सड़कों के विकास में नही दी जाएगी पेड़ों की बलि, देशभर में लागू होंगे आदेश
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सड़कों के विकास में नही दी जाएगी पेड़ों की बलि, देशभर में लागू होंगे आदेश
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सड़कों के विकास के नाम पर अब लाखों हरे भरे पेड़ों की बलि नहीं चढ़ाई जाएगी.

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सड़कों के विकास के नाम पर अब लाखों हरे भरे पेड़ों की बलि नहीं चढ़ाई जाएगी.

पहले विकास के नाम पर जो पेड़ काटे जा चुके हैं, उनके बदले मार्गों पर लगने वाले पौधे 100 जीवित होना भी सुनिश्चित होगा. सड़क विकास के नाम पर पेड़ा की कटाई के मामले में कड़ा रुख अखतियार करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नेशनल हाईवे आथोरिटी को रोड बनाने के साथ ही हो पौधों का रोपण करने और उनकी सुरक्षा के लिए पौधों की सुरक्षा ट्री-गार्ड या फेन्सिंग से पुख्ता करने के निर्देश दिए हैं.

एनजीटी भोपाल में जस्टिस दलिप सिंह और बिक्रम सिंह साजवान की बैंच ने भीलवाड़ा निवासी पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू की जनहित याचिका पर कड़ा रुख अख्तियार किया है.



नये आदेशों के मुताबिक अब नेशनल हाईवे आथोरिटी को राजस्थान में हाईवे चोड़े करने के नाम पर काटे गये लाखों पेड़ों के बदले नियमानुसार दुगुने व तिगुने संख्या में पौधे लगाने ही होंगे. हाईवे के निर्माण के साथ ही पौधे लगाने होंगे और इन पौधे की लम्बाई 5 फीट से कम नहीं होनी चाहिए. वन विभाग व एनएचएआई को पौधें लगाकर पेड़ बनने तक रखरखाव की व्यवस्था भी करनी होगी जिसके लिए उन्हें ट्री-गार्ड या फेन्सिंग कर 100 प्रतिशत सुरक्षा करनी होगी.
ट्रिब्यूनल ने हाइवे पर काटे गये विशालकाय पेड़ों की जगह वहां पर वहां की जलवायु के अनुकुल पौधों की प्रजाति लगाने के निर्देश दिए हैं. एनएचएआई को निर्देश दिए हैं कि वे पौधे लगाने के लिए वन विभाग की नर्सरियों  से पौधे खरीदें और पौधे को लगाने में और उन्हें संभालने में हुए खर्च को भी हाईवे बनाने के प्रोजेक्ट में ही शामिल करने का आदेश दिया है.

हाईवे के लिए मार्गों को चोड़ा करने के समय बीच में आ रहे  पुराने पेड़ों को काटने के बजाये आधुनिक तकनीक से दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए कहा है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इन सभी निर्देशों की पालना रिपोर्ट 16 नवम्बर को पेश करने के निर्देश राज्य सरकार व राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को दिये हैं.

प्रदेश में राजमार्ग विस्तार के नाम पर काटे गए पेड़ों के मामले अब तक केवल खानापूर्ति ही की जा रही है. ऐसे में सड़कों पर बढ़ते प्रदूषण और घटते सौंदर्य पर नकेल कसने के लिए एनजीटी ने अब जो निर्देश दिए हैं अगर इन निर्देशों की सही पालना होती है तो प्रदेश में हरियाली के मामले में हालात बहुत कुछ बदल सकते हैं.
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