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Rajasthan:आज आयेगा निजी स्कूल फीस विवाद पर हाई कोर्ट का फैसला, यहां पढ़ें केस की विस्तृत डिटेल

मामले में करीब दो दर्जन से ज्यादा पक्षकार हैं. ऐसे में सभी को सुनने में भी कोर्ट को काफी समय लगा.
मामले में करीब दो दर्जन से ज्यादा पक्षकार हैं. ऐसे में सभी को सुनने में भी कोर्ट को काफी समय लगा.

Private school fee dispute: फीस विवाद पर हाई कोर्ट (High Court) आज अपना फैसला सुनायेगा. इस फैसले का प्रदेश के लाखों लोगों को इंतजार है. इस मामले में करीब 2 दर्जन पक्षकार हैं.

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जयपुर. निजी स्कूल फीस विवाद (Private school fee dispute) मामले में आज राजस्थान हाई कोर्ट (High Court) अपना फैसला सुनाएगा. सीजे इंद्रजीत माहन्ती (Indrajit mahanti) की खंडपीठ सुबह 10.30 बजे इस फैसले को प्रोनाउंस करेगी. कोर्ट की डीबी बैंच ने 16 दिसम्बर को मामले की सुनवाई के बाद फैसले को सुरक्षित रख लिया था।. फैसले के बाद उम्मीद है कि फीस को लेकर जो विवाद लम्बे समय से चला आ रहा था वो थम जाएगा.

मामले में करीब दो दर्जन से ज्यादा पक्षकार हैं. ऐसे में सभी को सुनने में भी कोर्ट को काफी समय लगा. हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने एक कमेटी का गठन किया था. उसने 28 अक्टूबर को अपनी सिफारिशें दी. कमेटी की ओर से कहा गया कि जो स्कूलें ऑनलाइन शिक्षा दे रही है वें ट्यूशन फीस का 70 प्रतिशत ले सकते हैं. वहीं स्कूलें खुलने के बाद जितना कोर्स सम्बंधित बोर्ड द्वारा तय किया जाए उतनी फीस स्कूल ले सकेगा. लेकिन निजी स्कूल और अभिभावकों ने इस सिफारिश को मनाने से इनकार कर दिया.

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सरकार की ओर से फाइनल बहस


सरकार की ओर से फाइनल बहस करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश महर्षि ने कहा कि अगर दोनों पक्ष सिफारिशों को नहीं मानते हैं तो अदालत फीस का पुनः निर्धारण कर दें. लेकिन इससे पहले किसी सीए अथवा ऑडिटर अभिभावक को स्कूल फीस कमेटी में शामिल करके कोरोना काल में हुए स्कूलों के खर्चे की ऑडिट करवाए. वहीं इसके आधार पर ही फीस तय की जाए.

निजी स्कूलों की फाइनल बहस
स्कूलों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कमलाकर शर्मा, अलंकृता शर्मा, दिनेश यादव, प्रतीक कासलीवाल और अन्य अधिवक्ताओं ने बहस करते हुए कहा कि सरकार को स्कूलों की फीस तय करने का कोई अधिकार नहीं है. देश के 8 हाई कोर्ट कोरोना काल में 100 प्रतिशत ट्यूशन फीस लेने का आदेश दे चुके हैं. एपेडेमिक व डिजास्टर एक्ट भी सरकार को फीस तय करने का अधिकार नहीं देते हैं.

अभिभावकों की ओर से फाइनल बहस
मामलें में मुख्य अपीलकर्ता अभिभावक अधिवक्ता सुनील समदड़िया ने कहा कि अभिभावकों की स्थिति को देखते हुए और स्कूलों का भी खर्चा निकल सके इसके आधार पर इस सेशन में ट्यूशन फीस का 30 प्रतिशत ही लेना चाहिए. वहीं संयुक्त अभिभावक संघ की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता अमित छंगाणी ने कहा कि ऑनलाइन क्लासेज के बदले 25 प्रतिशत ट्यूशन फीस ही वसूल की जा सकती है.

कुछ यूं चला मामला
दअरसल कोरोना काल मे राज्य सरकार ने 9 अप्रेल और 7 जुलाई के दो आदेशों से स्कूल फीस को स्थगित कर दिया था. इसके खिलाफ निजी स्कूल हाई कोर्ट चले गए. हाई कोर्ट की एकलपीठ ने 7 सितम्बर को निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस का 70 प्रतिशत लेने का आदेश दे दिया. लेकिन इस आदेश की सरकार और अधिवक्ता सुनील समदड़िया ने डिवीजन बेंच में अपील कर दी. डीबी बैंच ने 1 अक्टूबर को सिंगल बैंच के फैसले पर रोक लगा दी. उसके बाद कोर्ट के निर्देश से सरकार ने 28 अक्टूबर को अपनी सिफारिशें दी. उसे निजी स्कूलों और अभिभावकों ने मनाने से इनकार कर दिया.
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