अपना शहर चुनें

States

Bye-Bye 2020: राजस्थान में सालभर में किसान इन बड़ी समस्याओं से जूझते रहे, बस यह थोड़ी सी राहत मिली

लॉकडाउन में सब्जियों और फूलों की खेती पूरी तरह बर्बाद हो गई. मांग ठप होने के चलते किसानों को अपनी फसल खेतों में ही सूखने देने पर मजबूर होना पड़ा.
लॉकडाउन में सब्जियों और फूलों की खेती पूरी तरह बर्बाद हो गई. मांग ठप होने के चलते किसानों को अपनी फसल खेतों में ही सूखने देने पर मजबूर होना पड़ा.

Bye-Bye 2020: कोरोन महामारी (COVID-19) के बीच यह साल किसानों के लिहाज से कुछ अच्छा नहीं रहा. इस वर्ष किसानों (Farmers) को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा, वहीं राहत के नाम पर उसके हाथ ज्यादा कुछ नहीं लग पाया.

  • Share this:
जयपुर. वर्ष- 2020 कृषि (Agriculture) के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहा. इस साल में कई ऐसी घटनाएं हुईं जिन्होंने किसानों (Farmers) को खून के आंसू रुलाये तो राज्य सरकार के कुछ फैसलों से किसानों को आंशिक राहत भी मिली. इस साल किसानों पर टिड्डियों (Locusts) ने जहां फिर कहर बरपाया, वहीं बजारा खरीद को लेकर सियासत (Politics) गरमायी हुई रही. सियासत के इस खेल में किसान के पल्ले अभी तक कुछ नहीं पड़ा है. केन्द्रीय कृषि कानूनों को लेकर किसान सड़कों पर आया हुआ है तो कोरोना काल के लॉकडाउन में उसे कुछ रियायतें भी मिली.

प्रदेश में 2020 में बड़े स्तर पर टिड्डियों का प्रकोप हुआ जिसने किसानों को परेशान किया. इस साल 11 अप्रेल 2020 को टिड्डियों का प्रदेश में प्रवेश हुआ और कुछ ही दिनों में ये पूरे प्रदेश में फैल गईं. बांसवाड़ा जिले को छोड़कर सभी 32 जिलों में टिड्डियों का प्रकोप हुआ. करीब 6 लाख 41 हजार हैक्टेयर क्षेत्र टिड्डियों की वजह से प्रभावित हुआ. कृषि विभाग और टिड्डी नियंत्रण संगठन ने बड़े स्तर पर टिड्डी नियंत्रण के प्रयास किए. इन प्रयासों की बदौलत करीब 5 लाख 21 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण किया गया. राज्य सरकार द्वारा टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए किसानों को कीटनाशी मुफ्त भी उपलब्ध करवाए गए.

Bye-Bye 2020: कोरोना संकट की बीच अशोक गहलोत सरकार के ये अहम फैसले रहे चर्चित

बाजरे पर मचा बवाल


नवम्बर माह में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के बाजरा खरीद को लेकर किए गये एक ट्वीट ने बड़ा बखेड़ा खड़ा किया. खट्टर ने ट्वीट कर कहा कि हरियाणा में राजस्थान का बाजरा नहीं खरीदा जाएगा।. दरअसल हरियाणा में बाजरा 2150 रुपए क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा था जबकि राजस्थान की मंडियों में बाजरा करीब 1300 रुपए प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा था. खट्टर के बाजरा खरीद को लेकर किए गए इस ट्वीट ने राजनीतिक तूल पकड़ा और पक्ष-विपक्ष में इसे लेकर खूब बयानबाजियां हुईं.

कृषि कानूनों को लेकर छिड़ा संग्राम
केन्द्र सरकार द्वारा लाए गये तीन कृषि कानूनों का राजस्थान में भी पुरजोर विरोध देखने को मिला. राजस्थान के किसानों और मंडी व्यापारियों की इस आन्दोलन में सक्रिय भूमिका नजर आई. वहीं प्रदेश में सत्तारुढ़ कांग्रेस पार्टी समेत विभिन्न राजनीतिक दलों का भी इसे समर्थन मिला. राज्य सरकार इन कृषि कानूनों के विरोध में अपने संशोधन लेकर आई. वहीं मंडी व्यापारियों ने बार-बार मंडियां बंद रखकर इन कानूनों को प्रति अपना विरोध जताया. उधर राजस्थान के किसानों ने भी कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच का ऐलान किया और शाहजहांपुर बॉर्डर पर जयपुर-दिल्ली हाईवे को जाम भी कर दिया. एनडीए में शामिल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी इन कृषि कानूनों के पक्ष में खड़ी नजर आई और केन्द्र सरकार के विरोध का रुख अख्तियार किया.

लॉकडाउन में मिली कई राहतें
लॉकडाउन के दौरान सरकार की ओर से कई तरह की राहतें किसानों को दी गई. किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों में ना बेचनी पड़े इसके लिए उपज रहन ऋण योजना लॉन्च की गई. योजना के तहत किसानों को उपज गिरवी रखने पर 11 प्रतिशत की जगह महज 3 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण दिया गया. वहीं करीब 550 ग्राम सेवा सहकारी समितियों और क्रय विक्रय सहकारी समितियों को गौण मण्डी घोषित किया गया ताकि किसानों को उपज बेचने के लिए घर से ज्यादा दूर नहीं जाना पड़े. न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल की खरीद के लिए केन्द्रों की संख्या को भी करीब 3 गुणा बढ़ाया गया.

खेतों में ही सुखाई फसल
इस साल लॉकडाउन की मार भी किसानों पर खूब पड़ी. लॉकडाउन में सब्जियों और फूलों की खेती पूरी तरह बर्बाद हो गई. मांग ठप होने के चलते किसानों को अपनी फसल खेतों में ही सूखने देने पर मजबूर होना पड़ा. इतना ही नहीं किसानों को उपज औने-पौने दामों में भी बेचनी पड़ी. किसानों के साथ ही पशुपालकों को भी भारी खामियाजा लॉकडाउन के दौरान उठाना पड़ा. स्थितियां यहां तक बनी की किसानों को दूध की छाछ बनाकर वापस पशुओं को ही पिलानी पड़ी.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज