गुर्जर आरक्षण: बार-बार आरक्षण मिलने के बावजूद इस वजह से नहीं बन पा रही है बात

13 साल में पांचवीं बार आरक्षण लेने वाला गुर्जर समाज को अभी तक ट्रैक पर डटा हुआ है. आरक्षण के लिए गत करीब 13 साल में गुर्जर समाज बार-बार ट्रैक पर आता रहा है और बीजेपी और कांग्रेस उसे आरक्षण देती रही है, लेकिन मसला हर बार कोर्ट में अटक जाता है.

News18 Rajasthan
Updated: February 14, 2019, 2:26 PM IST
गुर्जर आरक्षण: बार-बार आरक्षण मिलने के बावजूद इस वजह से नहीं बन पा रही है बात
फाइल फोटो
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Updated: February 14, 2019, 2:26 PM IST
13 साल में पांचवीं बार आरक्षण लेने वाला गुर्जर समाज को अभी तक ट्रैक पर डटा हुआ है. आरक्षण के लिए गत करीब 13 साल में गुर्जर समाज बार-बार ट्रैक पर आता रहा है और बीजेपी और कांग्रेस उसे आरक्षण देती रही है, लेकिन मसला हर बार कोर्ट में अटक जाता है. अब फिर आरक्षण की मांग को लेकर सात दिन से ट्रैक पर बैठे गुर्जर समाज को आरक्षण दिया गया है.

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गुर्जर सहित 5 जातियों को 5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने वाला विधेयक बुधवार को विधानसभा में पारित करा दिया गया है. इस बिल को देर रात राज्यपाल कल्याण सिंह ने भी मंजूरी दे दी. इस विधेयक के साथ ही साथ ही राज्य विधानसभा ने विधेयक को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए एक शासकीय संकल्प भी ध्वनिमत से पारित किया है. इसके बाद अब गुर्जर ट्रैक से उठेंगे या नहीं इसका फैसला वो इस विधेयक का अध्ययन करने के बाद करेंगे.



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ये फंसा है पेंच
सुप्रीम कोर्ट ने 50 फ़ीसदी से ज्यादा आरक्षण देने पर रोक लगा रखी है. अभी गुर्जरों को प्रदेश में एमबीसी के तहत एक फीसदी आरक्षण मिला हुआ है. इसे मिलाकर प्रदेश में अभी आरक्षण 50 फीसदी तक पहुंच चुका है. गुर्जर समाज सहित पांच जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग में आरक्षण देने के लिए पूर्वीवर्ती वसुंधरा सरकार ने गजट नोटिफिकेशन निकाल दिया था. लेकिन इससे आरक्षण का आंकड़ा 50 फिसदी ऊपर चले जाने से चलते यह पूरा मामला कोर्ट में चला गया था. कोर्ट ने सरकार के इस गजट नोटिफिकेशन रोक लगा दी थी. इससे पहले भी मामला इस आधार पर कोर्ट में अटकता रहा है.

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गुर्जर नेताओं के ये हैं तर्क
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला एवं समाज के लोग इस बात को लेकर आक्रोशित हैं कि जब आर्थिक पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का बिल 10 दिन में लाया जा सकता है तो फिर हमारे के लिए क्यों नहीं ? गुर्जर नेताओं का कहना है कि लंबे समय से चल रही गुर्जर समाज की मांग को पूरा करने के लिए उसे संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल क्यों नहीं किया जा रहा ? गुर्जर नेताओं को कहना है कि सवर्ण समाज को आर्थिक पिछड़ा वर्ग में 10 फीसदी आरक्षण दे दिया है तो फिर उन्हें क्यों नहीं दिया जा सकता ? उनका यह भी तर्क है कि केंद्र सरकार ने सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देकर संविधान में संशोधन कर दिया है. इससे आरक्षण का कोटा 50 फीसदी से ज्यादा हो गया है. ऐसी स्थिति में अब सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अमान्य हो गया है.

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