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निकाय चुनाव में लागू होगा 'हाईब्रिड मॉडल', अब निकाय प्रमुख के लिए पार्षद होना जरूरी नहीं

सरकार के इस निर्णय के बाद राजस्थान देश का ऐसा पहला राज्य बन जाएगा, जहां निकाय प्रमुखों के चुनाव हाईब्रिड फार्मूले से होंगे.

सरकार के इस निर्णय के बाद राजस्थान देश का ऐसा पहला राज्य बन जाएगा, जहां निकाय प्रमुखों के चुनाव हाईब्रिड फार्मूले से होंगे.

राजस्थान (Rajasthan) में निकाय चुनाव (Local Body Election) की तैयारी में जुटी राज्य सरकार (State government) ने एक बड़ा निर्णय (Big decision) लिया है. सरकार के इस निर्णय से इस बार प्रदेश में निकाय चुनाव रोचक (Interesting) होने वाले हैं.

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जयपुर. राजस्थान (Rajasthan) में निकाय चुनाव (Local Body Election)  की तैयारी में जुटी राज्य सरकार (State government) ने एक बड़ा निर्णय (Big decision) लिया है. सरकार के इस निर्णय से इस बार प्रदेश में निकाय चुनाव रोचक (Interesting) होने वाले हैं. सरकार के निर्णय के मुताबिक इस बार निकाय प्रमुख यानि नगरपालिका का अध्यक्ष, नगरपरिषद का सभापति और नगर निगम का महापौर बनने के लिए पार्षद (Councilor) होना अनिवार्य (Mandatory) नहीं होगा. इस हाईब्रिड फार्मूले (Hybrid formula) के आने के बाद पार्षद का चुनाव ना लड़ने वाला और पार्षद का चुनाव हारने वाला प्रत्याशी भी निकाय प्रमुख (Head of the local body) बन सकेगा.

सरकार ने अधिसूचना भी की जारी
स्वायत्त शासन विभाग ने इस संबध में बुधवार को अधिसूचना भी जारी कर दी है. यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि सरकार को नियमों में परिवर्तन और बदलाव का अधिकार होता है. सरकार के इस निर्णय के बाद राजस्थान देश का ऐसा पहला राज्य बन जाएगा, जहां निकाय प्रमुखों के चुनाव हाईब्रिड फार्मूले से होंगे.अभी तक देश के किसी भी राज्य में हाईब्रिड फार्मूले से चुनाव का नियम नहीं है. निकाय प्रमुख बनने के लिए दावेदार का पार्षद होना जरूरी होता है.

नामांकन फीस बढ़ाकर लगभग दोगुनी की
नए नियम को लागू करने के बाद निकाय प्रमुख का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए नामांकन फीस बढ़ा दी गई है. उसे पहले के मुकाबले लगभग दोगुना कर दिया गया है. अब यह महिला प्रत्याशियों के लिए 15,000 तो पुरुषों के लिए 30,000 रुपए होगी. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि निकाय प्रमुख जीतने वाले प्रत्याशी को कितनी समयावधि में चुनाव लड़कर जीतना होगा.

निकाय चुनाव को लेकर दूसरा बड़ा और अहम निर्णय
उल्लेखनीय है कि निकाय चुनाव को लेकर गत चार दिन में राज्य सरकार ने यह दूसरा बड़ा और अहम निर्णय लिया है. चार माह बाद गत सोमवार को हुई अशोक गहलोत कैबिनेट की बैठक में निकाय प्रमुख का चुनाव प्रत्यक्ष की बजाय अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराए जाने का निर्णय लिया गया था. उस निर्णय के तहत अब प्रदेश में निकाय प्रमुख सीधे जनता नहीं चुनेगी बल्कि जनता द्वारा चुने गए पार्षद ही चुनेंगे. प्रदेश में इस साल के अंत से चार चरणों में निकाय चुनाव होने हैं. निकाय चुनाव का पहला चरण अगले माह होना प्रस्तावित है.

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