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राजस्थान में 10 साल में 37 करोड़ पौधे लगाये, अरबों रुपये खर्च किये, फिर भी बिल्कुल नहीं बढ़ी हरियाली ?

राजस्थान में 10 साल में 37 करोड़ पौधे लगाये, अरबों रुपये खर्च किये, फिर भी बिल्कुल नहीं बढ़ी हरियाली ?

राजस्थान में बीते एक दशक में वन नीति पूरी तरह से फेल रही. प्रदेश की हरियाली में मामूली बढ़ोतरी भी नहीं हो पाई.

राजस्थान में बीते एक दशक में वन नीति पूरी तरह से फेल रही. प्रदेश की हरियाली में मामूली बढ़ोतरी भी नहीं हो पाई.

Rajasthan Forest Policy Fail : राजस्थान में अगर वनों का प्रतिशत देखा जाए तो 7.11 से बढ़कर 7.23 हुआ है. वन विभाग के प्रमुख के मुताबिक राजस्थान में ट्रॉपिकल ड्राय फॉरेस्ट के लिहाज से दुनिया में सबसे अच्छा सवाईवल है.

जयपुर. साल 2010 में राजस्थान के वन विभाग (Forest department) ने एक वन नीति बनाई और लक्ष्य तय किया गया कि 2020 तक प्रदेश में 20 फीसदी हरियाली ला दी जाएगी. साल 2010 के बाद 2021 आ गया, लेकिन हरियाली का प्रतिशत वहीं का वहीं है. दस साल में अरबों रुपये खर्च कर दिए गए और करीब 40 करोड़ पौधे लगाये गए फिर ऐसा क्या हुआ इतना कुछ होने बाद भी राजस्थान में हरियाली (Greenery) सपना पूरा नहीं हुआ. दस साल पहले प्रतियोगी परीक्षाओं में एक सवाल पूछा जाता था कि राजस्थान में हरियाली कितने प्रतिशत है? तो जवाब होता था कि 7.11 प्रतिशत. पूरा एक दशक बीत गया लेकिन आज तक प्रतियोगी परिक्षाओं में सवाल भी वही हैं और जवाब भी वही है.

इसकी वजह ये है कि पिछले दस साल में वन विभाग ने 37 करोड़ 38 लाख के करीब पौधे अलग-अलग योजनाओं में प्रदेशभर में लगा तो दिए, लेकिन जमीन पर कुछ बदला ही नहीं है. रेतीले राजस्थान में इस दौरान ग्रीन कवर या वनाच्छादित क्षेत्र बढ़ा नहीं है. बल्कि कुल ट्री कवर तो पिछले दस साल के मुकाबले घट गया है.

राजस्थान में हरियाली 7.11 फीसदी से 20 करनी थी
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अब कुल फॉरेस्ट कवर 16630 वर्ग किलोमीटर है. कुल ग्रीन कवर या वृक्षावरण 8112 वर्ग किलोमीटर है. राजस्थान में फॉरेस्ट कवर 2010 में 16 हजार 036 वर्ग किलोमीटर था और ट्री कवर या वृक्षावरण 8274 वर्ग किलोमीटर था. वनावरण और वृक्षावरण 2010 में प्रदेश के कुल भूभाग का 24 हजार 310 वर्ग किमी यानी 7.11 फीसदी था.

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अरबों रुपए खर्च होने के बावजूद नतीजा शून्य
अब 2020-21 के ताजा हालात के मुताबिक दस साल की मेहनत का ये नतीजा है कि अब राजस्थान में वनावरण और वृक्षावरण 24 हजार 742 वर्ग किमी है, यानी वही 7.23 फीसदी है. जबकि वन नीति 2010 में ये साफ-साफ लिखा गया था कि एक दशक में प्रदेश में हरियाली को सात फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी तक ले जाना है. लेकिन अरबों रुपये खर्च करने के बाद और 37 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाने के बाद हरियाली क्यों नहीं बढ़ी ? ये एक बड़ा सवाल है.

विशेषज्ञ बोले कि कागजी पौधरोपण हुआ
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दस साल में ये 37 करोड़ पौधे लगाये जाते तो जमीन पर पैर रखने की भी जगह नहीं होती. अब सवाल ये है कि लगाये पौधों में से सभी पौधे पनप ही नहीं पाये या फिर पिछले दशक से कागजी पौधारोपण किया जा रहा है.

प्रदेश में किस साल में कितना पौधारोपण
2010 में 4 करोड़ 56 लाख 46 हजार 300 पौधे
2011 में 3 करोड़ 43 लाख 61 हजार 400 पौधे
2012 में 2 करोड़ 36 लाख 92 हजार 200 पौधे
2013 में 4 करोड़ 64 लाख 02 हजार 640 पौधे
2014 में 4 करोड़ 51 लाख 96 हजार 200 पौधे
2015 में 4 करोड़ 51 लाख 14 हजार 200 पौधे
2016 में 4 करोड़ 43 लाख 57 हजार 000 पौधे
2017 में 3 करोड़ 00 लाख 65 हजार 000 पौधे
2018 में 2 करोड़ 03 लाख 55 हजार 600 पौधे
2019 में 1 करोड़ 79 लाख 64 हजार 900 पौधे
2020 में 1 करोड़ 96 लाख 44 हजार 600 पौधे
दस साल में कुल प्लांटेशन 37,27,98,040

वन नीति 2010 आखिर क्यों कारगर नहीं हुई?
दस साल के लिए वन विभाग ने आसान सा लक्ष्य लिया. हर साल करोड़ों पौधे लगाये. अरबों रुपये खर्च किये गए, लेकिन राजस्थान में 2020 तक हरियाली का प्रतिशत 7 से बढ़ाकर 20 फीसद करने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका. राजस्थान के भौगोलिक हालात देखकर ही यहां महज़ 20 फीसदी भूभाग में हरियाली का लक्ष्य तय किया गया था. अन्य राज्यों में तो ये 30 से 40 प्रतिशत रखा गया.

राजस्थान में दूसरे प्रदेशों से ज्यादा चुनौतियां
वन विभाग के आला अधिकारी और नये मुखिया डॉक्टर डीएन पांडे का कहना है कि राजस्थान में जिस तरह की चुनौतियां हैं, उनके लिहाज़ ये देखा जाए तो पिछले दशक में सबसे बड़ी विभागीय उपलब्धि ये है कि पिछले एक दशक में प्रदेश में वनों के प्रतिशत में गिरावट नहीं आई है. बुनियादी सवाल यही है कि क्या प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थान में हरियाली का प्रतिशत पूछे जाने पर उसका जवाब 20 फीसदी के रूप में दिया जा सकता है, तो जवाब है नहीं.

Tags: Forest, Forest area, Forest department, Forest land, Rajasthan news in hindi, Tree

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