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गुर्जर आरक्षण आंदोलन: कांग्रेस के लिए गले की फांस बन सकता है यह मसला

गुर्जर आरक्षण आंदोलन: कांग्रेस के लिए गले की फांस बन सकता है यह मसला

डॉ. किरोड़ी सिंह बैंसला। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

डॉ. किरोड़ी सिंह बैंसला। फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

15 लोकसभा सीटों पर गुर्जरों की उपस्थिति और 8 लोकसभा सीटों पर मजबूत पकड़ के साथ उनकी पांच फीसदी आरक्षण की मांग से कांग्रेस सरकार के सामने कई परेशानियां खड़ी हो सकती हैं.

    लोकसभा चुनावों से पहले गुर्जरों ने एक बार फिर आंदोलन की राह पकड़कर कांग्रेस सरकार के सामने संकट खड़ा कर दिया है. 15 लोकसभा सीटों पर गुर्जरों की उपस्थिति और 8 लोकसभा सीटों पर मजबूत पकड़ के साथ उनकी पांच फीसदी आरक्षण की मांग से कांग्रेस सरकार के सामने कई परेशानियां खड़ी हो सकती है. हालांकि गुर्जर आरक्षण आंदोलन का मामला कानूनी पचेदिगियों में फंसा हुआ है, लेकिन गुर्जर समाज को संतुष्ट कर उन्हें आंदोलन से रोकना कांग्रेस सरकार के लिए बड़ी चुनौती है.

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    विधानसभा चुनाव से पहले आरक्षण की मांग को लेकर बार-बार आंदोलन की चेतावनी देने वाले गुर्जर समाज को पिछली सरकार ने जैसे-तैसे आंदोलन से रोके रखा था. लेकिन इस बार गुर्जर आरक्षण समिति के आर-पार की लड़ाई के ऐलान के बाद अब सरकार के सामने परेशानी खड़ी हो गई है. आरक्षण आंदोलन की पदचाप को भांपते हुए सरकार के आला अधिकारी कानून व्यवस्था को लेकर बैठक भी कर चुके हैं. आरक्षण आंदोलन की इस फांस का सीधा असर आने वाले लोकसभा चुनावों पर पड़ेगा. क्योंकि गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति पूर्व की भांति इस बार भी आरक्षण नहीं दिए जाने पर लोकसभा चुनावों में सत्तारूढ़ पार्टी को सबक सिखाने की चेतावनी दे चुकी है. यह बात दीगर है कि समिति की यह फैसला समाज को कितना अपील कर पाएगा.

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    इन आठ लोकसभा क्षेत्रों में है गुर्जर समाज की मजबूत पकड़
    टोंक-सवाईमाधोपुर लोकसभा क्षेत्र में करीब 2 लाख 45 हजार, भीलवाड़ा में दो लाख बीस हजार, भरतपुर में दो लाख, करौली-धौलपुर में लाख 70 हजार, दौसा में 1 लाख 50 हजार, अजमेर-लोकसभा में 1 लाख 42 हजार, चित्तौडगढ़ में 1 लाख 43 हजार और कोटा लोकसभा क्षेत्र 1 लाख 36 हजार गुर्जर वोटर हैं. इन आठ सीटों पर गुर्जर वोटों की संख्या को देखते हुए कांग्रेस के लिए इस मामले में मध्यम मार्ग निकालना बेहद जरूरी हो गया है.

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    पार्टियों के अपने-अपने दावे
    प्रदेश की सत्ताधाऱी पार्टी कांग्रेस इस तरह के मामलों में बोलने से पहले भी बचती है. वहीं सत्ता से बाहर हुई पार्टी की यानि बीजेपी खुलकर बोल रही है. इस बारे में कांग्रेस उपाध्यक्ष अर्चना शर्मा का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया. वहीं बीजेपी के वरिष्ठ विधायक एवं उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने कहना है कि गुर्जर समाज करवट लेता नजर आ रहा है. इसका नुकसान कांग्रेस को उठाना पडेगा.

    किसी भी जाति का वोट बैंक किसी एक की मुठ्टी में नहीं हो सकता
    राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजनैतिक पार्टियों के इस मामले में अपने दावे और विचार हो सकते हैं, लेकिन किसी भी जाति का वोट बैंक किसी एक की मुठ्टी में नहीं हो सकता है. हां यह जरूर है कि किसी समूह या वर्ग की नाराजगी का प्रभाव जरूर पड़ सकता है.

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    Tags: Ashok gehlot, BJP, Congress, Jaipur news, Rahul gandhi, Rajasthan news, Sachin pilot

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