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प्रदेश में हैं 109 बड़ी पेयजल परियोजनाएं फिर भी प्‍यासी जनता

प्रदेश में हैं 109 बड़ी पेयजल परियोजनाएं फिर भी प्‍यासी जनता

गांव और शहरों में सतही पेयजल पहुंचाने के लिए राज्य सरकार की ओर से स्वीकृत की गई 109 बड़ी परियोजनाओं के बाद भी राज्य की जनता को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है. परियोजनाओं के कार्यों में हो देरी के चलते लोगों को परेशान होना पड़ रहा है. राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2004 से वर्ष 2014 तक 31 हजार 777 करोड़ की लागत से कुल 109 मेजर पेयजल प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन विभाग के इंजीनियरों और ठेका कंपनियों की मिलीभगत के चलते इनमें से अब तक मात्र 38 प्रोजेक्ट ही पूरे हो सके हैं.

गांव और शहरों में सतही पेयजल पहुंचाने के लिए राज्य सरकार की ओर से स्वीकृत की गई 109 बड़ी परियोजनाओं के बाद भी राज्य की जनता को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है. परियोजनाओं के कार्यों में हो देरी के चलते लोगों को परेशान होना पड़ रहा है. राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2004 से वर्ष 2014 तक 31 हजार 777 करोड़ की लागत से कुल 109 मेजर पेयजल प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन विभाग के इंजीनियरों और ठेका कंपनियों की मिलीभगत के चलते इनमें से अब तक मात्र 38 प्रोजेक्ट ही पूरे हो सके हैं.

गांव और शहरों में सतही पेयजल पहुंचाने के लिए राज्य सरकार की ओर से स्वीकृत की गई 109 बड़ी परियोजनाओं के बाद भी राज्य की जनता को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है. परियोजनाओं के कार्यों में हो देरी के चलते लोगों को परेशान होना पड़ रहा है. राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2004 से वर्ष 2014 तक 31 हजार 777 करोड़ की लागत से कुल 109 मेजर पेयजल प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन विभाग के इंजीनियरों और ठेका कंपनियों की मिलीभगत के चलते इनमें से अब तक मात्र 38 प्रोजेक्ट ही पूरे हो सके हैं.

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गांव और शहरों में सतही पेयजल पहुंचाने के लिए राज्य सरकार की ओर से स्वीकृत की गई 109 बड़ी परियोजनाओं के बाद भी राज्य की जनता को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है. परियोजनाओं के कार्यों में हो देरी के चलते लोगों को परेशान होना पड़ रहा है. राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2004 से वर्ष 2014 तक 31 हजार 777 करोड़ की लागत से कुल 109 मेजर पेयजल प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन विभाग के इंजीनियरों और ठेका कंपनियों की मिलीभगत के चलते इनमें से अब तक मात्र 38 प्रोजेक्ट ही पूरे हो सके हैं.

प्रदेश में तेजी से गिर रहे भूजल स्तर को रोकने के लिए राज्य सरकार ने 222 शहरों और एक लाख 21 हजार 133 गांव-ढाणियों में सतही पेयजल पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने चरणबद्ध पेयजल परियोजनाओं का काम शुरू किया. पिछले एक दशक में राज्य सरकार की ओर से करीब 32 हजार करोड़ की लागत से प्रदेश में 109 पेयजल परियोजनाओं को मंजूरी दी है.

इनमें से 103 परियोजनाओं पर जलदाय विभाग ने काम शुरू किया, लेकिन एक दशक के इस लंबे समय में जलदाय विभाग मात्र 38 परियोजनाओं का काम ही पूरा कर पाया है. विभाग की ओर से 65 पेयजल परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है, जिनमें से तीन दर्जन परियोजनाओं का कार्य देरी से चल रहा है.

प्रदेश में सबसे ज्यादा 27 पेयजल परियोजनाएं जोधपुर संभाग में चल रही है. इसी प्रकार अजमेर संभाग में 8, कोटा संभाग में 8, उदयपुर संभाग में 3, जयपुर संभाग में 9 और भरतपुर संभाग में 4 पेयजल परियोजनाओं पर काम चल रहा है.

परियोजनाओं की कुछआ चाल के चलते प्रदेश की जनता के गले तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है.

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