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होमगार्डों का हल्‍ला बोले- काम बराबर का, फिर भी तनख्वाह कम क्‍यों?

होमगार्डों का हल्‍ला बोले- काम बराबर का, फिर भी तनख्वाह कम क्‍यों?

होमगार्ड के जवान पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं लेकिन आज भी उन्हें अकुशल श्रमिक के बराबर ही वेतन मिलता है। वहीं इन होमगार्ड्स को हर रोज काम भी हासिल नहीं होता जिसके चलते इन्हें अपने परिवार का गुजारा चलाने में भी काफी दिक्कतें पेश आती हैं।

होमगार्ड के जवान पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं लेकिन आज भी उन्हें अकुशल श्रमिक के बराबर ही वेतन मिलता है। वहीं इन होमगार्ड्स को हर रोज काम भी हासिल नहीं होता जिसके चलते इन्हें अपने परिवार का गुजारा चलाने में भी काफी दिक्कतें पेश आती हैं।

होमगार्ड के जवान पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं लेकिन आज भी उन्हें अकुशल श्रमिक के बराबर ही वेतन मिलता है। वहीं इन होमगार्ड्स को हर रोज काम भी हासिल नहीं होता जिसके चलते इन्हें अपने परिवार का गुजारा चलाने में भी काफी दिक्कतें पेश आती हैं।

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होमगार्ड के जवान पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं लेकिन आज भी उन्हें अकुशल श्रमिक के बराबर ही वेतन मिलता है। वहीं इन होमगार्ड्स को हर रोज काम भी हासिल नहीं होता जिसके चलते इन्हें अपने परिवार का गुजारा चलाने में भी काफी दिक्कतें पेश आती हैं।

कानून व्यवस्था, आन्तरिक सुरक्षा और यातायात नियंत्रण जैसे मामलों में पुलिस के साथ कदम से कदम मिलाकर अहम भूमिका निभाने वाले होमगार्ड्स के साथ हो रहे भेदभाव को लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी गंभीरता जताई है। आयोग का मानना है कि स्वयंसेवी के नाम पर कम वेतन-भत्ते और सुविधाएं दिया जाना होमगार्ड्स के मानवाधिकारों के साथ ही संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।

राजस्थान होमगार्ड्स परिवार कल्याण संस्था और अन्य परिवादियों इस विषय में आयोग में दाखिल किए गए एक परिवाद पर सुनवाई करने के बाद आयोग के अध्यक्ष एचआर कुडी ने होमगार्ड्स की कार्यदशाओं, वेतन-भत्तों और सेवा शर्तों में सुधार के लिए राज्य सरकार से कुछ अनुशंषाएं की हैं।

आयोग ने राज्य सरकार से इन मसलों की अनुशंषा-
- होमगार्ड्स की कार्यदशा, वेतन, भत्ते, सेवाशर्तें, पेंशन और चिकित्सा सुविधाओं आदि के बारे में विचार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाए।
- उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों पर निर्णय लिए जाने तक अंतरिम तौर पर होमगार्ड्स को पुलिस कांस्टेबल का न्यूनतम मूल वेतन दिए जाने पर गंभीरता से विचार किया जाए।
- रोटेशन प्रणाली से होमगार्ड्स को ड्यूटी पर लेने की प्रक्रिया समाप्त कर उन्हें पूरे वर्ष काम पर रखा जाए।
- राज्य सरकार द्वारा गठित कमेटी मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग द्वारा पारित आदेश पर हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय के संदर्भ में राज्य सरकार की गई कार्यवाही का भी अध्ययन करे।

आयोग ने कहा तीन महीने में निर्णय हो
राज्य मानवाधिकार आयोग ने अपने आदेश की प्रति अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह को भेजी है और कहा है कि इन अनुशंषाओं पर तीन महीने में विचार कर निर्णय लिया जाए और आयोग को राज्य सरकार के निर्णय से अवगत भी करवाया जाए। आयोग अध्यक्ष एच. आर. कुडी ने आदेश में कहा है कि होमगार्ड के जवान सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही चुनाव ड्यूटी, बाढ़ नियंत्रण, अग्निशमन, बचाव कार्य और जेल सुरक्षा जैसे कार्यों में भी अपने कर्तव्यों का पूरी जिम्मेदारी से निर्वहन करते हैं। ये होमगार्ड जवान पुलिस कांस्टेबल के समान ही जिम्मेदारी से कार्य करते हैं लेकिन उन्हें पुलिस कांस्टेबल से कम वेतन-भत्ते और सुविधाएं प्राप्त होती है।

होमगार्ड साल में 6 से 7 महीने रहते हैं बेरोजगार
गौरतलब है कि होमगार्ड जवानों को ड्यूटी के दौरान प्रतिदिन केवल तीन सौ रुपए का मानदेय दिया जाता है साथ ही उन्हें साल में केवल पांच से छह महीने ही यह रोजगार हासिल हो पाता है। आयोग अध्यक्ष ने अपने आदेश में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक उद्घोषणा और संविधान में वर्णित नीति निर्देशक तत्वों का हवाला देते हुए कहा है कि यह मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के साथ ही समान काम के लिए समान वेतन प्राप्त करने के अधिकार का भी उल्लंघन है।
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