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जयपुर ग्रेटर नगर निगम विवाद: जवाब पेश करने सरकार ने मांगा समय, कल हाईकोर्ट में सुनवाई

ग्रेटर नगर निगम मामले में कल कोर्ट में सुनवाई होगी.

Jaipur News: ग्रेटर नगर निगम विवाद मामले में कल हाईकोर्ट (High Court) में सुनवाई होगी. सरकार ने जवाब पेश करने समय मांगा था.

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जयपुर- नगर निगम ग्रेटर विवाद (Greater Nagar Nigam Dispute) मामलें में हाईकोर्ट में गुरुवार को राज्य सरकार ने जवाब देने के लिए समय मांग लिया. इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई कल तक टाल दी. दरसअल, आज जस्टिस पंकज भंडारी की खंडपीठ निलंबित मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता एमएस सिंघवी ने मामलें में जवाब देने के लिए समय मांगा. इस पर याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद और अधिवक्ता आशीष शर्मा ने कहा कि पूरे मामलें में सरकार की ओर याचिकाकर्ता को जवाब देने के लिए समय नहीं दिया गया. वहीं आज सरकार जवाब के लिए समय मांग रही है. जबकि मामलें में सरकार ने कैविएट दायर कर रखी थी. गुर्जर ने कोर्ट में स्वायत्त शासन विभाग के निलंबन आदेश को चुनौती दी है.



वैलिडिटी ऑफ एक्ट को चुनौती

डॉ. सौम्या गुर्जर की ओर से हाई कोर्ट में राजस्थान म्युन्सिपलिटी एक्ट के सेक्शन-39 को चुनौती दी गई है. उनकी ओर से आज कोर्ट में कहा गया कि इस एक्ट में एफआईआर दर्ज होने पर निलबंन का प्रावधान है. जबकि अगर मामलें में आगे चलकर कोर्ट याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप साबित नहीं मानती है तो इससे याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का हनन होता है. एक्ट का यह सेक्शन संविधान के आर्टिकल 14 और 19 का उल्लंघन करता है. इसके विरोध में महाधिवक्ता एमएस सिंघवी ने कहा कि इस एक्ट की वैधता अदालत के कई फैसलों में साबित हो चुकी है. ऐसे में मामलें को वैलिडिटी के बिंदु पर खारिज किया जाए.यह था पूरा मामला


दरअसल, 4 जून को शहर में डोर टू डोर कचरा संग्रहण करने वाली BVG कंपनी के भुगतान को लेकर मेयर ने आयुक्त को अपने चेम्बर में बात करने के लिए बुलाया. वहां पहले से सफाई समिति चैयरमेन सहित अन्य पार्षद मौजूद थे. आयुक्त का आरोप है कि मेयर की मौजूदगी में तीन पार्षदों ने उनके साथ बदसूलकी की. नौबत हाथापाई तक भी आना बताया जाता है. इसके बाद आयुक्त ने तीन पार्षदों के खिलाफ थाने में मामला दर्ज करवा दिया था. वहीं सरकार ने पूरे मामलें की जांच करवाकर डॉ. सौम्या गुर्जर सहित तीनों पार्षदों को निलंबित कर दिया था, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है.