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लोकसभा चुनाव से पहले गर्माया गुर्जर आरक्षण का मुद्दा, गहलोत सरकार को दिया अल्टीमेटम

लोकसभा चुनाव से पहले गर्माया गुर्जर आरक्षण का मुद्दा, गहलोत सरकार को दिया अल्टीमेटम

प्रदेश में पच्चीस लोकसभा सीटों में से 15 सीटों पर गुर्जर प्रमुख जाति के रूप में मौजूद है और लगभग आठ सीटों पर गुर्जर समाज के वोटर सीधा असर डालते हैं. लिहाजा राजनीतिक दलों के सामने अपने आरक्षण को लेकर गुर्जर समाज ने फिर से अपनी मांग दोहराई है.

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    राजस्थान में लोकसभा चुनाव से पहले गुर्जर समाज एक बार फिर आरक्षण की मांग को लेकर मुखर हो गए हैं. गहलोत सरकार के सामने पांच फीसदी आरक्षण देने की गुर्जर समाज के लोगों ने की है, जिसके लिए गुर्जरों ने सरकार को अल्टीमेटम भी दिया है. असल में राजनीतिक दलों के सामने जब चुनाव होते हैं तो इस तरह के मामले मुखर हो जाते हैं, लेकिन क्या माना जाए की जातियां एक जुट होकर मतदान करती भी है या फिर नहीं.

    राजस्थान में गुर्जर आरक्षण का जिन्न एक बार फिर निकलने को आतुर हो रहे हैं. लोकसभा चुनाव से पहले गुर्जरों ने पांच फीसदी आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर सरकार को अल्टीमेटम भी दिया है. प्रदेश में पच्चीस लोकसभा सीटों में से 15 सीटों पर गुर्जर प्रमुख जाति के रूप में मौजूद है और लगभग आठ सीटों पर गुर्जर समाज के वोटर सीधा असर डालते हैं. लिहाजा राजनीतिक दलों के सामने अपने आरक्षण को लेकर गुर्जर समाज ने फिर से अपनी मांग दोहराई है. राजस्थान में एक तरफ कांग्रेस की सरकार है तो दूसरी तरफ केंद्र में भाजपा की सरकार है. ऐसे में दोनों प्रमुख पार्टियों के सामने चुनाव से पहले गुर्जर आरक्षण का ऐजेंडा खड़ा है.

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    राजस्थान में टोंक-सवाईमाधोपुर सीट पर लगभग 2 लाख 45 हजार की संख्या गुर्जर समाज के वोटरों की है. इसके अलावा भीलवाड़ा लोकसभा सीट पर लगभग 2 लाख 20 हजार गुर्जर, भरतपुर सीट पर  2 लाख गुर्जर समाज के वोटर, करौली-धौलपुर लोकसभा सीट पर 1 लाख 70 हजार से ज्यादा गुर्जर समाज के वोटर हैं. इसके अलावा दौसा में 1 लाख 50 हजार, अजमेर में 1 लाख 42 हजार, चित्तौड़गढ में एक लाख 43 हजार और कोटा लोकसभा सीट पर एक लाख 36 हजार वोटर गुर्जर समाज के हैं.

    गुर्जर आरक्षण को लेकर सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस की उपाध्यक्ष अर्चना शर्मा ने कहा कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने गुर्जरों को आरक्षण देने पर कभी कोई फैसला नहीं लिया, जबकि भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ का कहना है कि राजस्थान में गुर्जर समाज का ऊंट करवट लेता हुआ नज़र आ रह है, जिसका नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ेगा. हालांकि राजनैतिक विशलेषक ऐसा नहीं मानते कि किसी भी जाति का वोट बैंक किसी एक मुठ्टी में हो सकता है. विशलेषकों का कहना है कि किसी समुह या वर्ग की नाराजगी का असर चुनाव में जरूर पड़ सकता है. बहरहाल पिछले चुनाव को पूरे परिपेक्ष्य में देखा जाए तो यह निकल कर सामने आता है कि गुर्जर समाज चुनाव में उपस्थिति को दर्ज करवाता है, लेकिन क्या एक जगह होकर यह समाज वोट करता है.

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    Tags: Ashok gehlot, Jaipur news, Lok Sabha Election 2009, Rajasthan news, Reservation

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