Home /News /rajasthan /

independence day 2022 special mukesh chauhan from alwar tattooed names of 1971 indo pakistan war 56 martyred soldiers cgpg

मिलिए चलते फिरते शहीद स्मारक से, अनोखे अंदाज में वीरों को दी श्रद्धांजलि, देखकर हैरान रह जाते हैं लोग

Rajasthan Nes: अलवर के मुकेश चौहान ने शहीदों को अनोखे अंदाज में श्रद्धांजलि दी है.

Rajasthan Nes: अलवर के मुकेश चौहान ने शहीदों को अनोखे अंदाज में श्रद्धांजलि दी है.

Independence Day 2022 Special Story: राजस्थान (Rajasthan News) के अलवर (Alwar News) जिले के शाहजहांपुर के निवासी मुकेश चौहान एक चलते फिरते शहीद स्मारक हैं. उन्होंने 971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान शहीद हुए 56 शहीद जवानों के नाम अपने शरीर पर गढ़वा लिए हैं. मुकेश का कहना है कि 1971 के युद्ध में उनके चाचा शहीद हो गए थे. इसके बाद उन्होंने शहीदों के लिए खास तरीके से श्रद्धांजलि देने की सोची.

अधिक पढ़ें ...
 जयपुर. राजस्थान जिसे शहीदों का प्रदेश भी कहा जाता है वहां एक चलता फिरता शहीद स्मारक है. यह चलता फिरता शहीद स्मारक हैं अलवर जिले के शाहजहांपुर के निवासी मुकेश चौहान. मुकेश चौहान के मन में शहीदों को श्रृद्धांजलि देने के लिए एक अनूठा तरीका आया. फिर मुकेश ने इस तरीके को अपनाया और बन गए देश के पहले चलते फिरते शहीद स्मारक. जयपुर में होटल व्यवसाय के क्षेत्र में सेवाए दे रहे  मुकेश चौहान ने अपने शरीर पर साल 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान शहीद हुए 56 शहीद जवानों के नाम गढ़वा लिए है. नाम गढ़वा कर अपना नाम शहीदों के नाम भी कोई पैन, पेंसिल से नहीं बल्कि टेटू जैसी मशीन से अपने शरीर पहर लिखवा लिए है या यू कहें गुदवा लिए है.
मुकेश ने भारत पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के दौरान बंगाल के म्यामति पहाड़ को दुश्मन देश आजाद कराते समय शहीद हुए राजपूताना राइफल्स के 56 जवान शहीद हो गए थे, जिनमें मुकेश के चाचा राइफल मैन हनुमान सिंह चौहान भी शामिल थे. मुकेश चौहान चलता फिरता शहीद स्मारक के तौर पर लिम्बा बुक ऑफ रिकार्ड्स में भी अपना नाम दर्ज करवा लिया है.
मुकेश के चाचा 1971 में हुए थे शहीद
मुकेश का कहना है कि जब चाचा हनुमान सिंह चौहान 1971 के युद्ध में शहीद हुए तो उनकी चाची को जगह-जगह सम्मान मिलता देख उन्होंने शहीदों के सम्मान करने के लिए कुछ अनूठा करने की सोची. मुकेश चौहान चाचा की बटालिय़न में एक साथ शहीद हुए सभी 56 जवानों के नाम अपने शरीर पर गढवाए. इतना ही नहीं मुकेश चौहान ने अपने गांव के पास के 6 और शहीद हुए जवानों के नाम भी लिखवा लिए है. जब-जब दुश्मनों नें हमारे इस पवित्र देश की तरफ अपनी नज़रें तिरछी की हैं तब-तब भारत माता की सेवा में इस राजपूत रेजीमेंट के बहादुर जवानों ने अपना सबकुछ निछावर करते हुए उच्च कोटि के युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया है.
आजादी के पहले दोनों विश्व युद्ध में इस राजपूताना राइफल्स ने अंग्रेजों की तरफ से युद्ध करते हुए उत्कृष्ट सेवा, उच्च श्रेणी की वीरता का प्रदर्शन किया था. प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान राजपूताना राइफल्स के लगभग 30,000 सैनिकों ने अपनी जान गंवाई थी. राजपूताना राइफल्स का आदर्श और सिद्धांत वाक्य “वीर भोग्या वसुंधरा”है. इसका अर्थ है कि ‘केवल वीर और शक्तिशाली लोग ही इस धरती का उपभोग कर सकते है. राजपूताना राइफल्स का युद्धघोष है.“वीर भोग्या वसुंधरा, राजा रामचंद्र की जय” है. राजपूताना राइफल्स को मुख्यत: पाकिस्तान के साथ युद्ध के लिए जाना जाता है. फिर चाहे सन 47 की लड़ाई हो या फिर 65 और 71 की जंग, हर बार राजपूताना राइफल्स ने शानदार प्रदर्शन किया. इसी बटालिय़न के शहीदों के अनूठे अंदाज में एक दिन ही नहीं मरते दम तक श्रृद्धांजलि देने का अनूठा तरीका अपनाया है मुकेश चौहान ने.

Tags: Jaipur news, Rajasthan news

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर