Rajasthan: कृषि से आय दोगुनी नहीं बल्कि कई गुणा होगी, जयपुर के किसान से जानिए तरकीब

अवाना परंपरागत खेती के साथ ही मरुधरा में सेब, बादाम और स्ट्रॉबेरी जैसी खेती भी करके दिखा रहे हैं
अवाना परंपरागत खेती के साथ ही मरुधरा में सेब, बादाम और स्ट्रॉबेरी जैसी खेती भी करके दिखा रहे हैं

Integrated farming system: खेती से आय दोगुनी (Double income) ही नहीं कई गुना की जा सकती है. जरूरत है तो बस बुलंद इरादों (Lofty intentions) की. इसका जीता जागता उदाहरण हैं जयपुर के प्रगतिशील किसान सुरेन्द्र अवाना.

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जयपुर. क्या कृषि से भारत का कायापलट संभव है ? क्या अन्नदाता आत्मनिर्भर (Self dependent) भारत का आधार बन सकता है ? क्या खेती (Farming) भी उद्योगों के समान अनवरत आय का जरिया (Source of income) बन सकती है ? यदि आपको इन सब सवालों का जवाब यदि हां में चाहिए और ये सब साकार होते हुए देखना है तो आपको किसान सुरेन्द्र अवाना के खेत का दौरा करना होगा. जयपुर के निकट बिचून गांव में प्रगतिशील किसान सुरेन्द्र अवाना खेती को नए आयाम दे रहे हैं. एक ओर जहां देश के किसान खेती से गुजारा नहीं होने की बात कहकर धीरे-धीरे खेती से दूर होते जा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर सुरेन्द्र अवाना खेती का आईएफएस मॉडल यानि इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (Integrated farming system) अपनाकर खेती से कई गुना मुनाफा कमाने की तरकीब सूझा रहे हैं.

सरकार भी किसानों से केवल परंपरागत खेती के भरोसे रहने की बजाय समन्वित खेती अपनाने पर जोर दे रही है. समन्वित खेती यानि खेती के साथ ही खेती से जुड़े दूसरे कार्यों को भी साथ में ही करना है ताकि खेती की लागत को कम किया जा सके और आय में इजाफा हो सके. एकीकृत खेती अपनाने का एक बड़ा फायदा यह है कि यदि किसी वजह से एक काम से आय नहीं भी होती है तो दूसरे काम से गुजारा चलाया जा सकता है.

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खेत पर 18 तरह का चारा उपजा रहे हैं
सुरेन्द्र अवाना अपने खेत पर नए जमाने की खेती के साथ ही बागवानी, औषधीय खेती, डेयरी, मछली पालन और खाद निर्माण जैसे कार्य भी साथ- साथ करते हैं. ये सभी कार्य एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण इनकी लागत भी कम हो जाती है. मसलन पशुओं के लिए चारा खेत में ही पैदा हो जाता है. पशुओं का अपशिष्ट खाद बनाने के काम आ जाता है. इसी तरह मछलियों के लिए आहार भी खेत और डेयरी से मिल जाता है. सुरेन्द्र अवाना अपने खेत पर 18 तरह का चारा उपजा रहे हैं. इस बहुवर्षीय चारे से 5 से 80 साल तक आय होगी.

देशी नस्ल की करीब 170 गिर गाय पाल रखी है
इतना ही नहीं अवाना परंपरागत खेती के साथ ही मरुधरा में सेब, बादाम और स्ट्रॉबेरी जैसी खेती भी कर के दिखा रहे हैं. खेती के साथ ही अवाना ने बड़े स्तर पर डेयरी का व्यवसाय करते हुए देशी नस्ल की करीब 170 गिर गाय पाल रखी है. इस देशी गाय के A2 मिल्क की भारी डिमांड है और यह ऊंचे दामों में बिकता है. डेयरी से निकलने वाले गोमूत्र- गोबर का खेती में खाद के रूप में उपयोग होता है. ऑर्गेनिक खाद तैयार कर बेचने के लिए उन्होंने खेत पर ही प्लांट लगाया हुआ है. ऑर्गेनिक खाद के इस्तेमाल से तैयार हुई ऑर्गेनिक उपज के दाम भी ज्यादा मिलते हैं.

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मछली पालन भी कर रहे हैं अवाना
किसान सुरेन्द्र अवाना कहना है कि यह आय का बड़ा जरिया है. इसमें एक बीघा जमीन से एक साल में 10 लाख की आमदनी हो सकती है. मछली पालन के लिए सरकार से सब्सिडी भी मिलती है. मछलियों की डिमांड भी ज्यादा है और दाम भी ज्यादा मिलते हैं. वहीं कोरोना काल में औषधीय खेती का महत्व भी बढ़ गया है. सुरेन्द्र अवाना ने भी औषधीय खेती शुरू कर दी है और इससे भविष्य में बड़े मुनाफे की उम्मीद है. किसान सुरेन्द्र अवाना का कहना है कि सरकार का लक्ष्य साल 2022 तक किसान की आय दोगुनी करना है. लेकिन एकीकृत खेती से आय कई गुना की जा सकती है. सुरेन्द्र अवाना के इस सफल मॉडल को देखने देशभर से किसान और कृषि वैज्ञानिक आते हैं.
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