राजस्थान: कोरोना काल में साइबर ठगी की बढ़ी वारदात, जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने उठाया बड़ा कदम

यदि शिकायतकर्ता पोर्टल पर शिकायत दर्ज नहीं करा पाता है तो साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड निवारण इकाई द्वारा पोर्टल पर शिकायत का इंद्राज कराया जाएगा. (सांकेतिक तस्वीर)

कोरोना महामारी के दौरान बढ़ते साइबर फाइनेंसियल फ्रॉड को ध्यान में रखते हुए जयपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा साइबर फाइनेंशियल फ़्रॉड इकाई (Financial Fraud Unit) का गठन किया गया है.

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जयपुर. कोरोना काल (Corona Era) में साइबर ठगी (Cyber Fraud) की वारदातों में तेजी से इजाफा हुआ है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस साल अप्रैल और मई के महीने में ही 2121 लोगों से 6 करोड़ रुपयों से अधिक धनराशि की ठगी हुई है. इसको देखते हुए पुलिस कमिश्नरेट में साइबर फाइनेंसियल फ्रॉड इकाई का गठन किया गया है. कोरोना महामारी के दौरान बढ़ते साइबर फाइनेंसियल फ्रॉड को ध्यान में रखते हुए जयपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा साइबर फाइनेंशियल फ़्रॉड इकाई का गठन किया गया है. किसी भी व्यक्ति के साथ यदि कोई साइबर अपराधी द्वारा फाइनेंशियल अपराध किया जाता है तो पीड़ित व्यक्ति द्वारा इस इकाई से संपर्क करने पर पीड़ित को कानूनी प्रक्रिया में मदद की जाएगी और फ़्रॉड की गई धनराशि को अपराधी के बैंक खाते से निकासी को रोका जाएगा. इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 155260 शुरू किया गया है.

पीड़ित व्यक्ति अपनी शिकायत कंट्रोल रूम नंबर 100 या 112 पर भी दर्ज करवा सकता है. अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त महेश चौधरी इस इकाई के नियंत्रक अधिकारी होंगे.हेल्पलाइन पर शिकायत से फ़्रॉड के संबंध में सभी जानकारी प्राप्त कर वित्तीय संस्था से संपर्क कर अपराधी द्वारा फ़्रॉड की गई राशि को जब्त कराने की कार्रवाई कराई जाएगी. यदि पीड़ित द्वारा फ्रॉड होते ही इस इकाई को सूचित कर दिया जाता है तो उसकी धनराशि को बचाया जा सकता है. शिकायतकर्ता से cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने का आग्रह किया जाएगा और आवश्यक दिशा निर्देश प्रदान किए जाएंगे.  प्राप्त शिकायत को संबंधित थाना अधिकारी और जिला साइबर इकाई प्रभारी को भेजा जाएगा.

उनको शिकायत दर्ज करवाने के लिए प्रेरित करेगी
यदि शिकायतकर्ता पोर्टल पर शिकायत दर्ज नहीं करा पाता है तो साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड निवारण इकाई द्वारा पोर्टल पर शिकायत का इंद्राज कराया जाएगा. भविष्य में अन्य लोगों के साथ इस तरह की चीटिंग ना हो, इसके लिए आरोपी के मोबाइल की ब्लॉकिंग प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी. आरोपी द्वारा प्रयोग में लिए जा रहे अन्य संदिग्ध मोबाइल नंबर को भी ब्लैक लिस्टेड कराया जाएगा और इस तरह के संदिग्ध व्यक्तियों को फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले वेंडर की आपराधिक भूमिका भी की भी जांच की जाएगी. तकनीकी शाखा संदिग्ध मोबाइल नंबर से ठगे गए अन्य संभावित परिवादियों की सूची बनाकर साइबर फाइनेंशियर्स रोड इकाई को प्रेषित करेगी और इकाई परिवारों से संपर्क कर उनको शिकायत दर्ज करवाने के लिए प्रेरित करेगी.