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जयपुर: एक और बाघ ने तोड़ा दम, रणथम्भौर के T-25 की मौत, खंडार रेंज में मिला शव
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Arbaz ahmed | News18 Rajasthan
Updated: January 20, 2020, 1:06 PM IST
जयपुर: एक और बाघ ने तोड़ा दम, रणथम्भौर के T-25 की मौत, खंडार रेंज में मिला शव
T-25 को जालिम और डॉलर मेल के नाम से भी जाना जाता था. जालिम उसे उसके खूंखार बर्ताव के लिए कहा जाता था.

सवाई माधोपुर (Sawai madhopur) जिले में स्थित रणथम्भौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) के सबसे प्रसिद्ध बाघ (Famous tiger) T-25 कि सोमवार को मौत (Death) हो गई. रणथम्भौर रिजर्व की ही खंडार रेंज में T-25 का शव बरामद (Dead body recovered) किया गया है.

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जयपुर. सवाई माधोपुर (Sawai madhopur) जिले में स्थित रणथम्भौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) के सबसे प्रसिद्ध बाघ (Famous tiger) T-25 कि सोमवार को मौत (Death) हो गई. रणथम्भौर रिजर्व की ही खंडार रेंज में T-25 का शव बरामद (Dead body recovered) किया गया है. टाइगर की मौत के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है. यह बाघ 17 साल का था.

शव पर किसी प्रकार की चोट के निशान नहीं
वन विभाग के अनुसार T-25 का शव सोमवार को सुबह बरामद किया गया. प्रथम दृष्टया बाघ के शव पर किसी प्रकार की चोट के निशान नहीं मिले हैं. पहले मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा. यह बोर्ड पोस्टमार्टम के दौरान ही यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि मौत के कारण क्या हो सकते हैं. बाघ के शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी की जा रही है.

खूंखार बर्ताव के लिए जाना जाता था

T-25 को जालिम और डॉलर मेल के नाम से भी जाना जाता था. जालिम उसे उसके खूंखार बर्ताव के लिए कहा जाता था. वहीं डॉलर मेल उसे उसके शरीर पर बने डॉलर के निशान की वजह से कहा जाता था. यह बाघ 2011 में चर्चा में आया था, जब बाघिन T-5 की अचानक मौत हो गई थी. उसके दो दूध मुंहे शावक थे. उन दोनों शावकों को पाल पोसकर के T-25 ने ही बड़ा किया था. इससे पहले ऐसा माना जाता था कि बाघ कभी शावकों को पालते नहीं है, बल्कि मार देते हैं. लेकिन ज़ालिम ने दोनों शावकों को पाल पोसकर बड़ा किया. संभाला और सुरक्षा की. ये दुनिया के सामने एक मिसाल थी कि बाघ भी शावकों को पाल सकते हैं. ये दोनों बाघिन आज भी सरिस्का में ST-9 और ST-10 के नाम से हैं.

यह बाघ रणथम्भौर के लिए काफी अहम था
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिन्दम तोमर ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद ही पूरी जानकारी मिल पाएगी की T-25 की मौत का असली कारण क्या रहा है ? यह बाघ रणथम्भौर के लिए काफी अहम माना जाता था. आज रणथम्भौर और सरिस्का के जंगलों में T-25 की काफी संतानें मौजूद हैं.यहां विश्व प्रसिद्ध बाघों का एक दौर रहा है
रणथम्भौर के जंगलों में विश्व प्रसिद्ध बाघों का एक दौर रहा है. यहां की विरासत बाघिन मछली और T-17 उर्फ सुंदरी भी नहीं रही. T- 24 उदयपुर के सज्जनगढ़ में कैद है. T- 28 स्टारमेल की हो गई और अब T-25 जालिम भी नहीं रहा. बाघों की यह जनरेशन पूरी दुनिया में काफी प्रसिद्ध हुई थी. अब इस जनरेशन के बुजुर्ग बाघ एक एक कर इस दुनिया को अलविदा कह रहे हैं.

 

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First published: January 20, 2020, 12:32 PM IST
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