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जब इंदिरा गांधी सरकार ने Jaigarh Fort का खजाना खोजने के लिए बुलाई थी सेना

सबसे बड़ी तोप वाले जयगढ़ में इंदिरा ने कराई थी खजाने की खोज

सबसे बड़ी तोप वाले जयगढ़ में इंदिरा ने कराई थी खजाने की खोज

Mystery of Jaigarh Fort : इतिहास के कई रहस्य और प्रसंगों को खुद में समेटे शान से खड़ा है जयपुर से 14 किमी दूर जयगढ़ का किला. यही वह किला है, जिसमें एशिया की सबसे बड़ी तोप है. यही वह किला है, जिसके खजाने को खोजने के लिए इंदिरा गांधी सरकार ने खुदाई करवाई थी. इसके लिए सेना तक लगाई गई थी. 1976 में सरकार ने सेना की एक टुकड़ी को किले में खजाना खोजने की जिम्मेदारी सौंपी थी. सेना ने तीन महीने तक जयगढ़ किले में खोजी अभियान चलाया था.

  • News18Hindi
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जयपुर. बात 1975-76 की है. देश में आपातकाल लगा हुआ था. इसी दौरान आयकर विभाग ने जयपुर राजघराने के महलों पर छापे मारे और सेना ने इस किले की तलाशी ली. केंद्र ने सेना की मदद लेकर खजाने की खोज में कुछ महीनों तक दुर्ग में खुदाई कराई. यह वही खजाना था जो राजा मानसिंह अफगानिस्तान पर हमला कर लाए थे. आखिर एक दिन जयपुर-दिल्ली हाईवे को बंद कर दिया गया. तब चर्चा रही कि केंद्र ने लोगों को धोखे में रखकर खजाना उस बंद हाईवे से ट्रक भरकर दिल्ली पहुंचाया है.

मगर सरकार ने स्पष्ट तौर पर मना किया कि उन्हें किले से कोई खजाना नहीं मिला हैं. तब सवाल उठा कि खजाना नहीं मिला तो गया कहां ? कई लोगों ने आरटीआई लगाकर सरकार से खजाने के बारे में जानना चाहा, लेकिन विभागों द्वारा इस सम्बन्ध में उनके पास कोई सूचना न होने का हवाला हर बार दिया जाता रहा.

राजा मानसिंह ने किया था अफगानिस्तान पर हमला

इतिहासकार बताते हैं कि अकबर के दरबार में सेनापति जयपुर के राजा मानसिंह (प्रथम) ने मुगल शहंशाह के आदेश पर अफगानिस्तान पर हमला किया था. उसी अफगानिस्तान पर, जहां अब तालिबान ने कब्जा कर रखा है. तब उस इलाके को जीतने के बाद राजा मानसिंह को काफी धन-दौलत मिली. उन्होंने इसे दिल्ली दरबार में सौंपने की बजाय अपने पास ही रख लिया. जयगढ़ किले के निर्माण के बाद कहा जाने लगा कि इसमें पानी के संरक्षण के लिए बनी विशालकाय टंकियों में सोना-चांदी और हीरे-जवाहरात छिपाकर रखे गए हैं.

कांग्रेस की विरोधी थी गायत्री देवी की स्वतंत्र पार्टी

जयगढ़ किले में खजाने की बात देश को आज़ादी मिलने के बाद भी अक्सर चर्चा में आती रही. इस वक्त जयपुर राजघराने के प्रतिनिधि राजा सवाई मान सिंह (द्वितीय) और उनकी पत्नी गायत्री देवी थे. ‘स्वतंत्र पार्टी’ के सदस्य ये दोनों लोग कांग्रेस के धुर विरोधी थे. गायत्री देवी तीन बार जयपुर से कांग्रेस के प्रत्याशी को हराकर लोकसभा सदस्य भी बन चुकी थीं. इसलिए इस दौरान राजघराने के कांग्रेस पार्टी से संबंध काफी खराब चल रहे थे.

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सेना ने तीन माह की खजाना खोजने की मशक्कत

देश में आपातकाल लगा तब गायत्री देवी ने इसका मुखर विरोध किया. इंदिरा गांधी सरकार ने इसी वजह से आयकर विभाग को राजघराने की संपत्ति की जांच के आदेश दे दिए. 1976 में सरकार की इस कार्रवाई में सेना की एक टुकड़ी भी शामिल थी. इसे जयगढ़ किले में खजाना खोजने की जिम्मेदारी सौंपी गई. उस समय सेना ने तीन महीने तक जयगढ़ किले और उसके आसपास खोजी अभियान चलाया.
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सरकार ने बताया कि किले से कोई संपत्ति नहीं मिली

खजाना खोजी अभियान के बाद सरकार ने औपचारिक रूप से बताया कि किले से किसी तरह की संपत्ति नहीं मिली. बाद में सेना के भारी वाहनों को दिल्ली पहुंचाने के लिए जब दिल्ली-जयपुर राजमार्ग एक दिन के लिए बंद किया गया तो यह चर्चा जोरों से चल पड़ी कि सेना के वाहनों में राजघराने की संपत्ति है. लेकिन बाद में इस बात की कभी पुष्टि नहीं हो पाई और अभी तक यह बात एक रहस्य ही है.

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