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हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा- संभागीय आयुक्त ने किस अधिकार से किया Internet Ban?

हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार से पूछा- संभागीय आयुक्त ने किस अधिकार से किया Internet Ban?

rajasthan net band: राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान नेटबंदी के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है.

rajasthan net band: राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान नेटबंदी के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है.

Rajasthan internet shutdown: राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं (Rajasthan competition exam news) के दौरान नेटबंदी के मामले में  राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने गहलोत सरकार (Ashok Gehlot) से जवाब मांगा है. कोर्ट ने सरकार से पूछा कि संभागीय आयुक्त ने किस अधिकार से नेटबंदी के आदेश जारी किया, जबकि नियमों में यह अधिकार गृह सचिव के पास है.

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जयपुर- प्रतियोगी परीक्षाओं में आए दिन नेटबंदी (Rajasthan Internet Ban) के आदेश जारी करने के संभागीय आयुक्त के अधिकारों पर राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने सरकार से जवाब मांगा है. जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस फरजंद अली की खण्डपीठ ने शुक्रवार को नेटबंदी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार से पूछा कि संभागीय आयुक्त ने किस अधिकार से नेटबंदी के आदेश जारी कर रहे है, जबकि नियमों में यह अधिकार गृह सचिव के पास है. इस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता एमएस सिंघवी ने जवाब के लिए अदालत से समय मांगा. अब मामलें की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी. दरअसल अधिवक्ता नीरज यादव और अन्य ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर करके प्रतियोगी परीक्षाओं के मद्देनज़र नेट बंद करने के संभागीय आयुक्तों के आदेशों को चुनौती दी है.

याचिकाओं में कहा गया है कि टैम्परेरी सस्पेंशन ऑफ टेलीकॉम सर्विसेज पब्लिक इमेंरजेंसी ऑर पब्लिक सेफ्टी रूल्स 2017 के तहत केवल आपातकाल और लोक सुरक्षा के मद्देनजर ही नेटबंदी (internet ban in rajasthan) की जा सकती है. जबकि परीक्षाएं सालभर चलने वाले एक सतत प्रक्रिया है. जो दोनों प्रकार की श्रेणी में नहीं आती है. लेकिन फिर भी हर प्रतियोगी परीक्षा में नकल रोकने का हवाला देकर नेटबंदी कर रही है, जो आमजन के मौलिक अधिकारियों का उल्लंखन है.

सुप्रीम कोर्ट ने की थी अहम टिप्पणी

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता यर्थाथ गुप्ता ने कहा कि अनुराधा भसीन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के मामले में सु्प्रीम कोर्ट यह कह चुका है कि बेवजह नेट बंद नहीं किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश में मान चुका है कि इस तरह से नेटबंदी करना आर्टिकल 19(1)(a), (g) का उल्लंखन है. वहीं यह पूरी तरह से असंवैधानिक है.

हाईकोर्ट में कहा, नहीं करेंग इंटरनेट बंद, फिर भी नेटबंदी जारी

साल 2018 में 14 और 15 जुलाई को आयोजित हुई कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के दौरान दो दिन नेटबंदी की गई थी जिसे जोधपुर हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी गई कि संभागीय आयुक्त को नेट बंद करने का आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है. सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से हाईकोर्ट में शपथ पत्र पेश करके कहा गया कि भविष्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए नेटबंदी नहीं की जाएगी.

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शपथ पत्र में कोर्ट को बताया गया कि गृह सचिव ने 22 अक्टूबर 2018 को सभी संभागीय आयुक्त को इसे लेकर निर्देश जारी कर दिए है. सरकार के जवाब से संतुष्ट होकर अदालत ने 28 नवम्बर 2018 को याचिका को निस्तारित कर दिया. लेकिन उसके बाद भी हाल ही में आयोजित हुई रीट, पटवारी और आरएएस प्री परीक्षा के दौरान पूरे प्रदेश में नेट बंद किया गया.

Tags: Ashok gehlot, Exam news, Internet, Jaipur news, Rajasthan news

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