Political crisis : विधानसभा सत्र बुलाने के मुद्दे पर सरकार और राजभवन आमने-सामने
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Political crisis : विधानसभा सत्र बुलाने के मुद्दे पर सरकार और राजभवन आमने-सामने
राजपाल कलराज मिश्र (बाएं) ने अशोक गहलोत (दाएं) से विशेष सत्र बुलाने के बाबत कुछ सवाल पूछे.

राज्यपाल कलराज मिश्र ने अचानक विधानसभा सत्र बुलाने की मांग पर कई क्वेरीज की हैं. उन्होंने जानना चाहा है कि आखिर इतनी जल्दी क्या है कि अचानक से सत्र बुलाने की मांग की गई?

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 24, 2020, 10:21 PM IST
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जयपुर : राजस्थान में लगातार गहराते जा रहे सियासी संकट (Political crisis) के बीच अब सरकार और राजभवन (Government and Raj Bhavan) के बीच भी टकराव शुरू हो गया है. दरअसल, सीएम अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) ने कल राज्यपाल कलराज मिश्र (Governor Kalraj Mishra) से मिलकर विधानसभा सत्र (Assembly Session) बुलाने की मांग रखी थी. आज राज्यपाल ने उसपर कई क्वेरीज की हैं. उन्होंने जानना चाहा है कि आखिर इतनी जल्दी क्या है कि अचानक से सत्र बुलाने की मांग की गई? इन घटनाक्रमों के बीच गहलोत ने होटल फेयरमोंट के बाहर मीडिया के सामने राज्यपाल कलराज मिश्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा है कि हमने कल ही राज्यपाल से मिलकर विधानसभा सत्र बुलाने की मांग रखी थी. हमें उम्मीद थी राज्यपाल रात तक विधानसभा सत्र बुलाने की अनुमति देंगे. लेकिन हमें दुख है कि राज्यपाल ने कोई फैसला नहीं किया. ऊपर से दबाव के कारण वे सत्र बुलाने का निर्देश नहीं दे रहे हैं.

फिर भेजा जाएगा विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव

इस बीच, चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने बताया कि राज्यपाल की क्वेरीज का जवाब देने के बाद विधानसभा सत्र बुलाने का प्रस्ताव फिर से भिजवाया जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्यपाल के सामने 102 विधायकों की परेड करवाई है, बहुमत हमारे साथ है. हम बहुमत साबित करने के लिए विधानसभा सत्र बुलाना चाहते हैं. सदन के फ्लोर पर दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहते हैं.




162 बी में मिली हैं राज्यपाल को विवेकीय शक्तियां

सत्ता पक्ष की बयानबाजी पर विपक्ष ने कहा कि अभी जो सेशन बुलाने की मांग हो रही है वह स्पेशल सेशन कहलाएगा. बजट सत्र, मॉनसून सत्र और शीतकालीन सत्र के अलावा जो सत्र बुलाया जाता है वह विशेष सत्र की श्रेणी में आता है. अभी कोरोना काल चल रहा है इसलिए राज्यपाल इस विषय पर विधिक राय ले रहे हैं. लेकिन सत्ता पक्ष ने धीरज तोड़ दिया है और धैर्य नहीं रख पा रहे हैं. सत्ता पक्ष के मंत्री कह रहे हैं कि राज्यपाल काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की राय मानने के लिए बाध्य है. वे बार-बार संविधान के आर्टिकल 163 का उल्लेख कर रहे हैं. आर्टिकल 163 ए में यह बात कही गई है कि राज्यपाल महोदय काउंसिल ऑफ मिनिस्टर कि सलाह पर काम करेंगे. लेकिन आर्टिकल 163 बी में राज्यपाल को कुछ विवेकीय शक्तियां भी दी गई हैं. यह स्पेशल सेशन है. राज्यपाल ने यह तो कहा नहीं है कि वह सेशन नहीं बुलाएंगे. लीगल एग्जामिन कराना राज्यपाल की ड्यूटी है. राज्यपाल लीगल और टेक्निकल एग्जामिन करा रहे हैं. आर्टिकल 163 बी का अध्ययन मुख्यमंत्री और उनके सलाहकारों को करना चाहिए. लेकिन ऐसा करने की बजाय वे राज्यपाल पर बयान दे रहे हैं.
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