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प्रदेश में कैसे सुधरेंगे क्रिकेट के हालात ? जिला संघों के पास फूटी कौड़ी तक नहीं

आज हालात ये हैं कि करीब 20 जिला संघों के पास क्रिकेट कराने के लिए बैट और बॉल खरीदने तक का पैसा नहीं बचा है. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

आज हालात ये हैं कि करीब 20 जिला संघों के पास क्रिकेट कराने के लिए बैट और बॉल खरीदने तक का पैसा नहीं बचा है. फोटो : न्यूज 18 राजस्थान ।

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (Rajasthan Cricket Association) के चुनाव (Election) के बाद वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) के नेतृत्व में नई कार्यकारणी (new executive) गठित हो गई है. उनके सामने आरसीए और उसके जिला संघों (District associations) की माली हालत (Economic conditions) सुधारना सबसे बड़ी चुनौती (Biggest challenge) है.

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जयपुर. राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (Rajasthan Cricket Association) के चुनाव (Election) के बाद वैभव गहलोत (Vaibhav Gehlot) के नेतृत्व में नई कार्यकारणी (new executive) गठित हो गई है. उनके सामने आरसीए और उसके जिला संघों (District associations) की माली हालत (Economic conditions) सुधारना सबसे बड़ी चुनौती (Biggest challenge) है. कभी बीसीसीआई (BCCI) के जरिए आरसीए (RCA) और डीसीए (DCA) को लाखों-करोड़ों की मदद मिला करती थी. लेकिन मौजूदा हालात में जिला संघों के पास तो फूटी कौड़ी तक नहीं बची है. क्रिकेट की इस बदहाली के लिए लिए कौन जिम्मेदार (Who is responsible) रहा  ? इस पर अब भी विवाद कायम (Dispute continues) है.

जिलों की क्रिकेट सुधारने की चुनौती है
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के चुनावों में जिला संघों की क्रिकेट सुधारने का सबसे बड़ा चुनावी एजेंडा रहा था. इसी एजेंडे को डॉ. सीपी जोशी गुट ने वैभव गहलोत के नेतृत्व में चुनावी मुद्दा बनाया था. नई कार्यकारिणी ने चुनाव से पहले क्रिकेट की बहाली के दावे भी किए थे. अब नई एग्जीक्यूटिव के सामने सबसे पहले जिलों की क्रिकेट सुधारने की चुनौती है. बीते 4 से 5 साल में आरसीए से जुड़े जिला संघों को सबवेंशन की राशि नहीं मिल सकी. इसके चलते वहां क्रिकेट नहीं हो सकी.

बैट और बॉल खरीदने तक का पैसा नहीं बचा है
आज हालात ये हैं कि करीब 20 जिला संघों के पास क्रिकेट कराने के लिए बैट और बॉल खरीदने तक का पैसा नहीं बचा है. ये बात खुद एग्जीक्यूटिव में निर्वाचित प्रतिनिधि भी मानते हैं कि जिलों में क्रिकेट की बदहाली रही है. चंदे पर या फिर उधार पर क्रिकेट करानी पड़ी है. कई टूर्नामेंट के लिए उधार लिए पैसे अब तक जिला संघ चुका रहे हैं. आरसीए से जिलों को कभी 3 लाख रुपए सालाना सबवेंशन की राशि दी जाती थी. लेकिन बीसीसीआई से निलंबन के बाद जब आरसीए के पास ही राशि नहीं बची तो जाहिर है कि जिलों को पैसा कैसे मिलता. लिहाजा जिलों के खजाने पूरी तरह खाली हो गए.

2015-16 तक मिल था आखिरी सबवेंशन
जिलों को 2015-16 तक आखिरी सबवेंशन मिल सका था. हालांकि ललित मोदी की कार्यकारिणी के समय में दिए गए आखिरी सबवेंशन को लेकर भी आरसीए के दोनों गुटों के बीच विवाद रहा. जोशी गुट का कहना है कि तत्कालीन समय में सबवेंशन पूरी तरह सभी जिला संघों को समान रूप से नहीं दिया गया. ऐसे में जिलों की स्थिति बदतर रही. जोशी गुट अपने कार्यकाल के दौरान खजाना खाली रहने के पीछे मोदी गुट को ही जिम्मेदार मानता है.

40 करोड़ रुपए की राशि को लेकर चल रहा है आरोप-प्रत्यारोप का दौर
आरसीए को 2014 से ललित मोदी के कार्यकाल के बाद बीसीसीआई ने बैन कर दिया था. तब से बीसीसीआई से मिलने वाली राशि अटक गई. लेकिन इस दौरान आरसीए के खातों में मौजूद करीब 40 करोड़ रुपए से जिला संघों को सबवेंशन दिया गया और टूर्नामेंट कराए गए. लेकिन इसी 40 करोड़ रुपए की राशि को लेकर जोशी गुट ने ललित मोदी समर्थकों पर अनाप-शनाप खर्चे के आरोप लगाए. खुद पूर्व आरसीए अध्यक्ष ने भी कहा था कि उनके आरसीए में पहले कार्यकाल के दौरान करीब चालीस करोड़ रुपए की राशि शेष थी, जो दोबारा लौटने पर उन्हें नहीं मिली.

नांदू ने जोशी गुट के आरोपों को किया खारिज 
इस मामले में ललित मोदी के ग्रुप में रहे आरएस नांदू ने जोशी गुट के इन आरोपों को खारिज किया है. नांदू का कहना था कि पिछले 2 साल के कार्यकाल में क्रिकेट पटरी पर नहीं लौट सकी. जबकि आईपीएल में 4 करोड़ रुपए की राशि का दुरुपयोग किया गया. मोदी के कार्यकाल में उन्होंने जिलों में क्रिकेट कराई थी.

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