मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार पर लगाया 9 लाख रुपए का हर्जाना

राज्य मानवाधिकार आयोग (State human rights commission) ने राज्य सरकार (State government) पर 9 लाख रुपए का हर्जाना (compensation for damages) लगाया है. जमानत के लिए दुर्भावनापूर्वक कठोर शर्तें लगाने के एक मामले में आयोग ने ये बड़ा निर्णय (big decision) दिया है.

News18 Rajasthan
Updated: September 2, 2019, 7:06 PM IST
मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार पर लगाया 9 लाख रुपए का हर्जाना
राज्य मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे भारतीय दण्ड संहिता के प्रावधानों का दुरुपयोग बताया. आयोग का कहना है कि राज्य सरकार ने तथ्यों पर अपना पक्ष नहीं रखा.
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Updated: September 2, 2019, 7:06 PM IST
राज्य मानवाधिकार आयोग (State human rights commission) ने राज्य सरकार (State government) पर 9 लाख रुपए का हर्जाना (compensation for damages) लगाया है. जमानत के लिए दुर्भावनापूर्वक कठोर शर्तें लगाने के एक मामले में आयोग ने ये बड़ा निर्णय (big decision) दिया है. मामला वर्ष-2017 में एडीएम सिटी भरतपुर (ADM City Bharatpur) द्वारा जमानत के लिए दुर्भावनापूर्वक कठोर शर्तें लगाए जाने से जुड़ा है.

20-20 लाख रुपए की 5 जमानतें प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे
एडीएम ने हड़ताल में शामिल चिकित्सकों को 20-20 लाख रुपए की 5 जमानतें प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे. इसके साथ ही सम्पत्ति मूल्यांकन सब रजिस्ट्रार से प्रमाणित करवाकर प्रस्तुत करने के भी आदेश दिए थे. जमानत पेश नहीं करने पर डॉ. कप्तान सिंह को पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था. कड़ी शर्तों के चलते उनके साथ ही 2 अन्य डॉक्टर्स को भी तीन दिन हिरासत में रहना पड़ा था.

आयोग ने कहा यह भारतीय दण्ड संहिता के प्रावधानों का दुरुपयोग है

आयोग अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे भारतीय दण्ड संहिता के प्रावधानों का दुरुपयोग बताया. आयोग का कहना है कि राज्य सरकार ने तथ्यों पर अपना पक्ष नहीं रखा. इसके साथ ही मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए गलत आदेश की बात भी सरकार ने स्वीकार की. आयोग ने अब तीनों डॉक्टर्स को प्रतिदिन का 1-1 लाख रुपए का हर्जाना देने की अनुशंषा की है. इससे राज्य सरकार को कुल 9 लाख रुपए का हर्जाना वहन करना होगा.

कार्यपालक मजिस्ट्रेट के विरुद्ध तत्काल विभागीय कार्रवाई की अनुशंषा
आयोग अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया ने कहा कि कार्यपालक मजिस्ट्रेट के विरुद्ध तत्काल विभागीय कार्रवाई की जाए. कार्यपालक मजिस्ट्रेट के साथ ही प्रभारी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. आयोग ने ये भी कहा है कि आईपीसी के प्रावधानों में यदि संशोधन की जरूरत हो तो वह भी तुंरत किए जाएं. आयोग ने इस स्थिति को अत्यन्त खेदजनक बताया.
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(रिपोर्ट: दिनेश शर्मा एवं महेश दाधीच) 

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First published: September 2, 2019, 6:53 PM IST
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