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292 साल का हुआ जयपुर, इसी साल UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुई थी गुलाबी नगरी

News18 Rajasthan
Updated: November 17, 2019, 8:08 PM IST
292 साल का हुआ जयपुर, इसी साल UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुई थी गुलाबी नगरी
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल जयपुर 292 साल का हुआ (फाइल फोटो)

यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल हमारा जयपुर (Jaipur) 292 साल का हो चुका हैं. 18 नवम्बर 1727 को इस शहर की स्थापना हुई थी.

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जयपुर. यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल जयपुर (Jaipur) 292 साल का हो चुका हैं. 18 नवम्बर 1727 को इस शहर की स्थापना हुई थी. गुलाबी नगरी (pink city) के नाम से मशहूर जयपुर के लिए माना जाता हैं कि नगर नियोजन को ध्यान में रखकर बनाया गया ये देश का पहला शहर हैं. करीब तीन सदी से गौरवशाली इतिहास के साथ ढूंढाड़ी विरासत को संभाले ये शहर आज भी दुनियां में अपना खास मुकाम रखता है, इस शहर की नींव महाराजा सवाई जयसिंह ने रखी थी. कला और संस्कृति प्रेमी महाराजा जयसिंह ने सबसे पहले गंगापोल पर इसकी नींव रखी. जयपुर को 2 लाख की आबादी के लिए बसाया गया था और अब ये शहर अब बढ़ते-बढ़ते 70 लाख की आबादी का हो चुका है. करीब तीन सदी से ये बढ़ते-बढ़ते ये शहर आज देश की चुनिंदा सब मैट्रो सिटीज़ में शामिल है,

18 नवम्बर 1727 को हुई थी शहर की स्थापना

18 नवम्बर 1727 को महाराजा जयसिंह द्वितीय ने जयपुर को बसाया था और वो भी इस कारीगरी के साथ कि वह भारत का पेरिस (Paris of india) माना जाता है. जयपुर को बसाने के लिए प्रसिद्ध वास्तुकार विद्याधर को जिम्मेदारी भी दी गई थी. बताया जा रहा है कि जयपुर को बसाने के दौरान शहर के चारो ओर एक चारदीवारी बनाई गई थी, जिसमें प्रवेश के लिए 7 गेट थे. आज भी इस चारदीवारी मे बसा शहर परकोटा और चारदीवारी ही कहलाता है. यही वजह हैं कि जयपुर के 292 साल बाद भी लोग जयपुर की बनावट से खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं.

विश्व धरोहर सूची में शामिल हुई राजधानी जयपुर की चारदीवारी (फाइल फोटो)
विश्व धरोहर सूची में शामिल हुई राजधानी जयपुर की चारदीवारी (फाइल फोटो)


जयपुर को कहा जाता है भारत का पेरिस

जयपुर शहर की पहचान यहां के महलों और पुराने घरों में लगे गुलाबी धौलपुरी पत्थरों से होती है, जो यहां के स्थापत्य की खूबी है. इस शहर के वास्तु के बारे में कहा जाता है कि शहर को सूत से नाप लीजिये, नाप-जोख में एक बाल के बराबर भी फ़र्क नहीं मिलेगा. जयपुर को भारत का पेरिस भी कहा जाता है.

इसी साल यूनेस्को में बजा जयपुर के परकोटे का डंकाये पूरा शहर करीब छह भागों मे बंटा हुआ है. सैकडों साल के भविष्य को सोचते हुए परकोटे के इलाके में सडको को भी काफी चौड़ा रखा गया था. शहर के ठीक बीचो-बीच तीन चौपड़े भी बनाई गई थी, जिन्हें रामगंज चौपड, बड़ी चौपड़ और छोटी चौपड़ नाम दिया गया. बताया जाता है कि शहर बनाने के दौरान जयपुर की आबादी दो लाख थी, लेकिन सैकड़ों साल बीतने के बाद ये बढ़कर अब करीब 50 लाख तक जा पहुंची है. करीब तीन सदी से ये बढ़ते-बढ़ते ये शहर आज देश की चुनिंदा सब मैट्रो सिटीज़ में शामिल है.

( जयपुर से दीपक व्यास की रिपोर्ट )

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First published: November 17, 2019, 7:57 PM IST
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