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Rajasthan News: सरकारी विभागों की 6 हजार से ज्यादा शिकायतों की जांच पर लगा 'ग्रहण', जानिये वजह

सत्ता में आने के करीब ढाई साल बाद गहलोत सरकार ने 8 मार्च 2021 लोकायुक्त पद पर पीके लोहारा को नियुक्त किया था.

सत्ता में आने के करीब ढाई साल बाद गहलोत सरकार ने 8 मार्च 2021 लोकायुक्त पद पर पीके लोहारा को नियुक्त किया था.

Rajasthan News: राजस्थान के विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़ी 6 हजार शिकायतों की जांच पर 'ग्रहण' लग गया है. स्टाफ के अभाव और कोरोना काल के चलते लोकायुक्त कार्यालय में शिकायतों का पुलिंदा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है.

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जयपुर. राजस्थान में सरकारी महकमों के भ्रष्ट आचरण (Corrupt practices) और कार्यशैली के खिलाफ जांच के लिए बने लिए लोकायुक्त (Lokayukta) सचिवालय में उम्मीदों के पुलिंदा लगातार बढ़ता जा रहा है. लोकायुक्त कार्यालय में साढ़े 6 हजार से ज्यादा शिकायतें पेंडिंग हैं. कम स्टाफ और कोरोना की लहर ने सरकारी महकमों की शिकायतों की जांच पर मानों ब्रेक लगा रखा है. खुद लोकायुक्त कार्यालय की स्थिति नखदंत विहीन कार्यालय की तरह हो रही है जिसमें लोकायुक्त की नियुक्ति तो हो गई, लेकिन स्टाफ नहीं है. स्टाफ के अभाव में पूरा लोकायुक्त दफ्तर लगभग खाली पड़ा है. ऐसे हाल में अलमारियों से आखिर फाइल निकाले कौन ? लिहाजा शिकायतों का अंबार बढ़ता जा रहा है.

लोकायुक्त कार्यालय के इन हालात के पीछे दो बड़े और अहम कारण माने जा रहे हैं. पहला दो साल तक लोकायुक्त पद का खाली रहना और दूसरा स्टाफ का अभाव तथा कोरोना काल. सत्ता में आने के करीब ढाई साल बाद गहलोत सरकार ने 8 मार्च 2021 लोकायुक्त पद पर पीके लोहारा की नियुक्ति की थी. उससे पहले यह पद खाली था. इसके कारण यहां शिकायतों का अंबार लगता गया. हालांकि लोहारा की नियुक्ति से लगा था कि अब लोकसेवकों के भ्रष्टाचार पर नियंत्रण होने के साथ लंबित शिकायतों निपटारा होगा, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया.

वर्तमान में कुल 6740 शिकायतें पेंडिंग हैं
लोकायुक्त कार्यालय में सबसे ज्यादा ग्रामीण पंचायतीराज विभाग की 1221 शिकायतें लंबित हैं. दूसरे नंबर पर स्वायत शासन विभाग है. उसकी 1020 शिकायतें हैं. तीसरे नंबर पर राजस्व और चौथे नंबर पर पुलिस महकमा है. राजस्व विभाग की जहां 1010 शिकायतें पेंडिंग चल रही है वहीं पुलिस विभाग की 716 शिकायतें धूल फांक रही हैं. माइनिंग की 594, विविध विभाग की 446, शिक्षा विभाग की 197, कृषि विभाग की 43, सहकारिता की 50, उच्च शिक्षा की 29, खाद्य एवं नागरिकता विभाग की 42, मेडिकल एंड हैल्थ की 137, पीडब्ल्यूडी की 65, ऊर्जा विभाग की 143, ट्रांसपोर्ट की 16, वन विभाग की 50 और यूडीएच की 319 शिकायतें लंबित चल रही हैं.

इन विभागों की शिकायतों का भी लगा है अंबार
इनके अलावा आबकारी विभाग की 18, उद्योग की 30, पशुपालन की 2, सरकारी जांच की 15, सिचाई विभाग की 35, आईजीएनपी की 4, कोलोनाइजेशन की 8, विधि विभाग की 3, जेल की 4, श्रम विभाग की 27, पीएचईडी की 86, सामाजिक न्याय विभाग की 33, सेटलमेंट की 7, सचिवालय की 23, एसीडी डिपॉर्टमेंट की 11, आयुर्वेद विभाग की 7, देवस्थान की 19, रोडवेज की 19, कॉमर्शियल एवं टेक्सेज की 5, खान विभाग की 51, इंश्योरेंस की 232 और तकनिकी शिक्षा विभाग की 3 शिकायतें हैं.

2 हजार 34 शिकायतों का निस्तारण
जब लोकायुक्त ने पद संभाला था उस वक्त 8 हजार 228 शिकायतें लंबित थी. उनमें से 2 हजार 34 शिकायतों को निस्तारित कर दिया गया. लोकायुक्त सचिव गोरीशंकर शर्मा भी मानते हैं कि कोरोना काल और कम स्टाफ की वजह से जिस गति के साथ शिकायतों निस्तारण होना चाहिए था उस गति से नहीं हो पाया.

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