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टिड्डी टेरर: सरकारी प्रयासों पर भारी रहा 'जनसहयोग', किसानों की 'मेहनत' लाई रंग
Jaipur News in Hindi

Dinesh Sharma | News18 Rajasthan
Updated: February 10, 2020, 5:00 PM IST
टिड्डी टेरर: सरकारी प्रयासों पर भारी रहा 'जनसहयोग', किसानों की 'मेहनत' लाई रंग
बीकानेर जिले के IGNP इलाके में 23 हजार हैक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण के लिए जनसहयोग बेहद असरकारक साबित हुआ.

पश्चिमी राजस्थान में इस बार टिड्डियों (Locusts) ने जमकर कहर बरपाया. टिड्डी टेरर ने किसानों (Farmers) की कमर तोड़कर रख दी. नियंत्रण के लिए सीमित संसाधनों के चलते किसानों के साथ ही सरकार (Government) भी काफी हद तक टिड्डियों के सामने बेबस नजर आई.

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जयपुर. पश्चिमी राजस्थान में इस बार टिड्डियों (Locusts) ने जमकर कहर बरपाया. टिड्डी टेरर ने किसानों (Farmers) की कमर तोड़कर रख दी. नियंत्रण के लिए सीमित संसाधनों के चलते किसानों के साथ ही सरकार (Government) भी काफी हद तक टिड्डियों के सामने बेबस नजर आई. ऐसे हालात में 'जनसहयोग' (Public cooperation) टिड्डियों पर नियंत्रण का एक प्रभावी हथियार साबित हुआ है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 45 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में अब तक जनसहयोग से टिड्डियों पर काबू पाया गया है. इसके लिए जिन बड़े किसानों के पास ट्रेक्टर और स्प्रेयर उपलब्ध हैं उन्होंने इस काम में मदद की और अपने संसाधनों को टिड्डी नियंत्रण में लगाया.

सबसे ज्यादा बीकानेर में जनसहयोग प्रभावी रहा
टिड्डी प्रभावित कई क्षेत्रों में सरकारी टीमें पहुंची ही नहीं पाई. वहां जनसहयोग से इस पर नियंत्रण पाया गया. इसके लिए लोगों को कीटनाशक और प्रशिक्षण उपलब्ध करवाकर सहयोग लिया गया. गैर कृषि क्षेत्र में लोगों ने अपने संसाधनों से दवा का छिड़काव किया. सामूहिक प्रयासों के बूते करीब 45 हजार हैक्टेयर क्षेत्र से टिड्डियों को भगाया गया. इसमें बीकानेर जिले में IGNP क्षेत्र में 23 हजार हैक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण के लिए जनसहयोग बेहद असरकारक साबित हुआ. वहीं जालोर में 6500 और बाड़मेर में 5600 हैक्टेयर में जनसहयोग से काबू पाया गया. जैसलमेर, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर समेत दूसरे जिलों में भी जनसहयोग बड़ा सहारा बना.

सरकारी प्रयास नाकाफी

किसान नेता गुरुचरण सिंह मोड का कहना है कि टिड्डियों से निपटने में सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हुए. लोगों को अपने स्तर पर ही टिड्डियों को नियंत्रित करना पड़ रहा है. कई क्षेत्रों में टिड्डी नियंत्रण दल अभी पहुंच ही नहीं पाए हैं. लोग खुद ही अपनी फसल को बचाने के जतन कर रहे हैं.

ऊंट के मुंह में जीरा सरकारी सहायता
हालांकि कृषि विभाग से प्राप्त अनुदान से अब तक करीब 77 हजार हैक्टेयर में टिड्डियों पर काबू पाया जा चुका है. टिड्डियों से प्रभावित करीब 55 हजार किसानों को करीब 87 करोड़ राशि की आर्थिक सहायता भी एसडीआरएफ के तहत दी जा चुकी है. लेकिन किसान नेता अमराराम ने इस सहायता को ऊंट के मुंह में जीरा बताया है. उनका कहना है कि प्रदेश में टिड्डियों का प्रकोप अभी जारी है और खतरा टला नहीं है. 

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First published: February 10, 2020, 4:56 PM IST
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