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Rajasthan: किसान के लिये आसान नहीं है MSP पर फसल बेचना, ये बाधायें पहुंचाती हैं जबर्दस्त घाटा

कई बार किसान एमएसपी पर खरीद का पंजीयन करवाने से भी चूक जाते हैं. उसके चलते भी उन्हें इससे वंचित होना पड़ता है.
कई बार किसान एमएसपी पर खरीद का पंजीयन करवाने से भी चूक जाते हैं. उसके चलते भी उन्हें इससे वंचित होना पड़ता है.

देश के अन्न उपजाने वाले किसान के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum support price) पर फसल बेचना आसान नहीं है. इस खरीद प्रक्रिया के नियम कायदे किसान (Farmers) के पसीने ला देते हैं. इसमें कई बातों की अनिवार्यता को पूरा करते करते ही किसान का समय निकल जाता है.

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जयपुर. न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum support price) पर फसल खरीद को लेकर देश में घमासान मचा हुआ है. किसान (Farmers) एमएसपी पर उपज की गारंटीड खरीद का कानून बनाए जाने की मांग कर रहे हैं. अभी भी किसानों को एमएसपी पर उपज बेचने में कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है. वहीं मण्डियों में फसल किस भाव बेची गई यह कई बार किसान को ही मालूम नहीं होता. इससे किसान असमंजस में रहता है कि उसे उसकी फसल का कितना दाम मिलेगा.

अन्न उपजाने के बाद उसे उचित दामों पर बेचना भी किसान के लिए एक बड़ी चुनौती है. कृषि कानूनों के विरोध में आन्दोलन कर रहे किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून बनाए जाने की मांग भी कर रहे हैं. दरअसल अभी एसएसपी की पर उपज की खरीद का प्रावधान तो है लेकिन उसमें इतनी बाधाएं हैं कि केवल 15 से 20 फीसदी किसान ही अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेच पाते हैं. ज्यादातर किसानों को अपनी उपज मंडियों में व्यापारियों के हाथ औने-पौने दामों में बेचनी पड़ती है. एमएसपी पर उपज बेचने की बाधाओं की अगर बात करें तो इसमें कुल उत्पादन का केवल 25 प्रतिशत खरीदने का प्रावधान है.

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गणना भी सही तरीके से नहीं हो पाती है


इस 25 प्रतिशत की गणना भी सही तरीके से नहीं हो पाती है. वास्तविक रूप से 20 से 22 प्रतिशत उपज की ही सरकारी खरीद हो पाती है. इस मानक के हिसाब से इसी साल प्रदेश में 55 हजार टन चना की कम खरीद हुई थी. एमएसपी पर खरीद की प्रक्रिया केवल 90 दिन तक ही जारी रहती है।. कई बार खरीद की प्रकिया तब शुरू होती है जब किसान अपनी उपज बेच चुके होते हैं. एक किसान से अधिकतम 40 क्विंटल खरीद का भी इसमें राइडर है.



ये बाधायें भी डालती है किसान को मुश्किल में
कई बार किसान एमएसपी पर खरीद का पंजीयन करवाने से भी चूक जाते हैं. उसके चलते भी उन्हें इससे वंचित होना पड़ता है. वहीं कई बार किसान ऑनलाइन रूप से निर्धारित समय पर अपनी उपज लेकर खरीद केन्द्र नहीं पहुंच पाते और नंबर निकल जाने पर उन्हें एमएसपी पर फसल बेचान से वंचित रहना पड़ता है. इतना ही नहीं एमएसपी पर फसल बेचने के लिए गिरदावरी रिपोर्ट की भी जरुरत होती है जो कई बार किसान समय पर नहीं जुटा पाते और इसके चलते एमएसपी पर फसल नहीं बेच पाते. इन सब बाधाओं की वजह से किसानों को अपनी उपज लेकर मंडियों का रुख करना पड़ता है. मंडियों में कई बार फसल बेचने वाले किसान को ही यह पता नहीं होता कि उनकी उपज किस भाव पर खरीदी गई है और व्यापारी उन्हें औने-पौने दाम थमा देते हैं. मंडियों में कई बार किसान को व्यापारी भुगतान भी समय पर नहीं करते.
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