भारत का लोकतंत्र ब्रिटेन का गिफ्ट नहीं, आवाम की ताकत है: प्रणब मुखर्जी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि भारत का लोकतंत्र ब्रिटेन का गिफ्ट नहीं है और न ही एक्सीडेंटल है यह देश के आवाम की ताकत है.

Sudheer Kumar | News18 Rajasthan
Updated: August 1, 2019, 2:23 PM IST
भारत का लोकतंत्र ब्रिटेन का गिफ्ट नहीं, आवाम की ताकत है: प्रणब मुखर्जी
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ( फाइल फोटो)
Sudheer Kumar | News18 Rajasthan
Updated: August 1, 2019, 2:23 PM IST
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि भारत का लोकतंत्र न तो ब्रिटेन की गिफ्ट है और न ही एक्सीडेंटल है, यह हिंदुस्तान की आवाम की ताकत है. यह बात मुखर्जी ने जयपुर विधानसभा में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय संघ राजस्थान चैप्टर की ओर से आयोजित उद्घाटन समारोह के दौरान कही. मुखर्जी ने कहा कि भारत की संसदीय यात्रा तीन चरणों से गुजरी है. 1952 से 57 तक का शुरुआती फेज रहा है. इस चरण में भारत संवैधानिक और भौगोलिक रूप से मजबूत हुआ. 1967 से 1989 के बीच लोकतंत्र ने कई रूप देखे हैं. गठबंधन की सरकार भी बनी है. 2014 के बाद से फिर से मतदाताओं का रुझान नेशनल पार्टियों की ओर बढ़ा और फिर दो बार पूर्ण बहुमत की सरकार आई है. विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने भी इस उद्घाटन सत्र को संबोधित किया.

राष्ट्रमंडल संसदीय संघ राजस्थान चैप्टर की ओर से हुआ था आयोजन

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने विधानसभा में राष्ट्रमंडल संसदीय संघ राजस्थान चैप्टर की ओर से आयोजित एक दिवसीय सत्र को संबोधित करते हुए देश के इतिहास, संविधान और लोकतांत्रिक प्रणाली पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश के संविधान का जब गठन हुआ हर पहलू का ध्यान रखा , मुखर्जी ने कहा कि 17 लोकसभा चुनाव हो चुके हैं लेकिन अभी तक किसी दल को 50 फीसदी मत नहीं  मिले. उन्होंने कहा कि देश के लोकतंत्र में कई बदलाव आए, यही इस लोकतंत्र की खूबी है. पड़ोसी मुल्क हमारे साथ आजाद हुआ लेकिन राजनीतिक अस्थिरता हमेशा बनी रही. यहां विचारों का भेद है लेकिन देश का लोकतंत्र मजबूत है. उन्होंने कहा कि आजादी हमारी मूल धारणा थी.

कई सियासी बदलाव देखे हैं पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने : अशोक गहलोत 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (फाइल फोटो)


इस मौके पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि इस तरह के आयोजन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है. चुने जनप्रतिनिधि केवल सड़क, बिजली, पानी और ट्रांसफर पोस्टिंग में ही उलझ कर रह जाते हैं ,जबकि ऐसे सेमिनार और वरिष्ठ जनों के सानिध्य में विधायिका का मूल स्वरूप समझ में आता है. उन्होंने प्रणब मुखर्जी के बारे में बताया कि मुखर्जी ऐसे पार्लियामेंटेरियन रहे हैं जिन्होंने देश के कई सियासी बदलाव देखे हैं. इस मौके पर गहलोत ने प्रणब मुखर्जी के साथ अपने संबंधों को भी बताया.

गहलोत ने कहा कि आज दिनभर की बैठक से एक नई शुरुआत होगी, व्यक्तित्व का विकास होगा. संसदीय कार्यप्रणाली की जानकारी मिलेगी. चुनौती जो देश और दुनिया के सामने है और जो चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं. दुनिया के अंदर और लोकसभा और विधानसभाओं में क्या सोचते हैं उसकी कार्यप्रणाली किस तरह से होनी चाहिए वह इसके माध्यम से जान सकेंगे.
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कटारिया ने आयोजन के लिए सीपी जोशी को दी बधाई

इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने इस आयोजन के लिए सीपी जोशी और आयोजन सचिव संयम लोढ़ा को बधाई दी. इस मौके पर आयोजन सचिव संयम लोढ़ा ने कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में बताया.राष्ट्रमंडल संसदीय संघ का आयोजन राजस्थान में पहली बार हुआ है .इसमें राजस्थान विधानसभा के सदस्य और पूर्व सदस्य सहित मीडिया एनजीओ और अन्य गणमान्य लोगों को आमंत्रित किया गया.

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First published: August 1, 2019, 2:18 PM IST
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