Inside Story: ऊपर से शांत लेकिन अंदर ही अंदर उबाल पर है राजस्थान कांग्रेस की सियासत

गुड़ामालानी विधायक हेमाराम चौधरी के इस्तीफे का मामला भी ठंडा पड़ता जा रहा है. अभी तक ना तो उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया है और ना ही आलाकमान द्वारा उन्हें मनाने की कोई खास कोशिशें की गई हैं.

Inside Story of Rajasthan Congress: राजस्थान कांग्रेस में इन दिनों हलचल कुछ ज्यादा मची हुई है. ऊपर से देखने में सबकुछ शांत दिख रहा है, लेकिन अंदरुनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. इस बार चिंता पायलट खेमे (Pilot Camp) में ज्यादा बताई जा रही है.

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जयपुर. राजस्थान कांग्रेस की सियासत (Rajasthan Congress politics) इन दिनों ऊपर से शांत नजर आ रही है, लेकिन अंदर ही अंदर उबाल मार रही है. गहलोत और पायलट खेमे (Ashok Gehlot Vs Sachin Pilot) में खींचतान जारी है. इस उबाल को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि किसी भी दिन कोई बड़ा राजनीतिक बखेड़ा खड़ा हो सकता है. पायलट खेमे के लिए यह ज्यादा चिंता वाली बात है. पिछले दिनों में उल्टे पड़े कुछ दांव इस ओर इशारा कर रहे हैं कि अभी पायलट खेमे के लिए समय कुछ अच्छा नहीं चल रहा है.

इस्तीफा देने के बाद पायलट खेमे के गुड़ामालानी विधायक हेमाराम चौधरी के तेवर नरम हैं. दूसरी तरफ आलाकमान भी इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहा है. विराटनगर विधायक इन्द्राज गुर्जर को सीएम गहलोत की तारीफ पर निशाने पर लिया गया और 24 घंटे में ही उन्हें बैकफुट पर आना पड़ा. मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में हो रही देरी के चलते पायलट खेमा आक्रोश में तो है, लेकिन सरकार को दबाव में लाने में तुरुप का इक्का कौन सा दांव हो सकता है, यह समझ में नहीं आ रहा है.

24 घंटे में ही बैकफुट पर आए इन्द्राज गुर्जर
पायलट खेमे के विधायक इन्द्राज गुर्जर ने पहले विकास कार्यों के लिए सीएम गहलोत की खूब तारीफें कीं और जब मामला उछला तो 24 घंटे के अंदर ही उन्हें बैकफुट पर आकर सोशल मीडिया के जरिए स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा. इन्द्राज गुर्जर ने सचिन पायलट जिन्दाबाद, कांग्रेस जिन्दाबाद के नारे के साथ पायलट के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई, लेकिन अब चर्चाएं इस बात को लेकर हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि इन्द्राज गुर्जर को सोशल मीडिया के जरिए पायलट के अपनी प्रतिबद्धता दोहरानी पड़ी. कांग्रेस विधायक होने के नाते कांग्रेस के मुख्यमंत्री की तारीफ करने में कुछ भी गलत नहीं था. ऐसा माना जा रहा है कि मीडिया में गहलोत की तारीफ की खबरें आने के बाद उन पर ऐसा करने का दबाव था, जिसके चलते उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट डालनी पड़ी.

हेमाराम चौधरी का मामला पड़ा ठंडा !
गुड़ामालानी विधायक हेमाराम चौधरी के इस्तीफे का मामला भी ठंडा पड़ता जा रहा है. अभी तक न तो उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया है और न ही आलाकमान द्वारा उन्हें मनाने की कोई खास कोशिश की गई है. विधानसभा सचिवालय ने उन्हें लॉकडाउन खत्म होने के बाद 7 दिन में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा है. पार्टी के प्रदेश प्रभारी अजय माकन ने कहा है कि प्रदेश के नेता उनसे बात कर मामले को सुलझाएंगे. यानि पार्टी आलाकमान इस मामले को लेकर ज्यादा दिलचस्पी और गंभीरता नहीं दिखा रहा है. उधर, दिन गुजरने के साथ-साथ हेमाराम चौधरी के तेवर भी नरम पड़ते जा रहे हैं.