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एक पाकिस्तानी लड़की का सपना पूरा करने के लिए सुषमा स्वराज ने ऐसे दिया था साथ

पाकिस्तानी हिंदू लड़की मशाल माहेश्वरी. (फाइल फोटो)

पाकिस्तानी हिंदू लड़की मशाल माहेश्वरी. (फाइल फोटो)

पाकिस्तानी हिंदू लड़की मशाल माहेश्वरी मेडिकल एग्जाम नहीं दे पा रही थी. सीएनएन न्यूज18 देख सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) ने मशाल के लिए मदद के हाथ बढ़ाए और उसे बड़ी राहत मिली.

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    जयपुर में रह रही एक पाकिस्तानी हिंदू लड़की मशाल माहेश्वरी को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj) की तरफ से तीन साल पहले मिली राहत उनका परिवार कभी नहीं भूला पाएगा. मशाल 12वीं साइंस के एग्जाम में 91 पर्सेंट मार्क्स हासिल कर चुकी थी और अब उसका बस एक ही सपना था, मेडिकल कॉलेज में दाखिला. लेकिन जब मेडिकल का फॉर्म भरना चाहा तो उसकी पाकिस्तानी नागरिकता आड़े आ रही थी. ऐसे में सुषमा ने अपने ट्विटर पर मशाल को भरोसा देते हुए लिखा था, 'मशाल, परेशान मत हो मेरी बच्ची, मैं मेडिकल कॉलेज में तुम्हारे एडमिशन के मामले को पर्सनली उठाऊंगी'. पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार रात को निधन हो गया है. भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज को गंभीर हालत में एम्स में भर्ती कराया गया था.

    Sushma Swaraj
    मशाल की मदद के लिए 30 मई 2016 को सुषमा स्वराज ने ये ट्वीट किया था.


    सीएनएन न्यूज18 देख सुषमा स्वराज ने मशाल के लिए मदद के हाथ बढ़ाए
    पाकिस्तानी हिंदू लड़की मशाल माहेश्वरी मेडिकल एग्जाम नहीं दे पा रही थी. सीएनएन न्‍यूज18 देख सुषमा स्वराज ने मशाल के लिए मदद के हाथ बढ़ाए और उसे बड़ी राहत मिली. सुषमा स्वराज ने मशाल से फोन पर बात की थी और इस बातचीत के बाद मंत्रालय के एक अधिकारी ने मशाल को फोन कर उनसे उनके दस्तावेज ई-मेल करने के लिए कहा और फिर सरकार दाखिले की प्रक्रिया पर विचार किया.

    Sushma Swara, pakistani girl
    मशाल माहेश्वरी. (फाइल फोटो)


    जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है मशाल

    सुषम स्वराज के दखल के बाद मशाल के एडमिशन के लिए पाकिस्तान विस्थापितों के लिए अलग से मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का आरक्षण का कोटा तय हुआ. इसी के अनुसार मशाल का एडमिशन जयपुर एसएमएस मेडिकल कॉलेज में करवाया गया. फिलहाल मशाल यहीं पर अध्ययनरत है.

    धार्मिक उत्पीड़न के चलते पाकिस्तान से जयपुर आया था परिवार
    मशाल के माता-पिता ने 2014 में धार्मिक उत्पीड़न के कारण पाकिस्तान के सिंध छोड़ जयपुर आए थे. 20 साल की मशाल के माता-पिता का सपना अपनी बेटी को डॉक्टर बनाने का था और देश में शरणार्थी के तौर पर एडमिशन नहीं हो रहा था, नागरिकता आड़े आ रही थी.

    ये भी पढ़ें- Sushma Swaraj Death: राजस्थान से किसने क्या कहा? यहां पढ़ें

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