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    Rajasthan: चने की तरह मूंगफली की भी कम होगी सरकारी खरीद ! किसानों को लगेगी 117 करोड़ की चपत

    अभी मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5575 रुपए प्रति क्विंटल है जबकि बाजार का प्रचलित मूल्य करीब 4400-4500 रुपए है. इस तरह किसान को प्रति क्विंटल मूंगफली पर करीब 800 रुपए का घाटा होगा.
    अभी मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5575 रुपए प्रति क्विंटल है जबकि बाजार का प्रचलित मूल्य करीब 4400-4500 रुपए है. इस तरह किसान को प्रति क्विंटल मूंगफली पर करीब 800 रुपए का घाटा होगा.

    किसान महापंचायत ने दावा किया है कि केन्द्र सरकार द्वारा मात्रा के गलत निर्धारण किये जाने के कारण किसानों से चने की तरह मूंगफली की भी एमएसपी (MSP) पर कम खरीद की जायेगी. इससे किसानों को बड़ा नुकसान (Big loss) होगा.

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    जयपुर. चने की ही तरह मूंगफली की न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) पर कम खरीद के चलते प्रदेश के किसानों को करीब 117 करोड़ रुपए की चपत लगेगी. किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट (Rampal Jat) का कहना है कि केन्द्र सरकार द्वारा मात्रा के गलत निर्धारण के चलते इस तरह की स्थिति बनेगी. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा कुल उत्पादन के 25 फीसदी की जगह 20.23 प्रतिशत के गलत निर्धारण के चलते करीब 7 लाख 72 हजार क्विंटल मूंगफली की खरीद कम होगी जिससे किसानों को बड़ा नुकसान (Big loss) होगा.

    इस कम खरीद के चलते केवल मूंगफली में ही करीब 62 करोड़ रुपए के किसानों को नुकसान होने का आकलन किसान महापंचायत द्वारा किया गया है. महापंचायत के अनुसार चना और मूंगफली दोनों को मिलाकर राजस्थान के किसानों को करीब 117 करोड़ रुपए की चपत लगनी तय है. प्रदेश में 18 नंवबर से मूंगफली की सरकारी खरीद शुरू होनी है. अभी मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5575 रुपए प्रति क्विंटल है जबकि बाजार का प्रचलित मूल्य करीब 4400-4500 रुपए है. इस तरह किसान को प्रति क्विंटल मूंगफली पर करीब 800 रुपए का घाटा होगा.

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    मध्य प्रदेश में ज्यादा खरीद !
    रामपाल जाट ने कहा कि चने की खरीद में भी प्रदेश के किसानों को इसी प्रकार नुकसान उठाना पड़ा था. उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान समेत दूसरे राज्यों में चने की 25 फीसदी से ज्यादा खरीद के प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया गया जबकि मध्यप्रदेश में उपचुनाव जीतने के लिए गोपनीय तरीके से 27 फीसदी से ज्यादा चना खरीदा गया. रामपाल जाट ने कहा कि केन्द्र सरकार खुद ही प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान की मार्गदर्शिका की पालना नहीं कर रही है. किसान महापंचायत ने केंद्र और राज्य के कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के साथ ही प्रधानमंत्री को भेदभाव रहित और पारदर्शी नीति अपनाने के लिए पत्र लिखा है. वहीं राजस्थान की जनता की प्रभावी पैरवी के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से आग्रह किया गया है.

    25 प्रतिशत खरीद का है प्रावधान
    प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के तहत अभी कुल उत्पादन का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा एमएसपी पर खरीदने का प्रावधान किया हुआ है. लेकिन हकीकत यह है इस 25 प्रतिशत हिस्से की भी पूरी खरीद नहीं हो पाती है. किसान नेता रामपाल जाट का कहना है कि त्रुटिपूर्ण आंकलन के चलते किसानों को इसका खामियाजा उठाना पड़ता है और सरकार अपनी भूल सुधारने की जगह उसकी पुनरावृत्ति कर रही है. उन्होंने कहा कि होना तो यह चाहिए कि तिलहन और दलहन की खरीद से 25 प्रतिशत खरीद की सीमा का प्रावधान हटे और पूरी उपज की एमएसपी पर खरीद हो. लेकिन यहां तो सरकार 25 प्रतिशत खरीद के प्रावधान को भी खत्म करने पर तुली है.
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