Inside Story: राजस्थान के बहुचर्चित मामलों की CBI जांच की क्या है जमीनी हकीकत ? पढें विस्तृत रिपोर्ट

सीबीआई जांच के लिये राजनीतिक हस्तक्षेप से भी बहुत कुछ तय होता है. (सांकेतिक तस्वीर)

सीबीआई जांच के लिये राजनीतिक हस्तक्षेप से भी बहुत कुछ तय होता है. (सांकेतिक तस्वीर)

Ground reality of CBI investigation of most popular cases: गहलोत सरकार ने बाड़मेर के कमलेश प्रजापत एनकाउंटर केस की जांच सीबीआई से करवाने के लिये केन्द्र को चिट्ठी लिख दी है. लेकिन इससे पहले भी प्रदेश के कई केस सीबीआई के हाथ में है. जानिये क्या है उनके जमीनी हालात.

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जयपुर. प्रदेश की गहलोत सरकार ने बाड़मेर के बहुचर्चित कमलेश प्रजापत एनकाउंटर मामले की सीबीआई जांच (CBI investigation) के लिए भले ही केंद्र सरकार को सिफारिशी चिट्ठी लिख दी हो लेकिन अब यह सीबीआई पर निर्भर करता है कि वह इस मामले को हाथ में लेती है या फिर इंकार करती है. कमलेश एनकाउंटर केस (Kamlesh encounter case) से पहले भी राज्य सरकारें कई मामलों में सीबीआई जांच की मंजूरी दे चुकी हैं, लेकिन इनमें से कुछ सिरे नहीं चढ़ पाई.

कुछ मामलों में सीबीआई जांच कर रही है जबकि कुछ मामलों की उसने जांच बंद कर दी है. राज्य के गृह विभाग ने सीबीआई जांच की सिफारिश वाली चिट्ठी केंद्र को भेज दी है. अब इस केस का परीक्षण होगा. सीबीआई केंद्रीय कार्मिक लोक शिकायत मंत्रालय के अधीन आती है. मंत्रालय राजस्थान सरकार से मिली चिट्ठी को सीबीआई को रेफर करेगा. सीबीआई पूरे केस का परीक्षण करने के बाद ही जांच करने या नहीं करने पर फैसला करेगी.

राजनीतिक हस्तक्षेप से भी बहुत कुछ तय होता है

राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और केंद्र में बीजेपी की. इस मामले की सीबीआई जांच होने का मतलब है कांग्रेस सरकार पर सवाल उठना. ऐसे में इस मामले की सीबीआई जांच होना लगभग तय माना जा रहा है.
प्रदेश के बहुचर्चित मामले

भंवरी देवी अपहरण एवं हत्या मामला

राजस्थान की सियासत में उबाल लाने वाले बहुचर्चित भंवरी देवी अपहरण और हत्या के मामले की जांच 15 सितंबर 2011 को राज्य सरकार ने सीबीआई से कराने की अनुशंसा की थी. 25 फरवरी 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को रोजाना सुनवाई के लिए कहा. इसी के साथ कई वर्षों से लंबित इस मामले में शीघ्र फैसला आने की आस बंधी है. सीबीआई ने इस मामले में तीन अलग-अलग आरोप पत्र साल 2012 में पेश किए. इस मामले में सीबीआई की तरफ से कुल 197 गवाह पेश किए गए. इन सभी के बयान पूरे हो चुके हैं. इस मामले में 17 आरोपी हैं. प्रत्येक आरोपी से कोर्ट ने 1044 प्रश्न पूछने तय किए हैं. सीबीआई ने तीन दिसंबर 2011 को पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा और कांग्रेस विधायक मलखान सिंह विश्नोई को गिरफ्तार कर लिया था. इस मामले में 15 अन्य गिरफ्तारियां भी हुईं. इसके बाद से महिपाल और मलखान अभी तक जेल में ही है.



आनंदपाल एनकाउंटर केस

राज्य के चर्चित आनंदपाल एनकाउंटर मामले की जांच 27 दिसंबर 2017 सीबीआई को सौंपी गई थी. केंद्र सरकार ने राजपूत नेताओं के दबाव पर यह मामला सीबीआई को सौंपा था. वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली तत्कालीन बीजेपी सरकार ने मुठभेड़ के साथ ही सांवराद में हिंसा की जांच भी सीबीआई को सौंप दी थी. सीबीआई ने 5 जनवरी 2018 को केस दर्ज किया. सीबीआई मामले की जांच कर रही है. आनंदपाल के गांव सांवराद में हुए उपद्रव के मामले की सीबीआई की चार्जशीट में दो दर्जन राजपूत नेताओं को आरोपी बनाया गया है. आरोपियों में बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक व पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा का नाम भी शामिल है.

डेल्टा मेघवाल प्रकरण

बीकानेर की दलित छात्रा डेल्टा मेघवाल प्रकरण की सीबीआई ने जांच करने से इंकार कर दिया था. 17 वर्षीय दलित छात्रा बीकानेर के नोखा में एक प्रशिक्षण संस्थान में पानी की टंकी में मृत पाई गई थी. उसके पिता का आरोप था कि संस्थान के शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षक ने उसके साथ बलात्कार किया था. पिछली वसुंधरा सरकार ने डेल्टा मेघवाल प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा की थी लेकिन 4 महीने 10 दिन बाद सीबीआई ने मामले को हाथ में लेने से इनकार कर दिया. इस मामले को लेकर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वसुंधरा सरकार पर जमकर निशाना साधा था.

सीआई विष्णुदत्त विश्नोई आत्महत्या मामला

एक वर्ष पहले चूरू जिले के पुलिस थाना राजगढ़ के थानाधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई के बहुचर्चित आत्महत्या प्रकरण की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा गहलोत सरकार ने की थी. सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है. करीब 6 महीने पहले सीबीआई ने कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया से पूछताछ भी कर ली है. सीबीआई फिलहाल मामले की जांच कर रही है और बयान ले रही है. आरोप है कि विधायक कृष्णा पूनिया के राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण थानाधिकारी विष्णु दत्त विश्नोई ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया था. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारी राजनीतिक दबाव के बाद इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने का निर्णय लिया था.

मनोहर अपहरण केस

गहलोत सरकार ने हाल ही में 20 मार्च को करीब चार वर्ष पूर्व पाली जिले फालना से रहस्यमयी ढंग से गायब हुए नेतरा के मनोहरसिंह राजपुरोहित केस की जांच सीबीआई को दी थी. 16 वर्षीय मनोहर 23 नवंबर 2016 को रहस्यमयी ढंग से फालना से लापता हो गया था. वह फालना के एक निजी स्कूल की 12वीं कक्षा में पढ़ता था. वह 23 नवंबर को बस से फालना गया था. उसके बाद घर नहीं लौटा. पांच से 17 दिसंबर 2016 के बीच कभी उसके घर तो कभी स्कूल के पत्ते पर फिरौती के आठ पत्र पहुंचे थे. लेकिन ये पत्र किसने भेजे इसका पुलिस खुलासा नहीं कर पाई है.

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