रहे हैं. वे पारदर्शिता (Transparency) पसंद नहीं करते. ये हम नहीं कह रहे बल्कि उनकी कार्यशैली ही यह सब कुछ जाहिर कर रही है. राज्य में करीब 9 साल पहले आरटीआई पोर्टल (RTI Portal) बनाया गया था. इस पर सभी विभागों और कार्यालयों की मौजूदगी होनी थी, लेकिन अभी तक महज 42 कार्यालय ही इस पोर्टल पर आ पाए हैं.

सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आम लोगों को सूचनाएं जानने का अधिकार दिया गया है. लेकिन करीब 15 साल का वक्त गुजर जाने के बावजूद भी सरकारी महकमें इसे दिल से नहीं अपना पा रहे हैं. आम लोग आरटीआई एक्ट के तहत ऑनलाइन रूप से आवेदन कर सकें और उन्हें सूचनाएं भी ऑनलाइन ही उपलब्ध हों सके इस मकसद से करीब 9 साल पहले आरटीआई पोर्टल की शुरुआत की गई थी.

अब तक महज 42 विभाग और कार्यालय ही इस पोर्टल पर आये हैं
सभी सरकारी विभागों और कार्यालयों को इस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन सूचनाएं उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करनी थी. लेकिन विभागों और कार्यालयों की इस पारदर्शिता वाली व्यवस्था में कम ही दिलचस्पी नजर आ रही है. इतना लंबा वक्त गुजर जाने के बावजूद अब तक महज 42 विभाग और कार्यालय ही इस पोर्टल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा पाए हैं.



33 में से केवल 11 जिले हैं पोर्टल पर
प्रदेश में सरकारी कार्यालयों की संख्या हजारों में है. लेकिन अब तक महज 42 सरकारी विभाग और कार्यालय ही आरटीआई पोर्टल पर आये हैं. प्रदेश के 33 जिलों में से अब तक केवल 11 जिलों के कलक्ट्रेट कार्यालय पोर्टल पर आए हैं. 7 संभागीय आयुक्त कार्यालयों में से केवल जयपुर का कार्यालय ही पोर्टल पर है. वहीं पानी, बिजली और पंचायतीराज जैसे महत्वपूर्ण विभाग पोर्टल से नदारद हैं. RPSC और RSSB जैसी संस्थाएं भी पोर्टल से गैरहाजिर हैं.

गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में इस पोर्टल की शुरुआत की थी
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में इस पोर्टल की शुरुआत की थी. उनकी मंशा यही थी कि जल्द से जल्द सभी कार्यालय इस पोर्टल आएं ताकि लोगों को सूचनाएं हासिल करने के लिए चक्कर ना लगाने पड़ें और कोताही बरतने वाले अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय हो. लेकिन बड़ी विडम्बना यह है कि अभी तक खुद मुख्यमंत्री का कार्यालय भी इस पोर्टल पर नहीं आ पाया है.

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आने के बाद बहानेबाजी नहीं चलेगी
आरटीआई एक्टिविस्ट्स का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आने के बाद सूचना देने में बहानेबाजी की कोई गुंजाइश नहीं रह जाती है. लिहाजा सरकारी विभाग इस पोर्टल पर आने में अब तक कतरा रहे हैं. जबकि दूसरी और हाल ही में राज्य सरकार ने जनसूचना पोर्टल भी लॉन्च किया है जिसमें सूचनाओं के प्रोएक्टिव डिसक्लोजर का प्रावधान है.

31 दिसम्बर तक आरटीआई पोर्टल पर आने की डेडलाइन है
राज्य सरकार द्वारा पिछले दिनों सूचना का अधिकार अधिनियम की 15वीं वर्षगांठ पर सभी विभागों को 31 दिसम्बर तक आवश्यक रूप से आरटीआई पोर्टल पर आने की डेडलाइन दी गई थी. लेकिन विभागों की जैसी दिलचस्पी और गति इस कार्य के पीछे नजर आ रही है उससे यह काम तय समय अवधि में पूरा होता नजर नहीं आ रहा है.
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