Rajasthan: नगर निगम चुनाव में कांग्रेस का गुर्जर कार्ड और सचिन पायलट फैक्टर, जानें क्या है पूरी रणनीति

कांग्रेस के नेता चाहे जो तर्क दें लेकिन जयपुर में कांग्रेस के गुर्जर कार्ड के पीछे सचिन पायलट फैक्टर को नकारा नहीं जा सकता.
कांग्रेस के नेता चाहे जो तर्क दें लेकिन जयपुर में कांग्रेस के गुर्जर कार्ड के पीछे सचिन पायलट फैक्टर को नकारा नहीं जा सकता.

Gujjar card of Congress: नगर निगम चुनाव के बहाने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में कुछ नया पक रहा है. इन चुनावों में कांग्रेस ने जयपुर में दोनों नगर निगमों में मेयर पद के लिये गुर्जर उम्मीदवार मैदान में उतारकर नई राजनीति बहस छेड़ दी है.

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जयपुर. कांग्रेस के लिए नगर निगम चुनाव (Municipal Corporation Elections) गुर्जर आरक्षण आंदोलन और पिछले दिनों हुए सियासी घटनाक्रम में पीछे धकेले गये पूर्व पीसीसी चीफ सचिन पायलट (Sachin Pilot) मामले को बैलेंस करने की कवायद बन गया है. राजधानी जयपुर के दोनों ही नगर निगमों में गुर्जर उम्मीदवार उतारे जाने के कदम को कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति के समीकरण को साधने से जोड़कर देखा जा रहा है.

इस पूरी कवायद को गुर्जर आंदोलन के साथ साथ सचिन पायलट फैक्टर को बैलेंस करने से जोड़कर देखा जा रहा है, ताकि पायलट प्रकरण के बाद कांग्रेस के भीतर बदले समीकरणों को साधा जा सके. जयपुर हैरिटेज नगर निगम में मेयर प्रत्याशी बनाई गईं मुनेश गुर्जर कभी सचिन पायलट के कट्टर समर्थक रह चुके परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास खेमे से हैं. वहीं, ग्रेटर नगर निगम से मेयर पद की उम्मीदवार बनाई गईं दिव्या सिंह सीएम अशोक गहलोत के नजदीकी संजय सिंह गुर्जर की बेटी हैं.

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पायलट फैक्टर को नकारा नहीं जा सकता


राजनीतिक प्रेक्षक इस पूरी कवायद को गुर्जर समाज में सचिन पायलट के पैरेलल सेकेंड लाइन की लीडरशिप खड़ी करने से जोड़कर देख रहे हैं. कांग्रेस के नेता चाहे जो तर्क दें, लेकिन जयपुर में कांग्रेस के गुर्जर कार्ड के पीछे सचिन पायलट फैक्टर को नकारा नहीं जा सकता. हालांकि, पायलट समर्थकों का तर्क है कि इस कवायद से पायलट के मुकाबले लीडरशिप तैयार करने का ख्याल ही बेमानी है. इस मामले में सबके अपने-अपने तर्क हैं, लेकिन जयपुर नगर निगम में गुर्जर कार्ड सियासी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है.

अंदरखाने कुछ न कुछ नया पक रहा
अगर ऐसा नहीं होता तो कांग्रेस दोनों निगमों में गुर्जर समाज का प्रत्याशी नहीं उतारती. एक निगम में समाज के किसी दूसरे तबके के प्रत्याशी को मौका देकर वोट बैंक को साधती, लेकिन पार्टी ने ऐसा नहीं किया. राजधानी जयपुर की इस सियासत में कांग्रेस के गुर्जर कार्ड से यह साफ हो गया कि पार्टी में अंदरखाने कुछ न कुछ तो नया पक रहा है. यह बात दीगर है की इसका स्वाद पार्टी ले पायेगी या नहीं, लेकिन उसके प्रयास साफ जाहिर हो रहे हैं. कांग्रेस के इस गुर्जर कार्ड को प्रदेश में गहलोत सरकार के खिलाफ चल रहे गुर्जर आरक्षण आंदोलन पर ठंडे छींटे देने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है.
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